हाल ही में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने कंपनियों से कहा है कि वे रीचार्ज प्लान में बदलाव करें और 28 दिन के बजाय 30 दिन वाले रीचार्ज दें। साथ ही, बिना इंटरनेट वाले रीचार्ज भी देने को कहा गया है। इस सबके बीच चर्चा है कि रीचार्ज की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं। सामान्य तौर पर एक महीने का डेटा और कॉलिंग वाला रीचार्ज 350 से 400 रुपये का है। इसका मतलब है कि एक ग्राहक एक दिन में इन सुविधाओं के लिए कम से कम 10 से 12 रुपये खर्च कर रहा है। फिर भी इंटरनेट की रफ्तार ऐसी है कि कई बार लोग फंसे रह जाते हैं।
यह भी पढ़ें: गलत प्रचार नहीं कर पाएंगे डॉक्टर और अस्पताल, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश समझिए
PM ने की गांवों की बात, शहर में अटक रहा इंटरनेट
यह तब हो रहा है जब देश की केंद्र सरकार इंटरनेट की दुनिया में भारत की रफ्तार बढ़ाने को लेकर अपनी पीठ ठोंक रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 अक्टूबर को इंडिया मोबाइल कांग्रेस पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि 2022 में इसी मंच से देश में 5G की शुरुआत की गई थी।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी ने शिक्षा, भुगतान और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवाओं को बिना बाधा जारी रखने में मदद की है। आज दूरदराज के गांवों और गरीब परिवारों के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण सेवाओं और सुविधाओं तक पहुंच बना पा रहे हैं।’
इन दावों और 5G के लगातार विस्तार के बीच दिल्ली-NCR के कई इलाकों में लोगों को धीमे मोबाइल इंटरनेट की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। खबरगांव ने दिल्ली-NCR के अलग-अलग इलाकों में लोगों से बात कर इस समस्या की पड़ताल की। इस दौरान नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली के कई इलाकों में लोगों ने 5G होने के बावजूद इंटरनेट की रफ्तार धीमी होने की शिकायत की। यही नहीं, दिल्ली-नोएडा के बॉर्डर पर पड़ने वाले न्यू अशोक नगर में किए गए एक ही जगह के स्पीड टेस्ट में भी मोबाइल इंटरनेट और Wi-Fi की रफ्तार में बड़ा अंतर देखने को मिला।
देश में लगातार बढ़ रहे इंटरनेट यूजर्स
इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी आईएएमएआई के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 95.8 करोड़ सक्रिय इंटरनेट यूजर्स हैं। पिछले साल की तुलना में इसमें करीब 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
TRAI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में Jio के मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या करीब 50.60 करोड़ से बढ़कर 50.84 करोड़ हो गई। इसी अवधि में Airtel के मोबाइल उपभोक्ता करीब 48.94 करोड़ से बढ़कर 49.16 करोड़ हो गए। Vi के उपभोक्ताओं की संख्या में भी करीब 5.06 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई। BSNL के उपभोक्ताओं की संख्या में भी करीब 4.93 लाख की बढ़ोतरी हुई, जबकि MTNL के उपभोक्ताओं की संख्या में करीब 5,900 की कमी आई। इन आंकड़ों से साफ है कि देश में मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार खराब होने का असर सिर्फ मनोरंजन पर नहीं, बल्कि लोगों के कामकाज और रोजमर्रा के जरूरी कामों पर भी पड़ता है।
5G के 5 लाख से ज्यादा टावर, फिर भी धीमा इंटरनेट
देश में 5G नेटवर्क के विस्तार को लेकर लगातार बड़े दावे किए जा रहे हैं। देश में अब तक 5 लाख से ज्यादा 5G मोबाइल टावर लगाए जा चुके हैं। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुताबिक, फिलहाल करीब 50 करोड़ लोग 5G नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक यह संख्या बढ़कर 100 करोड़ हो जाए।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है, ‘सरकार और दूरसंचार कंपनियों ने मिलकर करीब ढाई साल में 5G नेटवर्क के विस्तार में यह उपलब्धि हासिल की है।’ एक तरफ देश में 5G नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, 5G इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ रही है और दूसरी तरफ दिल्ली-NCR के कई इलाकों में लोग धीमे इंटरनेट की शिकायत कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी व्यक्ति ने 5G सेवा के लिए रीचार्ज कराया है और उसके फोन में 5G नेटवर्क भी दिखाई दे रहा है, तो उसे इंटरनेट इस्तेमाल करते समय अपेक्षित रफ्तार क्यों नहीं मिल रही?
दिल्ली-NCR के किन इलाकों में धीमा है इंटरनेट?
खबरगांव ने दिल्ली-NCR के अलग-अलग इलाकों में जाकर और वहां रहने वाले लोगों से बात करके मोबाइल इंटरनेट की स्थिति को समझने की कोशिश की। इस दौरान नोएडा के सेक्टर-15, सेक्टर-16, सेक्टर-18, सेक्टर-126, ओखला बर्ड सेंचुरी मेट्रो के आसपास, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-16बी, निराला एस्पायर, ईको विलेज-2 और दिल्ली के न्यू अशोक नगर, मयूर विहार, पहाड़गंज, नबी करीम और कालीबाड़ी मार्ग जैसे इलाकों में लोगों से बात की गई।
कई लोगों ने बताया कि उनके फोन में 5G नेटवर्क दिखाई देता है लेकिन इंटरनेट की रफ्तार कई बार इतनी धीमी हो जाती है कि सामान्य काम करना भी मुश्किल हो जाता है। कहीं UPI भुगतान करने में परेशानी होती है तो कहीं Instagram की रील और YouTube के वीडियो लोड होने में काफी समय लगता है। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि घर के अंदर मोबाइल नेटवर्क कमजोर हो जाता है और काम के लिए उन्हें Wi-Fi पर निर्भर रहना पड़ता है।
नोएडा के कई इलाकों में इंटरनेट का बुरा हाल
नोएडा के सेक्टर-126 से ओखला मेट्रो की तरफ जाने वाले रास्ते में भी मोबाइल इंटरनेट की समस्या सामने आई। ऑटो चालक अजीम ने बताया कि वह कई बार यात्रियों से मेट्रो स्टेशन पहुंचने से पहले ही ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए कह देते हैं। इसकी वजह यह है कि ओखला मेट्रो के आसपास पहुंचने पर इंटरनेट धीमा हो जाता है और ऑनलाइन भुगतान करने में काफी समय लग सकता है।
Jio 5G का इस्तेमाल करने वाली अमीसा (23) ने बताया कि दफ्तर से घर आने-जाने के दौरान कई बार इंटरनेट और कॉल दोनों में परेशानी होती है। उनका कहना है कि फोन में नेटवर्क दिखाई देने के बावजूद इंटरनेट हमेशा उसी हिसाब से काम नहीं करता।
नोएडा के सेक्टर-15 और सेक्टर-16 में भी मोबाइल इंटरनेट की धीमी रफ्तार की शिकायत मिली। यहां रहने और काम करने वाले लोगों ने बताया कि कई बार फोन में 5G दिखाई देता है लेकिन इंटरनेट की रफ्तार काफी कम रहती है। UPI पेमेंट करते समय कई बार भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती और लोगों को दोबारा कोशिश करनी पड़ती है। इसी तरह Instagram पर रील देखने या YouTube पर वीडियो चलाने में भी परेशानी होती है। कुछ लोगों का कहना है कि मोबाइल डेटा के बजाय Wi-Fi इस्तेमाल करने पर इंटरनेट बेहतर तरीके से चलता है।
यह भी पढ़ें: लगातार बढ़ रही 'सिल्वर इकोनॉमी', समझिए यह क्या है और कैसे मिलेगा इसमें रोजगार
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-16बी स्थित निराला एस्पायर में रहने वाली प्रज्ञा मिश्रा ने बताया कि उनके घर में मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार कई बार काफी धीमी हो जाती है। उन्होंने बताया कि घर के कुछ हिस्सों में मोबाइल से बातचीत करना भी आसान नहीं होता। कई बार कॉल की आवाज साफ नहीं आती और इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए Wi-Fi का सहारा लेना पड़ता है।
वहीं, ईको विलेज-2 में रहने वाले अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी सोसायटी के बाहर शनिवार को बाजार लगता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं और ऑनलाइन पेमेंट करते हैं लेकिन मोबाइल इंटरनेट धीमा होने की वजह से कई बार UPI भुगतान में परेशानी होती है। अंकुर के मुताबिक, उन्होंने इस समस्या को लेकर संबंधित कंपनियों से शिकायत भी की। ग्राहक सेवा की ओर से बताया गया कि समस्या अस्थायी है और जल्द ठीक कर दी जाएगी। लेकिन शिकायत के बाद भी समस्या बनी रही।
दिल्ली के कई इलाकों में भी धीमा इंटरनेट
मोबाइल इंटरनेट की समस्या सिर्फ नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक सीमित नहीं है। दिल्ली के कई इलाकों में भी लोगों ने ऐसी ही शिकायत की। कालीबाड़ी मार्ग (नई दिल्ली) में रहने वाले अंकित यादव Airtel 5G का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है कि कई बार इंटरनेट की रफ्तार काफी धीमी हो जाती है। दिल्ली से नोएडा जाने के दौरान कई जगह फोन में 5G से 4G हो जाता है। अंकित का दफ्तर सेक्टर-98 स्थित स्काईमार्क बिल्डिंग में है। उनके मुताबिक, दफ्तर में मोबाइल इंटरनेट की स्थिति इतनी खराब रहती है कि कई बार सामान्य ऑनलाइन काम करना भी मुश्किल हो जाता है।
पहाड़गंज में रहने वाले प्रवीण कुमार ने भी Jio 5G के धीमे इंटरनेट की शिकायत की। उनका कहना है कि नेटवर्क होने के बावजूद इंटरनेट की रफ्तार कई बार काफी कम हो जाती है।
नबी करीम में रहने वाले यशवर्धन ने बताया कि उनके इलाके में Jio ठीक चलता है, लेकिन Airtel का नेटवर्क और इंटरनेट कई बार ठीक से काम नहीं करता।
मयूर विहार में रहने वाले वेंकटेश ने भी मोबाइल इंटरनेट धीमा होने की बात कही। न्यू अशोक नगर में रहने वाले कुछ लोगों ने बताया कि घर के अंदर 5G नेटवर्क ठीक से नहीं मिलता। ऐसे में अगर Wi-Fi उपलब्ध न हो तो घर से काम करना मुश्किल हो जाता है।
5G रीचार्ज प्लान महंगे, फिर भी इंटरनेट धीमा
मोबाइल इंटरनेट आज लोगों की जरूरत बन चुका है। इसी जरूरत को देखते हुए टेलीकॉम कंपनियां अलग-अलग तरह के रीचार्ज प्लान उपलब्ध कराती हैं। 5G सेवा के लिए भी लोगों को ऐसे प्लान चुनने पड़ते हैं जिनमें 5G डेटा की सुविधा मिलती है। पिछले कुछ समय में Jio और Airtel समेत कई कंपनियों के रीचार्ज प्लान महंगे हुए हैं। ऐसे में मोबाइल उपभोक्ता यह उम्मीद करते हैं कि जिस सेवा के लिए वे पैसे दे रहे हैं, उसका इस्तेमाल उन्हें बेहतर तरीके से मिलना चाहिए लेकिन दिल्ली-NCR के कई इलाकों में स्थिति अलग दिखाई देती है।
लोग 5G वाला रीचार्ज कराने और फोन में 5G नेटवर्क दिखाई देने के बावजूद धीमे इंटरनेट की शिकायत कर रहे हैं। कई जगह लोग UPI भुगतान के लिए परेशान होते हैं, तो कहीं जरूरी काम के लिए Wi-Fi खोजना पड़ता है। वीडियो देखने और सोशल मीडिया चलाने में भी परेशानी होती है। यानी सवाल सिर्फ इंटरनेट की रफ्तार का नहीं है। सवाल यह भी है कि जब उपभोक्ता 5G सेवा के लिए रीचार्ज करा रहा है, तो उसे ऐसी जगहों पर बार-बार Wi-Fi पर निर्भर क्यों होना पड़ रहा है, जहां उसके फोन में 5G नेटवर्क दिखाई दे रहा है?
कंपनियों ने क्या जवाब दिया?
खबरगांव ने दिल्ली-NCR समेत उन तमाम इलाकों में मोबाइल इंटरनेट धीमा होने की समस्या को लेकर Jio और Airtel से X के जरिए सवाल पूछे। कंपनियों से पूछा गया कि 5G नेटवर्क होने के बावजूद कई इलाकों में इंटरनेट की रफ्तार धीमी क्यों है, क्या इसकी वजह नेटवर्क पर बढ़ता भार या कोई तकनीकी समस्या है और इसे कब तक ठीक किया जाएगा। हालांकि, दोनों कंपनियों की ओर से X पर इन सवालों का कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद खबरगांव ने ग्राहक सेवा के जरिए भी इस मामले को समझने की कोशिश की। ग्राहक सेवा से बातचीत के दौरान Jio की ओर से बताया गया कि नेटवर्क से जुड़ी समस्या को ठीक किया जाएगा और अगले 15 दिनों के भीतर इसे ठीक करने का आश्वासन दिया गया।
हालांकि, यहां सवाल यह है कि 15 दिनों में समस्या ठीक होने का आश्वासन पहली बार नहीं मिला है। ग्राहक सेवा से बातचीत के दौरान इससे पहले भी इसी तरह का जवाब मिल चुका है कि समस्या जल्द ठीक कर दी जाएगी। इसके बावजूद दिल्ली-NCR के कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट की धीमी रफ्तार की शिकायतें अभी भी सामने आ रही हैं।
खबरगांव ने Jio से यह भी जानने की कोशिश की कि अगर समस्या की जानकारी कंपनी को पहले से है और कई बार इसे जल्द ठीक करने का आश्वासन दिया जा चुका है, तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ। साथ ही यह भी पूछा गया कि दिल्ली-NCR समेत अलग-अलग इलाकों में नेटवर्क की समस्या पूरी तरह कब तक दूर होगी।
एक ही जगह मोबाइल और Wi-Fi की स्पीड में बड़ा अंतर
इंटरनेट की धीमी रफ्तार को समझने के लिए खबरगांव ने दिल्ली के न्यू अशोक नगर में एक ही जगह पर इंटरनेट स्पीड की जांच की। इसके लिए Google पर जाकर Internet Speed Test किया गया। इस दौरान एक बार मोबाइल इंटरनेट पर और दूसरी बार उसी जगह Wi-Fi पर स्पीड जांची गई। मोबाइल में 5G की जगह 4G नेटवर्क दिखाई दे रहा था।
जांच में मोबाइल इंटरनेट की डाउनलोड स्पीड सिर्फ 2.35 Mbps और अपलोड स्पीड 0.25 Mbps रही। वहीं, उसी जगह Wi-Fi पर डाउनलोड स्पीड 29.7 Mbps और अपलोड स्पीड 9.78 Mbps दर्ज की गई। यानी एक ही जगह और लगभग एक ही समय पर किए गए इस परीक्षण में Wi-Fi की रफ्तार मोबाइल इंटरनेट के मुकाबले कई गुना ज्यादा रही।
इस परीक्षण से यह अंतर साफ दिखाई देता है कि एक ही जगह पर Wi-Fi और मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार में काफी फर्क हो सकता है। हालांकि, यह एक जगह और एक समय पर किया गया परीक्षण है, इसलिए इसे पूरे दिल्ली-NCR के नेटवर्क की औसत रफ्तार नहीं कहा जा सकता लेकिन यह आंकड़ा उन लोगों की शिकायत को जरूर दिखाता है, जो 5G सेवा और रीचार्ज होने के बावजूद मोबाइल इंटरनेट की धीमी रफ्तार का सामना कर रहे हैं।
सवाल क्या है?
जब देश में 5G नेटवर्क का लगातार विस्तार हो रहा है, 5 लाख से ज्यादा 5G मोबाइल टावर लगाए जा चुके हैं और करोड़ों लोग 5G का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो दिल्ली-NCR के कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार इतनी खराब क्यों है?
अगर कोई उपभोक्ता 5G का रीचार्ज करा रहा है, तो उसे अपने रोजमर्रा के काम के लिए बार-बार Wi-Fi का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है?
क्या इन इलाकों में नेटवर्क से जुड़ी कोई तकनीकी समस्या है? क्या नेटवर्क पर ज्यादा भार इसकी वजह है? या फिर कोई दूसरी वजह है, जिसकी जानकारी उपभोक्ताओं को नहीं दी जा रही?
कंपनियों के पास इन इलाकों से धीमे इंटरनेट और कॉल से जुड़ी कितनी शिकायतें पहुंची हैं? समस्या कब से बनी हुई है? और अगर कंपनियों को इसकी जानकारी है तो इसे ठीक करने में इतना समय क्यों लग रहा है?
जब Wi-Fi पर उसी जगह इंटरनेट ठीक चलता है, तो मोबाइल डेटा की रफ्तार क्यों कम हो जाती है?
इन सवालों के जवाब अब दूरसंचार कंपनियों से जानना जरूरी है, क्योंकि 5G के दौर में उपभोक्ता सिर्फ फोन में 5G का निशान नहीं, बल्कि जमीन पर तेज और भरोसेमंद इंटरनेट सेवा चाहता है।
