कुछ महीने पहले अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से मिडिल-ईस्ट तनाव  ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को काफी नुकसान पहुंचाया था। जून में यह भंडार घटकर 666.93 अरब डॉलर तक आ गया था। हालांकि, अब इसमें जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 21 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में यह भंडार 12.42 अरब डॉलर बढ़कर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 729.33 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।

 

भारत अभी दुनिया का चौथा सबसे बड़ा फॉरेक्स रिजर्व रखने वाला देश बन चुका है। इस सुधार के पीछे RBI की फॉरेन करेंसी नॉन-रसिडेंट बैंक डिपॉजिट यानी FCNR-B स्वैप योजना का बड़ा हाथ रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस रिकॉर्ड भंडार का फायदा आम आदमी को कैसे मिलेगा। आइए समझते हैं कि इससे क्या महंगाई कम होगी और क्या रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा?

 

यह भी पढ़ें: पीछे पुलिस वैन, फिर गोद में मरीज को क्यों उठाया? नेकी कर फंसे UP के इंस्पेक्टर

आंकड़े क्या बताते हैं? 

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 21 अगस्त 2026 को आखिरी हफ्ते के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में $12.422 बिलियन की भारी बढ़ोतरी हुई है। इससे एक सप्ताह पहले भी इसमें $9.905 billion की बढ़ोतरी हुई थी। अब देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ कर $729.328 बिलियन का हो गया है। इससे पहले 27 फरवरी 2026 को अपना भंडार $728.494 billion के ऑल टाइम हाई पर था।

विदेशी मुद्रा भंडार से आम आदमी को क्या फायदा? 

दरअसल, विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व अर्थव्यवस्था की उस सुरक्षा दीवार की तरह काम करता है, जिसका फायदा घुमा-फिराकर हर आम आदमी तक पहुंचता है। यह दीवार आम आदमी को मंहगाई से बचाती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं इसके 3 बड़े फायदों के बारे में... 

रुपये को मिलती है मजबूती

जब देश के पास डॉलर का बड़ा भंडार होता है, तो RBI जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को गिरने से बचा सकता है। अगर वैश्विक स्तर पर कोई संकट आए जैसे कुछ महीने पहले अमेरिका-ईरान तनाव की वजह से आया था, तो यही भंडार बाद में रुपया को अचानक भरभराकर गिरने से बचाता है। ऐसी स्थिति में भी रुपया मजबूत बना रहता है। 

महंगाई का असर कम होता है 

बता दें कि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल (crude oil) और इलेक्ट्रॉनिक्स विदेश से मंगाता है। ये सब डॉलर में खरीदे जाते हैं। ऐसे में अगर रुपया कमजोर होता है, तो यही चीजें महंगी हो जाती हैं, जिसे इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन कहा जाता है। मजबूत फॉरेक्स रिजर्व की वजह से रुपया स्थिर रहता है, जिससे पेट्रोल-डीजल और आयातित सामान की कीमतें अचानक नहीं बढ़तीं। इससे आम आदमी पर महंगाई का बोझ कम पड़ता है। 

 

यह भी पढ़ें: 'अपने बच्चों को एक्सपायर खाना खिलाते हैं?', स्कूल का हाल देख भड़के अभिजीत दीपके

इम्पोर्ट कवर बढ़ता है 

इम्पोर्ट कवर एक टर्म है जिसका मतलब है कि मौजूदा फॉरेक्स रिजर्व से देश कितने महीनों का आयात बिना किसी विदेशी उधार के चुका सकता है। सीधे तौर पर कहें तो जितना ऊंचा इम्पोर्ट कवर, उतना ही निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों का मजबूत भरोसा। इससे भारत की क्रेडिट रेटिंग पर भी सकारात्मक असर पड़ता है, जिसका सीधा फायदा यह होता है कि सरकार और कंपनियां विदेश से सस्ती दर पर कर्ज ले पाती हैं। 

 

इम्पोर्ट कवर बढ़ने का सीधा मतलब है कि भारत अगले कई महीनों तक बिना किसी दिक्कत के अपनी जरूरत का सामान विदेश से मंगा सकता है, भले ही उस दौरान कोई नया विदेशी निवेश न आए।