जंतर मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ धरने पर बैठी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को घेरने वाली है। मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के शीर्ष नेतृत्व ने प्रतिबद्धता जताई है। विरोध की अगुवाई ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से किया जा रहा है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके , सौरव दास और आशुतोष रांका ने इसका समर्थन किया है।
सौरव दास ने मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने लिखा कि नैतिक जिम्मेदारी के तहत मनन कुमार मिश्रा को इस्तीफा दे देना चाहिए। सीजेपी अब यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन के विरोध का समर्थन कर रही है। अभिजीत दीपके ने कहा कि सभी कानूनी कॉकरोच इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों।
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मनन मिश्रा का इस्तीफा हो पाएगा?
आशुतोष रांका और रत्ना सिंह ने भी शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन किया। यह विरोध आज सुबह 10 बजे नई दिल्ली में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यालय के बाहर होना है। इसमें 'लीगल कॉकरोच' हिस्सा लेने वाले हैं। मनन कुमार मिश्रा भले ही इस्तीफा मांग चुके हैं लेकिन उनकी मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं हैं।
किस मुसीबत में फंस गए हैं मनन मिश्रा?
हैदराबाद के NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के खिलाफ मनन मिश्रा ने एक ऐसा आदेश दिया था, जिसे लेकर देशभर के कानून के विद्यार्थी उन पर भड़क गए हैं। NALSAR के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। वे नहीं चाहते थे कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाया जाए। इसके जवाब में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आदेश जारी कर दिया कि कानून के स्नातकों का एडवोकेट के रूप में नामांकन फिलहाल रोक दिया जाए। यह आदेश सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
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कैसे BCI ने वापस लिया आदेश?
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध की धमकी दी। कुछ ही घंटों में बार काउंसिल ने अपना आदेश वापस ले लिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी बार काउंसिल की आलोचना की। उन्होंने कहा कि काउंसिल को छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।
माफी मांगी लेकिन विवाद नहीं रुका
छात्रों को कानून के दायरे में अपनी बात रखने से नहीं रोका जा सकता। जब हंगामा बढ़ गया तो मनन कुमार मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस पर सबसे माफी मांगी। उन्होंने कहा कि अगर उनके किसी शब्द या संचार से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें खेद है। उनकी सार्वजनिक माफी के बाद भी जूनियर वकील और छात्र उनसे नाराज हैं। इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
