शादी और पार्टी में लाउड डीजे बजता है। इतनी तेज आवाज कानों के लिए बहुत नुकसानदायक है। इसका प्रभाव आपके दिल पर भी पड़ता है। इसकी वजह से हार्ट अटैक आने का भी खतरा रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 6.2 करोड़ लोग सुनने की क्षमता से प्रभावित हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण तेज आवाज है। ट्रैफिक के तेज शोर, काम की जगह तेज आवाज, म्यूजिक या हेडफोन का इस्तेमाल सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
आइए डॉक्टर्स से समझते हैं कि एक इंसान कितनी तेज आवाज झेल सकता है और कितनी तेज आवाज सुनना उसके लिए खतरनाक हो सकता है। हमने वाशी, फोर्टिस हिरानंदानी अस्पताल के कंसल्टेंट ईएनटी डॉ. देवकुमार रंगराजा नचिअप्पन से बात की।
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किस डेसिबल स्तर पर कानों को नुकसान होता है?
हमारे कान हमारी सोच से कहीं ज्यादा संवेदनशील होते हैं। 85 डेसिबल से ज्यादा तेज आवाज के लगातार संपर्क में रहने से कान के अंदर मौजूद बारीक हेयर सेल्स को धीरे-धीरे नुकसान पहुंच सकता है। एक बार ये सेल्स खराब हो जाएं, तो वे दोबारा नहीं बनते। आवाज जितनी तेज होगी, उतने ही कम समय में कानों को नुकसान पहुंच सकता है। उदाहरण के लिए, करीब 80 डेसिबल की आवाज को लंबे समय तक सहन किया जा सकता है, जबकि 90 डेसिबल पर सुरक्षित सुनने का समय काफी कम हो जाता है।
तेज DJ म्यूजिक कितना नुकसानदायक हो सकता है?
DJ का तेज म्यूजिक माहौल को खुशनुमा जरूर बना सकता है, लेकिन बड़े स्पीकर्स के बहुत करीब खड़े रहने से कानों को बेहद तेज आवाज का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे कार्यक्रम के बाद कानों में घंटी या सीटी बजना, आवाज कम सुनाई देना या कान बंद लगना इस बात के संकेत हैं कि कानों पर तेज आवाज का असर पड़ा है। बार-बार ऐसी आवाज के संपर्क में रहने से हमेशा के लिए सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। स्पीकर्स से दूरी बनाए रखना, बीच-बीच में कानों को आराम देना और जरूरत पड़ने पर ईयर प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करना सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।
क्या तेज जानलेवा भी हो सकती है?
बहुत तेज आवाज कानों को तुरंत नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे कान के पर्दे को चोट, सुनने की क्षमता में गंभीर कमी और कानों में तेज आवाज या घंटी बजने जैसी समस्या हो सकती है। हालांकि, सिर्फ तेज आवाज से सीधे तौर पर मौत होना बहुत दुर्लभ है। लेकिन बेहद तेज आवाज शरीर में तनाव, घबराहट और भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है, जिससे खासकर संवेदनशील परिस्थितियों में दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए कानों की सुरक्षा सिर्फ सुनने की क्षमता बचाने के लिए नहीं, बल्कि हमारे पूरे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए जरूरी है।
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तेज आवाज दिल के लिए कब खतरनाक हो सकती है?
कल्याण, फोर्टिस अस्पताल के निदेशक, हार्ट स्पेशलिस्ट, डॉक्टर विवेक महाजन के मुताबिक हम अक्सर तेज आवाज को केवल कानों से जुड़ी समस्या मानते हैं, लेकिन इसका असर दिल पर भी पड़ सकता है। लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से शरीर में तनाव बढ़ सकता है, जिससे स्ट्रेस हार्मोन, दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। लंबे समय तक, बार-बार तेज आवाज के संपर्क में रहने से दिल की सेहत पर असर पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ आवाज कितनी तेज है, यह नहीं, बल्कि आप कितनी बार और कितनी देर तक उसके संपर्क में रहते हैं, यह भी महत्वपूर्ण है।
क्या तेज आवाज से हार्ट अटैक हो सकता है?
स्वस्थ व्यक्ति में अचानक तेज आवाज सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण नहीं बनती। हालांकि, बहुत तेज या लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने से शरीर में तनाव की प्रतिक्रिया शुरू हो सकती है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल पर दबाव पड़ सकता है। जिन लोगों में पहले से दिल से जुड़ी समस्याओं या जोखिम कारक हैं, उनमें बार-बार तेज आवाज के संपर्क में आना कुल जोखिम को बढ़ा सकता है।
कुछ आनुवंशिक बीमारियां परिवारों में चलती हैं, जिनमें अचानक बहुत तेज आवाज दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में गड़बड़ी पैदा कर सकती है। इससे कार्डियक अरेस्ट और अचानक मौत का खतरा हो सकता है।
