कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने सरकार के सामने तीन मांगें रखी और कहा कि शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान बिल्कुल फेल है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। छात्र आतंकवादी नहीं है। वे अपने लोग हैं। उनकी मांगें मानी जानी चााहिए। 

 

राहुल गांधी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। शिक्षा मंत्री का इस्तीफे मांगना बिल्कुल जायज है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सरकार उनके साथ जो करना चाहती है, उसे करें, लेकिन आंदोलन का उनका पूरा समर्थन रहेगा। 

 

राहुल गांधी ने कहा, 'सवाल यह है कि हमारे छात्रों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है? आखिर हमारे छात्रों ने क्या किया है? सुरक्षा बल उन पर हथियार ताने खड़े हैं। उन्होंने क्या गलत किया है? वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं, अपनी मांगें रख रहे हैं और वे वही मांग रहे हैं, जो यह देश उन्हें देने का हकदार है। वे बस यही कह रहे हैं कि देश के छात्र होने के नाते, हम एक ऐसे शिक्षा प्रणाली के हकदार हैं, जो निष्पक्ष हो। बच्चों ने आत्महत्या तक कर ली है। हमारे छात्र बहुत अधिक तनाव से गुजरते हैं और आखिर में उन्हें पता चलता है कि पेपर लीक हो गया है।'

 

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राहुल गांधी की तीन बड़ी मांगें

  • पहली मांग- सरकार धर्मेंद्र प्रधान को हटाए।
  • दूसरी मांग-  लाठीचार्ज करने वालों पर केस हो।
  • तीसरी मांग-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी माफी मांगें।

'बेहद महंगा है हमारा एजुकेशन सिस्टम'

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा, 'बात सिर्फ इतनी नहीं है कि सिस्टम में गड़बड़ी है, बल्कि यह सिस्टम इतना महंगा है कि इसे उठाना मुश्किल है। यह एक ऐसा आंकड़ा है जिसके बारे में हर युवा जानता है, लेकिन भारत सरकार को शायद इसकी जानकारी नहीं है। एक परीक्षा पर परिवारों का उतना ही खर्च होता है, जितना हमारे पूरे शिक्षा बजट का है। 

'परिवारों के साथ सरासर लूट और कुछ नहीं'

उन्होंने आगे बताया, 'भारत सरकार सभी टैक्स इकट्ठा करने के बाद हमारे बच्चों के भविष्य पर पैसा खर्च करती है। वह पैसा शिक्षा बजट में जाता है, जो 1.4 लाख करोड़ रुपये है। वहीं दूसरी ओर हर साल नीट परीक्षा देने वाले परिवार भी लगभग इतनी ही रकम यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं। यह उन परिवारों के साथ सरासर लूट है और कुछ नहीं। और फिर जब आप उनसे लूटपाट कर लेते हैं तो आप उन्हें बताते हैं कि पेपर लीक हो गया है। सिस्टम में गड़बड़ी है।'

 

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एक दशक में 152 बार पेपर लीक: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने दावा किया, 'हमारा एजुकेशन सिस्टम- जिसे दुनिया के सबसे अच्छे एजुकेशन सिस्टम में से एक माना जाता था - आज एक धांधली वाला सिस्टम बन गया है... हम यह जानते हैं कि पिछले दशक में 152 बार पेपर लीक हुए हैं। अगर आप हिसाब लगाएं तो लगभग हर महीने एक पेपर लीक हुआ है। हर महीने लाखों छात्रों से कहा जाता है कि जिस तनाव से वे गुजरे हैं, उससे उन्हें फिर से गुजरना होगा। उसके बाद उनसे कहा जाता है कि हमें कोई परवाह नहीं है... इससे 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं।' 

पेपर लीक में किसी को सजा क्यों नहीं मिली

राहुल गांधी ने आगे कहा, ये मिडिल क्लास और गरीब परिवार हैं। वे अपनी मेहनत की कमाई इसमें लगाते हैं और फिर उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया जाता है। सबसे हैरानी की बात यह है कि किसी को भी सजा नहीं हुई। पिछले 10 सालों में 152 बार पेपर लीक हुए हैं और सजा किसी को नहीं मिली।' कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि कोई व्यक्ति या लोगों का समूह हमारे एजुकेशन सिस्टम को, जो भारत की सबसे कीमती संपत्ति है, को बर्बाद कर रहा है और हमारे छात्रों की जिंदगी खराब कर रहा है। सरकार क्या करती है? सजा किसी को नहीं मिली।'