भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा देश बन गया है, जिसने अंतरिक्ष के क्षेत्र में निवेश के लिए प्राइवेटर सेक्टर को मंजूरी दी है और कामयाबी हासिल की है। प्राइवेट कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया है। यह प्रक्षेपण शुरुआती बाधाओं के बाद भी सफल रहा है। 

क्या आपको पता है कि भारत के स्पेस रिसर्च में 400 से ज्यादा स्टार्टअप को सरकार बढ़ावा दिया है? ये कंपनियां क्या करती हैं, क्या मकसद है, भविष्य की योजनाएं क्या हैं, इनसे होगा क्या, ऐसे कई सवालों के जवाब लोग तलाश रहे हैं। आइए जानते हैं स्काईरूट के अलावा, दूसरी प्राइवेट कंपनियों के बारे में, जिनसे देश को बड़ी उम्मीद है- 

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स्काईरूट एयरोस्पेस क्या है?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) के दो पूर्व वैज्ञानिकों ने इस कंपनी की नींव रखी है। पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका ने मिलकर इस कंपनी की शुरुआत की है। स्काईरूट एयरोस्पेल, छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए ऑन डिमांड किफायती रॉकेट विकसित कर रहा है। कंपनी हैदराबाद में है। साल 2018 में इसकी शुरुआत हुई। कंपनी ने अब तक 99.8 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है। भारतीय रुपये में यह आंकड़े 800 करोड़ से ज्यादा है। इसके निवेशकों में GIC और टेमसेक जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

नरेंद्र मोदी , प्रधानमंत्री:-
यह जो स्काईरूट स्टार्टअप है, उसमें जो नौजवान काम कर रहे हैं, मुझे बताया गया कि उनकी जो पूरी टीम की एवरेज एज सिर्फ 28 साल है। ऐसे नौजवानों ने यह काम करके दिखाया है। 28 साल की उम्र के नौजवानों ने अंतरिक्ष में भारत का झंडा गाड़ दिया है, उनको तो बधाई है ही लेकिन ऐसी बातें भारत को आत्मविश्वास से भर देती हैं। यह संयोग नहीं, एक मजबूत संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता और आकांक्षा अंतरिक्ष जितनी असीम है।

भारत में कैसे हुई प्राइवेट एयरोस्पेस कंपियों को एंट्री?

भारत ने साल 2023 में अपनी अंतरक्ष नीति बदली। प्राइवेट सेक्टर के निवेशके लिए मौके खोले। अब प्राइवेट कंपनियां लॉन्चिंग सर्विस, स्पेस एप्लिकेशन और डाउनस्ट्रीम सर्विस पर जोर दे रही हैं। साल 2014 तक सिर्फ एक स्पेस कंपनी थी, अब 400 से ज्यादा स्टार्टअप स्पेस सेक्टर में चल रहे है। 

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स्टार्टअप से ऑर्बिट तक का सफर कैसे पूरा हुआ?

भारत ने अपनी स्पेस नीति साल 2023 में बदली। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया, उद्यम को बढ़ावा दिया और 500 करोड़ का टेक्नोलॉजी एडॉप्टेशन फंड (TAF) तैयार किया। साल 2024 तक सरकार ने गाइडलाइन तैयार की, 1 हजार करोड़ की पूंजी निवेश के जरिए जुटाई गई। अब सरकार इसे बड़ी उम्मीद से देख रही है। साल 2021-21 तक भारत का अंतरिक्ष बाजार सिर्फ 321 करोड़ रुपये का था, अब वह बढ़कर 3246 करोड़ रुपये तक चला गया है। 

अग्निकुल क्या है, क्या है प्लान?

अग्निकुल, चेन्नई की एक स्पेस कंपनी है। कंपनी के पास 75.5 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश आ चुका है। यह कंपनी 3D प्रिंटेड इंजन और मोबाइल लॉन्चपैड वाली कस्टमाइज्ड रॉकेट बना रही है। अग्निकुल कॉसमॉस अब 2026 में दो लॉन्च करने वाली है। अग्निकुल श्रीहरिकोटा से 100 किलो और 300 किलोग्राम तक के पेलोट को अंतरिक्ष में पहुंचा चुका है। कंपनी ने 30 मई 2024 को अग्निबाण SOrTeD Mission-01 सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। यह लॉन्च भारत के पहले निजी लॉन्चपैड अग्निकुल लॉन्चपैड-01 से हुआ था।

बेंगलुरु की गैलेक्स-आई की कामयाबी क्या है?

यह कंपनी मल्टी-सेंसर इमेजिंग सैटेलाइट बना रही है जो हर मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें ले सकती है। कंपनी के पास अब करीब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट है। यह कंपनी IIT मद्रास से जुड़े वैज्ञानिकों ने की थी। रडार और ऑप्टिकल सेंसर की मदद से यह कंपनी धरती पर नजर रखने वाले उपग्रहों को बनाने पर जोर दे रही है।

सैटश्योर क्या कर रही है?

यह कंपनी साल 2017 से ही अर्थ ऑब्जर्वेशन और AI आधारित एनालिटिक्स पर काम कर रही है। इस कंपनी के पास 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग है। 

एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट कितनी कामयाब?

एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट, टावर‑माउंटेड एम्प्लिफायर, रिजेक्शन फिल्टर, ट्रांसमीटर/रिसीवर सिस्टम, रडार और टेलीमेट्री यूनिट्स, पैसिव कंपोनेंट्स तैयार करती है, वेदर स्टेशन और स्पेस के लिए उपकरण बनाती है। Tracxn की एक रिपोर्ट बताती है कि बीते पिछले 10 सालों में औसतन हर साल 19 नई कंपनियां शुरू हो रही हैं। सबसे ज्यादा 40 कंपनियां 2024 में बनीं। 2025 में 10 और 2023 में 34 नई कंपनियां शुरू हुई थीं। फंडिंग के मामले में 2025 सबसे सफल साल रहा, जब इस सेक्टर को 196 मिलियन डॉलर मिले। 2026 में अब तक 48.7 मिलियन डॉलर की फंडिंग हुई है। 

अप्रैल 2026 तक 9 राउंड्स में 36.7 मिलियन डॉलर की इक्विटी फंडिंग आई, जो पिछले साल की समान अवधि से 29 प्रतिशत ज्यादा है। बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस को सीरीज A फंडिंग मिली। अग्निकुल ने सीरीज C राउंड में फंडिंग हासिल की। सैटेलियो लैब्स, इंटरकॉस्मोस और जोवियन एयरोस्पेस जैसी कंपनियों ने सीड फंडिंग प्राप्त की। टॉप निवेशकों में स्टारबर्स्ट, स्पेशले इन्वेस्ट, इंडियन एंजेल नेटवर्क और लेट्सवेंचर शामिल हैं। स्पेशले इन्वेस्ट ने अग्निकुल और गैलेक्सआई जैसी कई कंपनियों में निवेश किया है।

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किन संस्थानों से पूर्व छात्र कर रहे हैं कमाल?

  • IIT मद्रास: जिन स्पेस कंपनियों को भारत में बढ़त मिली है, उनमें 11 कंपनियां ऐसी हैं, जिनके संस्थापकों ने मद्रास IIT से पढ़ाई की है।
  • BITS पिलानी: 10 कंपनियां ऐसी हैं, जिनके संस्थापक इस संस्थान से पढ़े-लिखे हैं।
  • IIT खडगपुर: 10 कंपनियां ऐसी हैं, जिनके संस्थापक खडगपुर IIT से पढ़ी हैं। 

भारत में प्राइवेट सेक्टर की संभावनाएं क्या हैं?

सरकार की इंडियन स्पेस पॉलिसी 2023 और स्पेस टेक वेंचर कैपिटल फंड जैसी पहलें इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही हैं। कंपनियां अब विदेशी बाजारों की ओर भी बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फंडिंग, रिसर्च और इंडस्ट्री-एकेडमिक सहयोग जारी रहा तो भारत जल्द ही वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में मजबूत खिलाड़ी बन सकता है। स्पेस टेक कंपनियां सैटेलाइट इमेजिंग, कम्युनिकेशन, कृषि, पर्यावरण और रक्षा क्षेत्र में अहम योगदान दे रही हैं।