दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में दंगा भड़काने के लिए उकसाने का दोषी करार दिया है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में आगजनी हुई है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन को अन्य आरोपों से बरी कर दिया है।
दिल्ली दंगे के दूसरे मामले में भी ताहिर हुसैन दोषी साबित हुआ है। इससे पहले दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उसे दोषी ठहराया गया था। उस मामले में उसे उम्रकैद की सजा हुई है।
यह मामला दयालपुर थाने में दर्ज FIR संख्या 120 से जुड़ा है। साल 2020 में यही यह केस दर्ज हुआ है। तब भारतीय दंड संहिता (FIR) की धारा 147, 148 और 149 (दंगा), 427 (संपत्ति को नुकसान), 436 (आगजनी) और 120B (आपराधिक साजिश) में दर्ज हुई थी।
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जिस केस में सजा हुई, उसमें क्या है?
यह केस इरशाद अली की शिकायत पर दर्ज हुआ था। उन्होंने बताया था कि 24 फरवरी 2020 को वह जिस दुकान में काम करते थे, उसे लूटा गया। आरोप था कि आरोपियों ने दुकान का शटर तोड़ा और उसमें आग लगा दी। शिकायतकर्ता के मुताबिक दुकान से सामान लूटे जाने से करीब 17 से 18 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इमारत को पहुंचे नुकसान से करीब 10 लाख रुपये की चपत लगी।
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ताहिर हुसैन पर आरोप क्या थे?
दूसरे शिकायतकर्ता मोहम्मद जाहिद ने बताया कि दंगाई ताहिर हुसैन के नाम के नारे लगा रहे थे और कह रहे थे कि वे उनके साथ हैं। जांच के दौरान दो सिपाहियों ने ताहिर हुसैन की पहचान की। ताहिर हुसैन सार्वजनिक पद पर था, उसे सिपाही जानते थे। ताहिर हुसैन को 21 अप्रैल 2020 को मंडोली जेल में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था। वह पहले से दूसरे दंगा मामले में न्यायिक हिरासत में था।
