स्लीपमैक्सिंग का चलन इन दिनों तेजी से बढ़ा है। स्लीपमैक्सिंग उन सभी तरीकों, गैजेट्स और नुस्खों को कहते हैं जिनसे लोग जल्दी और गहरी नींद पाने की कोशिश करते हैं। जैसे लोग अपने लुक्स सुधारने के लिए कुछ तरीके अपनाते हैं, वैसे ही अब नींद बेहतर करने के लिए स्लीपमैक्सिंग का इस्तेमाल हो रहा है। स्टैनफोर्ड हेल्थ केयर के एक्सपर्ट क्लीट ए. कुशिदा कहते हैं कि लोग अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को अच्छा करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। कुछ लोग नींद की परेशानी दूर करने के लिए आसान रास्ता ढूंढ रहे हैं।

आज के समय में लोग फिटनेस डिवाइस के जरिए अपनी नींद का डेटा देख सकते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि उनकी नींद कैसी है। सोशल मीडिया पर कई तरह के तरीके दिख रहे हैं। इनमें सोते समय मुंह पर टेप लगाना, नाक चौड़ी करने वाली चीजें इस्तेमाल करना, मैग्नीशियम वाली ड्रिंक्स पीना और सोने से पहले कीवी फल खाना शामिल है। कुछ लोग पीनियल ग्लैंड मेडिटेशन के बारे में भी बताते हैं। उनका दावा है कि इससे दस मिनट से कम समय में नींद आ जाती है।

 

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क्या ये तरीके सच में काम करते हैं?

स्टैनफोर्ड के एक्सपर्ट क्लीट ए. कुशिदा मेलाटोनिन जैसे सप्लीमेंट्स को असरदार मानते हैं। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की प्रोफेसर अनीता शेलगिकर का कहना है कि गहरी सांस लेने या ध्यान लगाने से तनाव कम होता है, जिससे नींद की क्वालिटी बेहतर होती है। रिसर्च के मुताबिक, कीवी खाने से शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन का स्तर बढ़ता है जो नींद लाने में मददगार है। इसके अलावा, ब्लू लाइट को रोकने वाले चश्मे शरीर की नेचुरल घड़ी को ठीक रखने में मदद करते हैं।

 

दूसरी तरफ कई ऐसे तरीके भी हैं जिनके लिए अभी कोई पक्का सबूत नहीं मिला है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मुंह पर टेप लगाने जैसे तरीकों का कोई ठोस टेस्ट नहीं हुआ है। इसी तरह, पीनियल ग्लैंड मेडिटेशन जैसे तरीकों के पीछे भी कोई ठोस आधार नहीं है। मैग्नीशियम सप्लीमेंट्स और व्हाइट नॉइज मशीनों के नतीजे भी हर व्यक्ति पर अलग-अलग रहे हैं। 

 

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नींद को बेहतर बनाने के सही तरीके

नींद को बेहतर बनाने के लिए नील वालिया की सलाह है कि लोग अपनी नींद को लेकर बहुत चिंता न करें। जो लोग बिना ज्यादा सोचे चैन से सोते हैं उन्हें सबसे अच्छी नींद आती है। स्लीप हाइजीन के तहत सोने वाले कमरे का तापमान 60 से 67 डिग्री फारेनहाइट के बीच रखना और सोने से पहले कमरे की रोशनी कम करना फायदेमंद होता है। नींद को परफेक्ट बनाने के चक्कर में लोग ऑर्थोसोनिया जैसी समस्या का शिकार हो सकते हैं। क्लीट ए. कुशिदा मुंह पर टेप लगाने जैसे तरीकों को खतरनाक बताते हैं,  इससे सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों में बलगम जाने का खतरा रहता है।