राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपनी कक्षा नौ की सामाजिक विज्ञान की किताब में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) को शामिल किया है। चुनाव की आयोग की जमकर तारीफ की गई। बताया गया कि चुनाव आयोग ने डराने-धमकाने की चुनौतियों के बीच निष्पक्ष चुनाव को संपन्न कराया। 

 

किताब में 'आपातकाल 1975-77' को भी शामिल किया गया है। वहीं प्रस्तावना शब्द की परिभाषा, धर्मनिरपेक्षता और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को हटा दिया गया है। किताब में SIR को ऐसी प्रक्रिया के तौर पर बताया गया है, जो यह पक्का करती है कि कोई भी योग्य नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर न हो और अयोग्य व्यक्ति इसमें शामिल न हो।

 

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एनसीईआरटी की यह नई किताब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा (NCF-SE) 2023 के तहत जारी की गई है। नई किताब में आपातकाल को भी शामिल किया गया है। एची की रिपोर्ट के मुताबिक किताब में आपातकाल के बारे में बताया गया कि उस वक्त लोकतांत्रिक संस्थाएं गंभीर दबाव में आ गई थीं और नागरिकों की आजादी सीमित हो गई थी।

न्यायपालिका निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था

पिछले साल एनसीईआरटी की 8वीं कक्षा के एक पाठ पर भयानक बवाल मचा था। किताब पर न्यायपालिका की छवि खराब करने का आरोप लगा था। बाद में एनसीईआरटी ने यह किताब वापस ले ली थी। अबकी 9वीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका को एक निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था बताया गया है। कहा गया कि यह संस्था नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है और संविधान की भावना को बनाए रखती है।

 

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मनुस्मृति का श्लोक भी शामिल

सामाजिक विज्ञान की किताब में ही मनुस्मृति का एक श्लोक भी शामिल किया गया। 'State and Society up to 1000 CE' नाम के पाठ में बताया गया कि वैदिक काल में महिलाओं को ऊंचा स्थान प्राप्त था। मगर समय के साथ सामाजिक और राजनीतिक हालात बदलने पर उनकी स्थिति में गिरावट आई है। किताब में बताया गया कि महिलाएं विद्वतापूर्ण शिक्षा और कुछ खास मौकों पर पुरुषों के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेती थीं, सार्वजनिक सभाओं में शामिल होती थीं। ऋग्वेद के कई मंत्र अपाला, विश्ववारा, घोषा और लोपामुद्रा जैसी महिला ऋषियों से जुड़े माने जाते हैं।