कर्नाटक में मतदाता सूची संशोधन ( SIR ) के बाद करीब 99.32 लाख वोटरों का नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो गया है। अंतिम सूची में कुल वोटरों की संख्या सिर्फ 4,55,00,011 रह गई है। पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या करीब  5,54,32,314 थी।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अंतिम मतदाता सूची में 2,25,40,493 पुरुष, 2,29,12,355 महिला और 2,841 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने बताया कि 18 से 19 वर्ष के आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या 6.83 लाख से अधिक है।

 

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129 दिनों तक चली SIR की प्रक्रिया 

करीब 129 दिनों तक चले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान राज्य भर में वोटर लिस्ट की जांच की गई। सीरियल नंबर ECI पर जारी किए गए हैं। जो लोग हमेशा के लिए अपना स्थाई पता बदल चुके हैं या किसी और जगह को चुन लिया है, उनके नाम वोटर लिस्ट से बाहर किए गए हैं।

कैसे देखें वोटर लिस्ट में अपना नाम?

इस लिंक पर जाकर आप अपना नाम देख सकते हैं। आप EPIC नंबर से भी ECINet App पर अपने नाम को चेक कर सकते है। 

कैसे राज्य में हुआ है SIR?

24 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में राज्य करीब 20 फीसदी मतदाता ASDDO लिस्ट में आ गए। उन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट और अन्य राज्य में रखा गया है। ड्राफ्ट सूची से हटाए गए मतदाताओं में सबसे बड़ा हिस्सा उन लोगों का था, जिन्हें 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' माना गया। इस श्रेणी में 65.45 लाख मतदाता शामिल थे, जो पूरी ASDDO सूची का 11.8 फीसदी है।

 

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क्या अब दर्ज की जा सकती हैं आपत्तियां?

24 अगस्त से शुरू हुए दो महीने के 'दावे, नोटिस और आपत्तियों' के चरण के दौरान, ड्राफ्ट सूची में शामिल 4.4 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 43.8 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से लगभग 60,000 लोगों को अंतिम मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया। इस चरण के पहले महीने में, यानी 23 सितंबर तक ही दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती थीं। 

16 जून से 23 सितंबर के बीच, 7.87 लाख नागरिकों ने 'फॉर्म 6' आवेदन के जरिए अपना नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने की मांग की। 4,530 NRIs ने 'फॉर्म 6A' के जरिए ऐसा करने का अनुरोध किया। मौजूदा मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां और नाम हटाने के अनुरोध की संख्या करीब 58,475 रही। इसके अलावा, ड्राफ्ट सूची में शामिल 10.99 लाख मतदाताओं ने अपने विवरण में सुधार की मांग की थी। इसमें नाम की स्पेलिंग ठीक करने से लेकर मतदान केंद्र बदलने तक के अनुरोध शामिल थे।