कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद रविवार को दिल्ली पहुंचने पर जोरदार स्वागत हुआ। एयरपोर्ट से लेकर पार्टी दफ्तर तक समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और शेर आ गया जैसे नारों के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान खेड़ा काफी उत्साहित नजर आए और उन्होंने इसे सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि संविधान की जीत बताया।
मीडिया से बातचीत में पवन खेड़ा ने कहा कि इस फैसले ने उनके साथ-साथ देश के लोगों का भरोसा भी संविधान में और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि कठिन समय में देश का संविधान ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उसी का उदाहरण है।
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पवन खेड़ा का बयान
दिल्ली पहुंचने पर पवन खेड़ा ने एयरपोर्ट पर कहा, 'जब भी किसी नागरिक के हक छीने जाते हैं खासकर जब सरकार अपने सिस्टम का गलत इस्तेमाल करके ऐसा करती है तब हमें बाबा साहब अंबेडकर के बनाए संविधान पर भरोसा रखना चाहिए। यही भरोसा हर नागरिक को होना भी चाहिए क्योंकि वही हमारी रक्षा करता है। हमारे साथ भी यही हुआ है और लगातार हो रहा है। जब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मुझे बेल दी तो पूरे देश का भरोसा एक बार फिर संविधान पर मजबूत हुआ। बाबा साहब के संविधान पर लोगों का विश्वास फिर से कायम हुआ है।'
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
पवन खेड़ा ने संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग का जिक्र करते हुए कहा कि जब किसी संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, तो उसे पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में संस्थाओं की निष्पक्षता बेहद जरूरी है और इस पर किसी भी तरह का संदेह दूर किया जाना चाहिए।
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क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी की शिकायत पर पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी, जिसके चलते उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए उन्हें अग्रिम जमानत दे दी।
