चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण ( SIR ) करने की एक वजह अवैध विदेशी प्रवासियों के नाम मतदाता सूची में शामिल होना बताया था। छह राज्यों में SIR के दौरान लाखों नाम कटने के बावजूद विदेशी नागरिकों के तौर पर सिर्फ 1,600 संदिग्ध लोगों की पहचान हुई है। जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दावा है कि SIR के जरिए लाखों घुसपैठियों के नाम काटे जा रहे हैं, वहीं हैरानी की बात यह है कि चुनाव आयोग ने राज्यों से संदिग्ध विदेशी नागरिकों का अलग रिकॉर्ड रखने को नहीं कहा था। जिन छह राज्यों से इन 1,600 संदिग्ध लोगों की पहचान की जानकारी मिली है, वहां कुल 9.86 करोड़ मतदाता हैं। ये राज्य हैं- कर्नाटक, केरल, गोवा, झारखंड, मेघालय और मिजोरम।

 

ये आंकड़े हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के आधार पर दिए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अखबार ने 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालयों से संपर्क किया, जहां SIR पूरी हो चुकी थी या मसौदा मतदाता सूची जारी हो गई थी। इनमें से 11 राज्यों के अधिकारियों ने जवाब दिया। इनमें सिर्फ छह राज्यों ने संदिग्ध विदेशी नागरिकों की संख्या बताई। 

कर्नाटक में मिले सबसे ज्यादा संदिग्ध विदेशी नागरिक

कर्नाटक के साथ SIR के तीसरे चरण में कुल 5 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया शुरू को शुरू किया गया था। कर्नाटक में SIR के दौरान करीब 99.76 लाख यानी लगभग एक करोड़ नाम अलग-अलग कारणों से मतदाता सूची से हटाए गए। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां सिर्फ 716 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने भी कहा था कि विदेशी नागरिकों के तौर पर पहचाने गए लोगों की संख्या 1,000 से कम है।

 

रिपोर्ट में कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में चिह्नित विदेशी नागरिकों का आंकड़ा भी सामने आया है। बेंगलुरु नॉर्थ में 545 नेपाली नागरिकों समेत विदेशी नागरिकों की पहचान की गई। दक्षिण कन्नड़ में 40, उत्तर कन्नड़ में 22 और उडुपी में 47 विदेशी नागरिक मिले हैं।

 

दक्षिण कन्नड़ में मिले लोगों में नेपाल के 17 नागरिक, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के छह-छह, कनाडा के पांच, ब्रिटेन के दो और नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड तथा नॉर्वे के एक-एक नागरिक शामिल हैं। वहीं, उत्तर कन्नड़ में नेपाल, पाकिस्तान, अमेरिका और बांग्लादेश के नागरिकों की पहचान हुई। उडुपी में नेपाल, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा समेत कई देशों के नागरिक मिले।

 

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झारखंड, मेघालय और केरल में कितने मामले मिले?

बिहार के पड़ोसी राज्य झारखंड में विदेशी नागरिकों के रहने को लेकर अक्सर आरोप लगाए जाते हैं। SIR के बाद यहां करीब 43.6 लाख नाम मतदाता सूची से कम हुए थे। लेकिन विदेशी नागरिकों की बात आई तो यहां सिर्फ तीन लोगों की पहचान हुई। ये तीनों अफगानिस्तान के नागरिक बताए गए हैं। 

 

मेघालय में नेपाली मूल के दो पुरुषों के नाम मतदाता सूची में मिले। दोनों की शादी भारतीय महिलाओं से हुई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीडीआर तिवारी के मुताबिक, इनकी पहचान पूर्वी खासी हिल्स जिले के मावसिनराम में हुई। दोनों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए और मामला गृह विभाग को भेज दिया गया। राज्य की अंतिम मतदाता सूची में 21.8 लाख नाम थे। पुनरीक्षण के दौरान कुल 1,65,682 नाम हटाए गए।

 

केरल में करीब 500 ऐसे लोगों की पहचान हुई, जिनके पास विदेशी नागरिकता थी, लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज थे। राज्य के एक वरिष्ठ निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, केरल की अंतिम मतदाता सूची में 2.695 करोड़ नाम थे। इस दौरान कुल 8,97,211 नाम हटाए गए।

 

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गोवा में 419 संदिग्ध लोगों की पहचान

गोवा में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक घूमने आते हैं। इनमें से कुछ लंबे समय तक वहां रुकते हैं। ऐसे में राज्य में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर चर्चा होती रही है। गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय गोयल ने बताया कि राज्य में विदेशी पासपोर्ट रखने वाले 419 संदिग्ध लोगों की पहचान की गई। गोवा की अंतिम मतदाता सूची में 10.6 लाख नाम थे। पुनरीक्षण के दौरान कुल 1,27,468 नाम हटाए गए। यानी मतदाता सूची से करीब 1.27 लाख नाम कम हुए, लेकिन विदेशी पासपोर्ट रखने वाले संदिग्ध लोगों की संख्या 419 बताई गई।

 

वहीं, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ सीमा साझा करने वाले राज्य मिजोरम में विदेशी नागरिकों से जुड़ा कोई मामला सामने नहीं आया। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी गरिमा गुप्ता के मुताबिक, मसौदा मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता के रूप में दर्ज होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और तेलंगाना के पास संदिग्ध विदेशी नागरिकों का अलग रिकॉर्ड नहीं है।