आजकल की महिलाएं अपनी शर्तों पर जीना और नई जगहों को घूमना पसंद कर रही हैं, यही वजह है कि अकेले यात्रा करने का क्रेज उनमें तेजी से बढ़ रहा है। रेडबस की रिपोर्ट बताती है कि साल 2019 से 2025 के बीच महिलाओं के शहर से शहर तक बस से सफर करने के चलन में 136 प्रतिशत की बड़ी उछाल आई है। यह बढ़ोतरी कुल यात्रियों की संख्या में हुई 72 प्रतिशत की बढ़ोतरी से लगभग दोगुनी है। अब हर तीन में से एक बस यात्री महिला है जबकि साल 2019 में यह संख्या 23 प्रतिशत थी और अब बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई है।
सफर करने वाली इन महिलाओं में 14 से 29 साल की युवा लड़कियां जिन्हें जेन-जी कहा जाता है वे सबसे आगे हैं। पूरी महिला यात्रियों में से 60 प्रतिशत लड़कियां इसी उम्र की हैं। जो महिलाएं अकेले सफर कर रही हैं उनमें 68 प्रतिशत हिस्सा युवाओं का है।
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बढ़ता सोलो सफर का शौक
यह बदलाव सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों यानी टियर-2 और टियर-3 की महिलाएं भी इसमें बहुत आगे हैं। जितनी भी महिलाएं बस में सफर करती हैं उनमें से 68 प्रतिशत महिलाएं छोटे शहरों से ही आती हैं। असम, केरल, आंध्र प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, पुडुचेरी और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में महिलाएं सोलो यात्रा को बहुत पसंद कर रही हैं। आज की महिला यात्री अपनी सुरक्षा और सुविधा को लेकर बहुत जागरूक हैं। करीब 62 प्रतिशत महिलाएं अपनी यात्रा की बुकिंग कम से कम एक दिन पहले ही कर लेती हैं। सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए 47 प्रतिशत महिलाएं अपना साधन खुद चुनती हैं जो उन्हें सुरक्षित लगती है।
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सोशल मीडिया का रोल
आज के समय में सोशल मीडिया ने अकेले घूमने के चलन को बहुत बढ़ा दिया है। इंटरनेट पर यात्रा से जुड़ी फोटो और वीडियो देखकर लोग काफी प्रभावित हो रहे हैं। इन्हें देखकर लोगों के मन से अकेले बाहर जाने का डर खत्म हो गया है। इसके अलावा, मोबाइल पर आसानी से होटल और टिकट बुक करने की सुविधा ने भी काफी मदद की है। अब लोग अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा आराम चाहते हैं। वे खुद के साथ समय बिताने और नई जगहों को समझने के लिए अकेले सफर पर निकलना पसंद कर रहे हैं।
