पिछले कुछ दिनों से देश में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़ा जमीन घोटाले का मामला चर्चा में है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार पर जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। BJP का कहना है कि कर्नाटक में खड़गे परिवार ने करीब 100 करोड़ रुपये की जमीन लूट की है और इसे एक ट्रस्ट के जरिए अंजाम दिया गया है। पार्टी ने इस मामले में प्रियांक खड़गे का भी नाम लिया है।

 

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि यह ट्रस्ट खड़गे परिवार का निजी ट्रस्ट है, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियांक खड़गे, उनकी पत्नी और दामाद सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट को कर्नाटक में कई जमीन के प्लॉट दिए गए और ये सब सत्ता और प्रभाव का इस्तेमाल करके हासिल किए गए हैं।

 

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क्या है BJP का आरोप?

BJP ने दावा किया कि साल 2024 में कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड (KIADB) ने सिद्धार्थ विहारा ट्रस्ट को 5 एकड़ औद्योगिक जमीन आवंटित की। BJP के मुताबिक, यह जमीन एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के लिए दी गई थी, जिसकी बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है। BJP नेता ने सवाल उठाया कि जिस ट्रस्ट का एयरोस्पेस या डिफेंस रिसर्च से पहले कोई लेना-देना नहीं रहा, उसे इतनी अहम औद्योगिक जमीन आखिर किस आधार पर दी गई।

 

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19 एकड़ जमीन आवंटन का भी लगाया आरोप

BJP नेता ने कहा कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2016 में, जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी तब गुलबर्गा जिले में सिद्धार्थ विहारा ट्रस्ट को 19 एकड़ जमीन भी दी गई थी। उनका कहना है कि यह जमीन पाली भाषा के शोध और विकास के नाम पर आवंटित की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ही ट्रस्ट अलग-अलग जगहों पर शोध के नाम पर इतनी बड़ी मात्रा में जमीन कैसे हासिल करता रहा।

 

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भ्रष्टाचार कानून का भी किया जिक्र

BJP ने इस मामले को कानून के हिसाब से काफी गंभीर बताया और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का हवाला दिया। भंडारी ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर इस कानून की धारा 13(1)A और 13(1)B के तहत एक संज्ञेय अपराध है। उनके मुताबिक, अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने पद और प्रभाव का गलत इस्तेमाल करके खुद या अपने परिवार को आर्थिक फायदा या संपत्ति दिलवाता है तो यह भ्रष्टाचार माना जाता है।

 

BJP ने मल्लिकार्जुन खड़गे से यह भी सवाल किया है कि उनके निजी ट्रस्ट ने आखिर ऐसा कौन सा रिसर्च या काम किया था, जिसके आधार पर उन्हें इतनी कीमती सरकारी जमीन दे दी गई।