NEET -UG पेपर लीक का मुद्दा केंद्र सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है। देशभर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग हो रही है। दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों ने जंतर मंतर से संसद भवन की ओर कूच किया, जिसे दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों ने बलपूर्वक रोका। पुलिस की कार्रवाई में कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं और इळाज चल रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारी 6 जून से ही धरने पर हैं। उनकी एक मांग है कि पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान हर हाल में इस्तीफा दें, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के रहते हुए अगर पेपर लीक थम नहीं रहा है तो जवाबदेही तय की जाए, शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटके।

धर्मेंद्र प्रधान, केंद्र के कद्दावर नेता हैं। पेट्रोलियम मंत्री रहे हैं, साल 2024 में नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। कार्यकाल में कई बार पेपरलीक की बात सामने आई। अब अगर वह इस्तीफा देते हैं तो भी बीजेपी फंसेगी, न दे तो भी किरकिरी होगी। उनके खिलाफ व्यापक जनाक्रोश है और सबसे ज्यादा युवा उनके निराश हैं। नीट पेपर लीक में अब तक 13 से ज्यादा छात्र खुदकुशी कर चुके हैं। 

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धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें या न दें, दोनों हाल में फंसे, क्यों? समझिए 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देते हैं तो भी सरकार को फंसना है। इस्तीफा न देने का सीधा सा मतलब होता सरकार यह स्वीकार कर रही है कि पेपर लीक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की गलती है, परीक्षा प्रणाली में बड़ी खामी है, जिसके लिए भारतीय जनता पार्टी सरकार जिम्मेदार है। शिक्षा मंत्रालय इस खामी को दूर करने में बुरी तरह असफल रही है।  

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्षी दल इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करेंगे। विपक्ष का मनोबल बढ़ेगा। दूसरे मंत्रियों और सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठेंगे। सरकार राम मंदिर के दान चोरी मामले में पहले से घिरी है, मोहन यादव  मध्य प्रदेश में सपत्ति खरीद के मामले में घिरे हैं, कई मंत्रालय अपने काम को लेकर लोगों के निशाने पर हैं। यह दबाव और व्यापक हो सकता है। 

धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। साल 2024 में ओडिशा में बीजेपी की जीत की वजह एक वजह वह भी माने जाते हैं। अगर धर्मेंद्र प्रधान सत्ता में बने रहते हैं तो वहां भी गलत संदेश जाएगा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ चुनाव लड़कर ओडिशा में सत्ता मिली, अब बीजेपी भ्रष्टाचार में लिप्त है। अब इस्तीफा दे रहे हैं तो कुछ तो झोल होगा। सरकार इसी आशंका से डरी हुई है। 

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अगर पद पर बने रहते हैं तो क्या हो सकता है?

दिल्ली में धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ दिल्ली में हजारों छात्र उमड़ आए हैं। केरल से कश्मीर तक के छात्र, व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश जाहिर  कर रहे हैं। सरकार के खिलाफ अब अभिभावकों का भी आक्रोश सामने आया है। युवा चाहते हैं कि सरकार जवाबदेही तय करे और धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाए। नीट पेपर लीक में धांधली के बाद असफलता की डर की वजह से 13 से ज्यादा छात्रों ने खुदकुशी की है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार बार-बार लापरवाही बरत रही है। विपक्ष ने भी नीट पेपर लीक के मुद्दे पर मानसून सत्र में हंगामा किया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने सदन की कार्यवाही चलने में भी मुश्किलें पैदा की हैं।

विपक्ष इस मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में उठा रहा है। सरकार की किरकिरी हो रही है। सरकार पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। संसद में कार्यवाही ठप पड़ी है। विपक्ष का कहना है कि सरकार जनभावनाओं का अपमान कर रही है, एक अयोग्य मंत्री तक नहीं हटा पा रही है। 

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कैसे सबके निशाने पर आए धर्मेंद्र प्रधान?

5 मई 2024 को भी पेपर लीक की खबर सामने आई थी। पेपर लीक के तार पटना से लेकर झारखंड तक जुड़े थे। ठीक एक महीने बाद UGC-NET की परीक्षा हुई। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि UGC-NET का पेपर डार्कनेट पर लीक हो गई थी। परीक्षा रद्द हुई और दोबारा परीक्षा कराई गई। CSIR-UGC NET 2024 भी पेपर लीक की भेंट चढ़ गई। 3 मई को हुई नीट परीक्षा भी लीक हुई, जिसके बाद छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया। 

क्यों सबके निशाने पर धर्मेंद्र प्रधान?

राहुल गांधी से लेकर भूपेश बघेल तक आरोप लगाते हैं कि जब से धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री बने हैं, तब से 80 से ज्यादा बार पेपर लीक हो चुके हैं, धर्मेंद्र प्रधान नाकाम शिक्षा मंत्री रहे हैं। विपक्ष हर हाल में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहता है।