उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की 191-कादीपुर विधानसभा सीट 1952 में हुए पहले चुनाव के बाद से अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। यहां के मतदाता जगदीश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरक्षण को चुनौती दी। याचिकाकर्ता का दावा है कि स्थायी आरक्षण से चार से पांच परिवारों को फायदा पहुंचा। 

शीर्ष अदालत से कम से कम विधानसभा सीटों में रोटेशन रिजर्वेशन सिस्टम लागू करने की मांग की। हालांकि शीर्ष अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि यह मामला संसद के कानूनी अधिकार क्षेत्र में आता है। इस पर अदालतें निर्देश नहीं दे सकती।

 

लाइव लॉ की वेबसाइट की मुताबिक इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेक्शन 9(1)(c) को सही ठहराने और रिजर्व सीटों के रोटेशन का आदेश देने से इनकार करने के बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने बुधवार को याचिका पर सुनवाई की और उच्च न्यायालय के फैसले में दखल देने से मना कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह फैसला विधायिका को करना है। 

 

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याचिकाकर्ता जगदीश सिंह का तर्क है कि बिना रोटेशन के लगातार आरक्षण संविधान के आर्टिकल 14, 15 और 19 का उल्लंघन है। यह मतदाताओं को सिर्फ एससी प्रत्याशियों के चुनने पर मजबूर करता है। इससे मताधिकार कमजोर होता है। आरक्षण से बड़े समुदाय की जगह कुछ परिवारों को फायदा होता है। उन्होंने पंचायत और नगर पालिका में मिले रोटेशनल सिस्टम जैसी व्यवस्था की मांग की। 

 

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस जायमाल्य बागची ने कहा, ' एक लोकतंत्र में अलग-अलग आइडियोलॉजी वाले कई सियासी दल होते हैं। मतदाता से उम्मीद की जाती है कि वे पार्टी को वोट दें, धर्म को नहीं। आप किसी खास सियासी विचारधारा को पसंद या नापसंद कर सकते हैं। उस विचारधारा का कौन प्रतिनिधित्व करता है, यह अप्रासंगिक हो जाता है। आप उस विचारधारा को वोट देते हैं। इसलिए यह भी आपकी दलील को खत्म कर देता है।'

नियमों को दोबारा नहीं लिख सकते: जस्टिस बागची

याचिकाकर्ता के वकील ने संविधान के आर्टिकल 243डी और 243टी का हवाला दिया। इसके तहत पंचायतों और नगर पालिकाओं में आरक्षण और रोटेशन की व्यवस्था है। जस्टिस बागची ने जवाब में कहा कि संविधान में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए अलग फ्रेमवर्क है। कोर्ट संवैधानिक नियमों को दोबारा नहीं लिख सकता है।

 

वकील ने कानून का अर्थ इस तरह से निकालने की अपील की ताकि रोटेशन व्यवस्था के दायरे में विधानसभा सीटें भी आ जाए। जवाब में जस्टिस बागची ने कहा, हम संसद के तीसरे सदन की भूमिका नहीं निभा सकते हैं।

 

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आप गलत नंबर डायल कर रहे हो: CJI सूर्यकांत

हल्के-फुल्के अंदाज में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा, 'गलत नंबर डायल कर रहे हैं। रोटेशन की मांग संसद में उठाई जानी चाहिए। यह प्रोटेस्ट और नारेबाजी का  मौसम है। इसलिए यह प्रोटेस्ट के लिए एक अच्छा ग्राउंड है।' अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने डीलिमिटेशन एक्ट के सेक्शन 9(1)(c) को चुनौती देने वाली इस याचिका को खारिज कर दिया।