तीन महिला पत्रकारों ने शनिवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के सीनियर अफसरों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस ने रविवार को बताया कि इन शिकायतों को विस्तृत जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है। पत्रकारों का आरोप है कि मौके पर तैनात अफसरों ने प्रदर्शन की कवरेज के दौरान उन्हें गलत तरीके से छुआ।
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि तीन महिला पत्रकारों की शिकायतें नई दिल्ली जिले को मिली हैं और इन्हें निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है। शनिवार शाम कई स्वतंत्र पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने संसद मार्ग थाने के बाहर धरना दिया। उनकी मांग थी कि एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) समेत संबंधित अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज हो।
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राहुल गांधी , नेता विपक्ष, लोकसभा:-
जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ इतनी मांग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वह भी नहीं किया। आज ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए।
दिल्ली पुलिस क्या कह रही है?
हिंदुस्तान टाइम्स ने बिना नाम बताए एक पुलिस अधिकारी के हवाले से लिखा है कि यह केस महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध का है और आरोप ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हैं। इसलिए सबूत जुटाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी थी। उन्होंने कहा कि संसद मार्ग थाने और नई दिल्ली जिले के कई पुलिसकर्मी भी प्रदर्शन की कानून-व्यवस्था ड्यूटी में थे। ऐसे में जांच निष्पक्ष थाने को सौंपी गई है।
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राहुल गांधी, नेता विपक्ष, लोकसभा:-
यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अफसर महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं। पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं, मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफाजत की जिम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है। एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है, वह आखिर किसकी हिफाजत कर रही है? दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह, कहां हैं आप? जवाब आपको ही देना है।
घिर गई है दिल्ली पुलिस
कई नेताओं और एक्टिविस्ट ने सोशल मीडिया पर इस घटना की आलोचना की और FIR की मांग की। इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर दबाव बनाया कि लोकतांत्रिक देश में कैसे कोई पुलिस अधिकारी, प्रदर्शन के दौरान महिला का यौन उत्पीड़न कर सकता है।
दिल्ली पुलिस क्या सख्ती बरत रही है?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए आंदोलन में कम से कम 1,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। ये लोग जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। प्रदर्शन के सिलसिले में संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में पुलिसकर्मियों की डेली डायरी (DD) एंट्री के आधार पर तीन FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ये मामले भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत दर्ज हुए हैं। यह धारा लोक सेवक के जारी आदेश की अवहेलना से जुड़ी है।
