दिल्ली NCR में जैसे-जैसे ठंड दस्तक देती है, यहां की आबोहवा खराब होने लगती है। ऐसी स्थिति में यहां सास लेना भी मुश्किल हो जाता है। इसके पीछे गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, डीजल से चलने वाले जनरेटर और पराली समेत कई अन्य कारण जिम्मेदार हैं। बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार हर साल सख्त कदम उठाती है। 

 

इस बार भी सरकार ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण तुरंत लागू कर दिया है। क्योंकि 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 244 था। शाम 4 बजे यह बढ़कर 245 हो गया, जो खराब श्रेणी में आता है। 

 

GRAP-1 लागू होने के बाद अब प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। होटल, रेस्तरां और खुले में खाने-पीने की दुकानों पर तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ अन्य कई नियम लागू हो गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन नियमों का पालन कड़ाई से हो रहा है? आंकड़ों से समझिए स्थिति क्या है। 

 

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दिल्ली-NCR में कितना हो रहा नियमों का पालन? 

दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 25 सितंबर से 9 अक्टूबर 2026 के बीच 124 जगहों पर जांच की। इस दौरान 55 जगहों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया। इनमें निर्माण स्थलों, फैक्ट्रियों और डीजल जनरेटर (DG) से जुड़े मामले शामिल हैं। आयोग ने इन मामलों में कड़ी  कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। 

CAQM ने 15 दिनों में 124 जगहों की जांच की। इनमें 6 निर्माण स्थल, 54 फैक्ट्रियां और 64 डीजल जनरेटर सेट शामिल थे। जांच के दौरान 55 जगहों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया। 6 निर्माण स्थल में से 5 जगहों पर उल्लंघन मिला, 54 फैक्ट्रियों में से 35 में और 64 डीजल जनरेटर सेट में से 15 जगहों पर नियमों का उल्लंघन मिला। ऐसे में देखा जाए तो जांच की गई कुल जगहों में से 44.4% पर नियमों का उल्लंघन पाया गया। 

अब तक 1,837 इकाइयों को बंद करने के आदेश

CAQM के फ्लाइंग स्क्वॉड ने अब तक दिल्ली-NCR में 28,868 इकाइयों, परियोजनाओं और अन्य जगहों की जांच की है। 16 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन मिलने पर 1,837 जगहों को बंद करने के आदेश जारी किए गए।

 

इसके अलावा, इनमें से 1,491 जगहों पर नियमों का पालन होने की पुष्टि के बाद दोबारा काम शुरू करने की अनुमति दी गई। वहीं, 130 मामले अंतिम फैसले के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्डों या दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को भेजे गए हैं। बाकी 216 मामलों में अभी दोबारा काम शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई है।