पंजाब पुलिस रविवार को वॉन्टेड गैंगस्टर गुरविंदर उर्फ अफरीदी को इथियोपिया से भारत ले आने में कामयाब हुई है। वह 30 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक पंजाब पुलिस पहली बार किसी अफ्रीकी देश से किसी फरार आरोपी को वापस लाई है। अफरीदी पर पंजाब सरकार ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

अधिकारियों के मुताबिक राज्य पुलिस ने उसे 7 और 8 नवंबर की दरम्यानी रात दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया। उसे कानूनी कार्रवाई के लिए पंजाब लाया जा रहा है। अफरीदी तरनतारन जिले के टूट गांव का रहने वाला है।

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कौन है गुरविंदर उर्फ अफरीदी

गुरविंदर अफरीदी डोनी बल-प्रभ दासूवाल गैंग का कथित मुख्य सरगना है। उस पर विदेश से रहकर पंजाब में टारगेट किलिंग, वसूली के लिए फायरिंग और संगठित अपराध नेटवर्क चलाने का आरोप है। उस पर पांच हत्या के मामलों के अलावा हत्या की कोशिश, वसूली और आर्म्स एक्ट के तहत भी केस दर्ज हैं।

 

गुरविंदर का नाम तरनतारन के ठक्करपुरा गांव में 31 अगस्त 2022 को एक चर्च पर हुए हमले की जांच में सामने आया था। आरोप है कि 4 नकाबपोशों ने चर्च के सुरक्षा गार्ड को बंदूक की नोक पर रखा, प्रभु यीशु और मदर मैरी की मूर्तियां तोड़ीं और पादरी की कार में आग लगा दी। 

 

जून 2024 में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने इस मामले में जसविंदर सिंह उर्फ मुंशी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मुंशी ने कथित तौर पर अफरीदी और दो अन्य को अपना साथी बताया। इसके बाद पुलिस बाकी संदिग्धों की तलाश में जुट गई।

 

पुलिस ने अफरीदी को पंजाब की पांच बड़ी हत्याओं से जोड़ा है। इनमें अक्टूबर 2024 में सरपंच राजविंदर उर्फ राज तलवंडी, मार्च 2025 में एक 12 साल के बच्चे और विक्की चुघ, मई 2025 में जसवंत सिंह और सितंबर 2025 में कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष गुरमेल सिंह की हत्या शामिल हैं।

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कैसे पकड़ा गया?

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि अफरीदी 31 मार्च 2025 को मुंबई हवाई अड्डे से यूएई गया था। आरोप है कि उसने गोरखपुर के एक निवासी के ब्योरे से बना फर्जी पासपोर्ट इस्तेमाल किया। यह पासपोर्ट 12 फरवरी 2025 को लखनऊ में जारी हुआ था। डीजीपी के मुताबिक वह कई महाद्वीपों में जांच एजेंसियों से बचता रहा।

गौरव यादव ने बताया कि अफरीदी पहले यूएई में रहा। फिर उसने इस्तांबुल के रास्ते मैक्सिको पहुंचने की कोशिश की लेकिन उसे यूएई वापस भेज दिया गया। इसके बाद वह अप्रैल 2026 में केन्या, जून 2026 में अंगोला और नवंबर 2026 में इथियोपिया पहुंचा, जहां उसे पकड़ा गया।

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इंटरपोल ने जारी किया था रेड नोटिस

डीजीपी ने कहा कि पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस हासिल किया था। पुलिस उसकी फर्जी पहचान और आवाजाही की जानकारी केंद्रीय एजेंसियों से लगातार साझा करती रही। उन्होंने इसे 'ऑपरेशन शाहिद' की सफलता बताया। यह 10 महीने तक चला खुफिया आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान था, जिसमें एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कई देशों में निगरानी और ट्रैकिंग की गई।

ऑपरेशन शाहिद की निगरानी काउंटर इंटेलिजेंस विंग के ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्रेडिशन सेल (OFTEC) के आईजीपी आशीष चौधरी ने की। अभियान का नेतृत्व एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स और OFTEC ऑप्स के एसपी बिक्रमजीत सिंह बराड़ ने किया।