भारत पर्यटन के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है। भारत में पर्यटन की कई श्रेणियां। देश के किसी हिस्से में गांव देखने देश-दुनिया से लोग पहुंचते हैं, कहीं समुंदर किनारे बीच देखने तो कभी शिमला, कुल्लू और ऋषिकेश जैसी पहाड़ियों का लुत्फ लेने। विदेशी मेहमानों को छोड़िए, देश का कोना-कोना छानने वाले घरेलू पर्यटकों की भी कोई कमी नहीं है। बस डिजिटल इंडिया में लोगों के टिकट बुक करने का तरीका आज भी देसी है। 

देश में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का दायरा बढ़ने के बाद भी घरेलू यात्राओं में लोग आज भी पुराने यानी ऑफलाइन तरीके पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने घरेलू पर्यटन पर अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है। यह सर्वेक्षण जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) के 80वें दौर के तहत किया गया है।

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किस तरह की बुकिंग कर रहे हैं लोग?

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि छुट्टी, मनोरंजन, तीर्थयात्रा, इलाज और खरीदारी के लिए रात भर रुकने वाली करीब 44.6 फीसदी यात्राओं में लोगों ने होटल, परिवहन और खान-पान जैसी पर्यटन सेवाएं सीधे बिना इंटरनेट के बुक कीं। पूरे देश में इंटरनेट के जरिए सीधे ऑनलाइन बुकिंग करने का आंकड़ा केवल 17 फीसदी ही दर्ज किया गया। इस मामले में गांव और शहर के बीच बड़ा अंतर दिखा। 

शहर और गांव में क्या अंतर दिखा?

शहरों में जहां 27.8 फीसदी यात्राओं में सीधे ऑनलाइन बुकिंग की गई, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह संख्या सिर्फ 9.8 फीसदी रही। इसके अलावा टूर ऑपरेटर के जरिए इंटरनेट से बुकिंग 5.6 फीसदी और टूर ऑपरेटर के जरिए बिना इंटरनेट के बुकिंग 3.9 फीसदी यात्राओं में की गई।  

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ऑफलाइन vs ऑनलाइन में कौन आगे?

कामकाज, सामाजिक यात्राओं और एक दिन के सफर में भी ऑफलाइन का दबदबा दिखा। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 30 दिनों में व्यापार, सामाजिक, शिक्षा और अन्य वजहों से की गई रात भर की यात्राओं में भी ऑफलाइन बुकिंग सबसे आगे रही। ऐसी कुल यात्राओं में 34.5 फीसदी बुकिंग सीधे बिना इंटरनेट के कराई गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह हिस्सा 34.8 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 33.9 फीसदी रहा। वहीं, इन यात्राओं के लिए इंटरनेट से सीधी बुकिंग केवल 8.3 फीसदी मामलों में हुई, जिसमें गांव में 4.1 फीसदी और शहर में 15.8 फीसदी की हिस्सेदारी रही।   

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ऑफलाइन पर ज्यादा भरोसा जताते हैं भारतीय

एक दिन में ही लौट वाली यात्राओं में भी ऑफलाइन बुकिंग का चलन सबसे ज्यादा देखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक 23 फीसदी मामलों में लोगों ने बिना इंटरनेट के सीधे सेवाएं बुक कीं। ग्रामीण इलाकों में यह दर 23.9 फीसदी और शहरी इलाकों में 22.7 फीसदी दर्ज की गई। एक दिन की यात्राओं में इंटरनेट से सीधी बुकिंग महज 2.5 फीसदी रही, जिसमें शहरों में 6.2 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 1.3 फीसदी लोग शामिल थे। डिजिटल इंडिया के दौर में भी भारतीय यात्री होटल, गाड़ी और स्थानीय सेवाओं के लिए टूर गाइड या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय खुद सीधे जाकर ऑफलाइन मोड ज्यादा पसंद कर रहे हैं।