चुनाव आयोग के तीन कमिश्नरों में आपसी सहमति ना होने की खबरें आ रही हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट ने खलबली मचा दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 10 महीनों में 14 मौके ऐसे आए जब बाकी के चुनाव आयुक्त यानी विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई लेकिन उनकी नहीं सुनाई गई। इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ फैसले लेने में इन दोनों की राय ही नहीं मांगी गई। कहा गया है कि इन दोनों आयुक्तों ने इसकी लिखित शिकायत भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी ये फैसले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) से भी जुड़े बताए गए हैं।

 

इंडियन एक्सप्रेस अखबार की पत्रकार रितिका चोपड़ा ने यह खबर अपनी छानबीन के बाद लिखी है। इस खबर के मुताबिक, पिछले 10 महीने में 14 बार ऐसा हुआ कि चुनाव आयोग ने जो फैसले लिए उनमें इन दो आयुक्तों की सहमति नहीं थी या उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी। इन 10 महीनों में एक दिन ऐसा भी था जब एक ही दिन में 4 फैसले हुए और इन दोनों को उनकी जानकारी नहीं थी।

क्या कहती है रिपोर्ट?

इसी रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों आयुक्तों ने लिखित शिकायत की कि नए वोटर जोड़ने और पुराने वोटरों के नाम हटाने को लेकर लिए गए फैसले के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। उन दोनों ने इस फैसले को अवैध बताया था। साथ ही, वोटर डेटाबेस को दिल्ली से ही ऐक्सेस किए जाने पर सवाल भी उठाए थे। रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस तरह से होने वाले काम की शिकायत इन दोनों ने कैबिनेट सेक्रेटरी से भी की थी।

 

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इन 14 मौकों में से 7 बार संधू ने और 6 बार विवेक जोशी ने सवाल उठाए। 1 मौका ऐसा भी आया जब इन दोनों ने फैसले को ही खारिज कर दिया। ऐसे ही एक फैसले के बाद 9 सिंतबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ने 4 महीने में पहली बार दोनों चुनाव आयुक्तों के साथ मीटिंग की।

कांग्रेस ने बीजेपी और पीएम मोदी पर बोला हमला

इस खबर पर कांग्रेस पार्टी ने कहा है, 'मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। इस बारे में खुद दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है। शिकायत में साफ कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्त - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी नहीं दी जाती। उनसे सलाह नहीं ली जाती। उनसे बिना पूछे या बताए हुए फैसले लिए जा रहे हैं। ये 14 शिकायतें मुख्य तौर से SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील, वोटर लिस्ट की सुरक्षा और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर है। इन शिकायतों से साफ होता है कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में सिर्फ ज्ञानेश कुमार की चल रही है।'

 

कांग्रेस ने आगे लिखा है, 'ज्ञानेश अपने बॉस मोदी की तरह तानाशाही कर रहे हैं और मोदी को खुश करने के लिए 'वोट चोरी' का काम कर रहे हैं। हम पहले भी कहते आए हैं कि मोदी ने चुनाव आयोग पर कब्जा कर रखा है। ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली है। इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट से ये बात साबित होती है। मोदी और ज्ञानेश ने मिलकर देश के लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है लेकिन यह बात याद रखना- वक्त आने पर सबका हिसाब होगा, जवाबदेही तय होगी। इस अपराध की सजा जरूर मिलेगी।' 

 

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CJP ने भी उठाए सवाल

इस खबर को शेयर करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)  के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लिखा है, 'ज्ञानेश कुमार भारत के दुश्मन हैं। वोटर लिस्ट से 12 करोड़ लोगों के नाम डिलीट किए जा चुके हैं। यह 2024 के लोकसभा चुनाव के समय रजिस्टर्ड कुल 97 करोड़ मतदाताओं के लगभग 12.4 प्रतिशत के बराबर है। तब बीजेपी की अगुवाई वाले NDA और विपक्ष के वोटों के अंतर में सिर्फ 2 प्रतिशत का अंतर था। ज्ञानेश कुमार चुनाव नहीं करा रहे हैं, वह उसकी स्क्रिप्ट लिख रहे हैं।'

अब इस रिपोर्ट को लेकर हंगामा मचा हुआ है और तमाम विपक्षी दल इसको लेकर सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस लंबे समय से इस तरह के आरोप लगाती रही है और चुनावों में धांधली की बात कह रही है। फिलहाल, खबर लिखे जाने तक इस पर चुनाव आयोग या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।