भारत की जांच एजेंसी ने एक खुलासा किया है जिससे भारत में चल रहे धर्मांतरण का एक जाल सामने आया है। क्राइम ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन ( CBI ) ने अमेरिका की एक संस्था और भारत में संस्था के लिए काम कर रहे 6 लोगों पर मामला दर्ज किया है। संस्था पर आरोप है कि गैर-कानूनी तरीके से करोड़ों रुपये कैश निकाल गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि बिना किसी विदेशी अंशदान (FCRA) रजिस्ट्रेशन के भारत के अलग-अलग राज्यों में एटीएम के जरिए करीब 92.55 करोड़ रुपये निकाले गए।
इन पैसों का इस्तेमाल गरीब लोगों को बहला-फुसलाकर धर्म प्रचार और नक्सलवाद से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अप्रैल के महीने में बेंगलुरु एयरपोर्ट से मीका मार्क नाम के व्यक्ति को पकड़ा। उसके पास से ऐसे कई दस्तावेज मिले हैं जिसने जांच एंजेंसियों के शक को और पुख्ता किया।
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मीका के पास से क्या मिला?
मीका के पास से अमेरिका के 'ट्रूइस्ट बैंक' के 24 एटीएम कार्ड मिले। इनमें से कई कार्डों पर 'संतोष कुमार' नाम छपा हुआ था ताकि किसी को शक न हो। पूछताछ और जांच में सामने आया कि ये नेटवर्क अब तक भारत में 1,000 से ज्यादा ऐसे अमेरिकी एटीएम कार्ड बांट चुका है। बेंगलुरु, छत्तीसगढ़, असम और कर्नाटक समेत कई जगहों से लगातार ये कैश निकाली जा रही थी।
किस-किस पर आरोप हैं?
द टिमोथी इनिशिएटिव अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में स्थित एक संस्था है। इस पर आरोप है कि इसका मकसद हर गांव तक अपने केंद्र खोलना है। इस संस्था का मुख्य कर्ता-धर्ता जोनाथन एस राजन है जो एटीएम से निकाले गए पैसों को देश भर में अलग-अलग कामों में बांटता था।
इसमें अजीत वर्गीज मथाई का नाम आ रहा है। वह बेंगलुरु से अपनी शेल कंपनियों के जरिए पैसों का पूरा हिसाब-किताब संभालता था। इसके ठिकानों से ED ने 37 लाख रुपये कैश भी जब्त किए। इनके लिए मीका मार्क काम करता था, जो कि बार-बार विदेश यात्राएं करके अमेरिका से एटीएम कार्ड भारत लाता था।
भारत में तीन राज्यों मैसूर, असम और छत्तीसगढ़ के इलाकों में वर्गीज चाकों, सुप्रीम जॉय और बबलू कुर्मी जमीनी स्तर पर काम करते थे। ये लोग एटीएम से कैश निकालकर आगे पहुंचाते थे।
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छापेमारी के दौरान मिटा दिए सबूत
ED की रिपोर्ट के मुताबिक, जब एजेंसियों ने अप्रैल में इनके ठिकानों पर छापेमारी शुरू की, तो अमेरिका में बैठे इनके साथियों ने इंटरनेट के जरिए भारत से जुड़ा सारा डेटा और वेबसाइट्स बंद कर दीं। यहां तक कि जब्त किए गए लैपटॉप का डेटा भी दूर से ही रिमोट एक्सेस लेकर पूरी तरह डिलीट कर दिया गया।
ED ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय को लेटर लिखा था जिसके बाद गृह मंत्रालय के निर्देश पर सीबीआई ने 27 अगस्त को एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
