देशभर में H1N1 फ्लू के मामले से तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में खांसी, जुकाम और सांस लेने में तकलीफ लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली में इन्फ्लूएंजा ए वायरस के 3000 मामले सामने आए हैं जिनमें से 2,308 H1N1 के हैं। इस बीमारी के लक्षण मौसमी फ्लू के जैसे ही है लेकिन इसे हल्के में लेने की गलती न करें।
क्या आप जानते हैं H1N1 फ्लू जानलेवा हो सकता है। इस बारे में हमने लखनऊ, अपोलो अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजिस्ट, एमडी डॉक्टर अग्रिजीत पालित से बात की।
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H1N1 वायरस किन परिस्थितियों में जानलेवा हो सकता है?
H1N1 संक्रमण उस समय जानलेवा हो सकता है, जब इससे निमोनिया या सांस लेने में गंभीर परेशानी जैसी जटिलताएं हो जाएं। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और फेफड़ों या हृदय की बीमारी, डायबिटीज, कैंसर या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक होता है। सांस लेने में बढ़ती परेशानी, लगातार बुखार या लगातार बिगड़ते लक्षणों को देखते हुए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
H1N1 के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
H1N1 अब भारत में मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा बन चुका है और इसके मामले हर साल सामने आ सकते हैं। इस साल कई क्षेत्रों में H1N1 संक्रमण अधिक स्तर पर और बड़े भौगोलिक क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। हालांकि, ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि कोई नया या ज्यादा खतरनाक वायरस सामने आया है। ICMR के अनुसार, A(H1N1)pdm09 वायरस भारत में 2025 से मौजूद है। इसमें हुए आनुवंशिक बदलाव सामान्य मौसमी बदलावों के अनुरूप हैं और किसी नए या असामान्य रूप से ज्यादा खतरनाक स्ट्रेन के प्रमाण नहीं मिले हैं। मामलों में बढ़ोतरी के पीछे मौसमी संक्रमण, मानसून का मौसम, लोगों की आवाजाही और अधिक जांच व निगरानी जैसे कारण हो सकते हैं। इसलिए लगातार निगरानी, जरूरत के अनुसार जांच और खासकर जोखिम वाले लोगों में सावधानी जरूरी है।
H1N1 इन्फ्लुएंजा और मौसमी फ्लू में क्या अंतर है?
H1N1 भी इन्फ्लुएंजा A वायरस का एक प्रकार है, जो मौसमी फ्लू का कारण बन सकता है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर H1N1 और दूसरे मौसमी फ्लू में अंतर करना संभव नहीं है। बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण दोनों में हो सकते हैं। किसी खास इन्फ्लुएंजा वायरस की पहचान जरूरी होने पर लैब टेस्ट किया जाता है।
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अगर H1N1 हो जाए, तो कौन-सी जांच करानी चाहिए?
जहां जांच की जरूरत हो, वहां NAAT आधारित मॉलिक्यूलर टेस्ट, जैसे रियल-टाइम PCR, इन्फ्लुएंजा संक्रमण की पुष्टि कर सकते हैं। Truenat में इन्फ्लुएंजा A/B और H3N2/H1N1 की जांच के लिए मॉलिक्यूलर टेस्ट उपलब्ध हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है और लगभग 60 मिनट में परिणाम मिल सकते हैं।
संक्रमण से बचने के सबसे अच्छे तरीके क्या हैं?
संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण के साथ रोजमर्रा की सावधानियां भी जरूरी हैं। नियमित रूप से हाथ धोएं, खांसते या छींकते समय नाक और मुंह ढकें, बिना हाथ धोए चेहरे को छूने से बचें और यात्रा के दौरान या भीड़भाड़ वाली अथवा कम हवादार जगहों पर अच्छी तरह फिट होने वाला मास्क पहनें। जिन लोगों में लक्षण हैं, उन्हें दूसरों के साथ करीबी संपर्क कम करना चाहिए, भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए और संभव हो तो ठीक होने तक घर पर रहना चाहिए। कमरे और आसपास हवा का अच्छा वेंटिलेशन रखें और लक्षण वाले लोगों के अनावश्यक संपर्क से बचें। अधिक जोखिम वाले लोगों को लक्षण दिखाई देने पर या उनकी स्थिति बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
