देश की राजधानी दिल्ली में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) इसलिए भी मशहूर है कि यहां मरीजों का जल्दी नंबर नहीं आता। यही नंबर ना आना एक लड़की पर भारी पड़ा है। 2 साल की उम्र से ही हार्ट की बीमारी से जूझ रही इस लड़की ने 13 साल इंतजार किया। राजस्थान की इस बच्ची के इतने इंतजार के बावजूद उसकी हार्ट सर्जरी नहीं हो पाई और मंगलवार को उसकी मौत हो गई। अब लड़की के पिता ने आरोप लगाए हैं कि सर्जरी की तारीख तय की गई थी लेकिन इसे बदल दिया गया और उनकी बेटी की मौत हो गई।

 

दो हफ्ते पहले ही तनवी नाम की इस लड़की को दिल्ली के AIIMS में एडमिट कराया गया था। उनके पिता मुकेश परियानी का कहना है कि डॉक्टरों से बातचीत के बाद ही एडमिट करवाया गया था और हार्ट ट्रांसप्लांट पर बात चल रही थी। बच्ची के पिता के मुताबिक, डॉक्टरों ने कई कागज मांगे, जांच कराने को कहा और हार्ट का इवैल्युएशन कराने की भी बात कही थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस लड़की के लिए उनका परिवार पिछले 13 साल से AIIMS के चक्कर लगा रहा था और अब जाकर जब नंबर आया तो जान चली गई। 

डॉक्टरों ने क्या बताया?

इस केस के बारे में AIIMS के डिपार्टमेंट ऑफ CTVS के मुखिया डॉ. वी देवागौड़ू ने कहा, 'तनवी को वेंट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) और पल्मनरी अट्रेसिया था। 2012 में इसका पता चला था और 2013 में सर्जरी के लिए इवैल्युएशन किया गया था। 2018 में सर्जरी की जरूरत से इनकार कर दिया दया था और दवाओं से ही तनवी का इलाज चल रहा था। पिछले महीने 24 अगस्त को तनवी को यहां एडमिट कराया गया था ताकि जांच कराई जा सके कि हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट हो सकता है कि नहीं।'

 

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उन्होंने बताया कि ट्रांसप्लांट के लिए सोमवार को तनवी की एंडोस्कोपी कराई गई थी। उन्होंने आगे बताया, 'मंगलवार रात 2:50 बजे तनवी ने थकान और कमजोरी की शिकायत की और उनका शरीर नीला पड़ गया। उनका ऑक्सीजन लेवल 48 पर्सेंट पर आ गया था। 3:30 बजे ऑक्सीजन स्टार्ट किया गया लेकिन स्थिति बिगड़ती गई और उन्हें कार्डिएट अरेस्ट हुआ। उन्हें बचाने की बहुत कोशिशें हुईं लेकिन जान नहीं बची और 5 बजकर 6 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।'  

13 साल किया इंतजार

तनवी के परिवार के मुताबिक, पहली बार उन्हें साल 2012 में AIIMS लाया गया था। 31 जनवरी 2024 को AIIMS में ही पता चला कि तनवी को VSD और पल्मनरी अट्रेसिया है। तब ही AIIMS ने बताया था कि इसमें यूनिफोकलाइजेशन और कंडूइट सर्जरी की जरूरत है और 1.2 लाख रुपये खर्च होंगे। अब तनवी के परिवार का आरोप है कि 2015 में सर्जरी होनी थी लेकिन कभी हुई नहीं।

 

AIIMS के डॉक्टरों का कहना है कि पहले अनुमान था कि सर्जरी में 1.5 लाख रुपये खर्च होंगे। हालांकि, पल्मनरी आर्टरी ही नहीं मिली तो कोई सर्जरी करना संभव नहीं था और हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट पर विचार किया जा रहा था।

तनवी को क्या दिक्कत थी?

आसान भाषा में समझें तो AIIMS की ही एक रिपोर्ट बताती है कि तनवी के फेफड़ों तक खून ले जाने वाली कई नसें ही नहीं थीं। बचपन से ही ऐसा था जिसके चलते उनकी कार्डिएक एनाटमी बहुत जटिल थी। हालांकि, शुरुआत में AIIMS ने ही सर्जरी कराने की बात कही थी और बाद में कहा कि सर्जरी संभव ही नहीं है।

 

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अब तनवी के पिता का कहना है कि उनकी बेटी की मौत के बारे में उन्हें कोई संतोषजनकर जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि अस्पताल की ओर से उनसे बार-बार कई कागज मांगे गए और डिस्चार्ज कराने को भी कहा गया उनका कहना है कि इस मामले में साजिश हुई है और इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने अपनी बेटी का शव लेने से भी इनकार कर दिया था।