किसी भी मरीज की सिर्फ इलाज या दवा तक सीमित नहीं है। हेल्थ से जुड़ी हर प्रकिया में सावधानी जरूरी है। बच्चे के जन्म के बाद अंबिलिकल कॉर्ड से मिलने वाले कॉर्ड ब्लड को सुरक्षित रखना भी इसी का हिस्सा है।
जो पैरेंट्स बच्चे के जन्म के समय कॉर्ड ब्लड बैंक कराने का फैसला लेते हैं, उन्हें यह जरूर देखना चाहिए कि जिस बैंक को वे चुन रहे हैं, वहां सैंपल की सेफ्टी और क्वालिटी का कितना ध्यान रखा जाता है। अगर आप भी कॉर्ड ब्लड को सुरक्षित करवाने का प्लान कर रहे हैं तो इन जरूरी बातों का ध्यान रखें। इस बारे में गुरुग्राम के क्रायोविवा लाइफ साइंसेज की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अदिति कुंडू से जानिए।
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इन बातों का रखें ध्यान
सही तरीके से हो शुरुआत- कॉर्ड ब्लड बैंक में सैंपल लेने से लेकर उसे सुरक्षित रखने तक हर काम तय नियमों के अनुसार होना चाहिए। आईसीएमआर (ICMR) की 2023 की गाइडलाइंस में कॉर्ड ब्लड के कलेक्शन, लैब तक पहुंचाने, जांच, फ्रीज करने और स्टोरेज को लेकर जरूरी नियम बताए गए हैं। पैरेंट्स को यह जानकारी लेनी चाहिए कि बैंक इन नियमों और अपनी एसओपी का सही तरीके से पालन करता है या नहीं। वहां काम करने वाले स्टाफ को जरूरी ट्रेनिंग मिली है या नहीं और सैंपल का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है या नहीं। कॉर्ड ब्लड लेते समय इंफेक्शन से बचाव का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया से मां और न्यूबोर्न की मेडिकल केयर प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
लैब तक पहुंचने में भी सावधानी- कॉर्ड ब्लड की सेफ्टी सैंपल लेने के समय से ही शुरू हो जाती है। इसके लिए इस्तेमाल होने वाली कलेक्शन किट सही होनी चाहिए। सैंपल की सही पहचान और लेबलिंग के साथ यह रिकॉर्ड भी होना चाहिए कि उसे किसने संभाला और किस तरह लैब तक पहुंचाया गया। रास्ते में सही टेम्परेचर और दूसरी जरूरी कंडीशन का ध्यान रखना होता है। लैब में भी सैंपल को सुरक्षित वातावरण में प्रोसेस किया जाना चाहिए। इसके बाद कॉर्ड ब्लड की क्वालिटी की जांच होती है। इसमें जरूरी टेस्ट के साथ सेल्स की संख्या, उनकी वायबिलिटी यानी जीवित रहने की क्षमता और इंफेक्शन की जांच की जाती है। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड में भी सैंपल कलेक्शन, जांच, इक्विपमेंट की निगरानी और स्टाफ की ट्रेनिंग को जरूरी माना गया है।
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सिर्फ फ्रीज करना ही स्टोरेज नहीं- कॉर्ड ब्लड को सुरक्षित रखने का मतलब सिर्फ फ्रीजर में रखना नहीं है। इसे बहुत कम टेम्परेचर पर खास प्रक्रिया से स्टोर किया जाता है। स्टोरेज के दौरान टेम्परेचर की लगातार निगरानी, रिकॉर्ड और बिजली या मशीन खराब होने की स्थिति में बैकअप व्यवस्था जरूरी है। बैंक के पास इमरजेंसी प्लान भी होना चाहिए। कॉर्ड ब्लड बैंक कराने से पहले पैरेंट्स को यह जानकारी होनी चाहिए कि इसका इस्तेमाल किन बीमारियों में होता है और किन इलाजों पर अभी रिसर्च चल रही है। साथ ही सैंपल को कितने समय तक और किस तरह सुरक्षित रखा जाएगा, इसकी जानकारी भी मिलनी चाहिए।
भविष्य में सैंपल की जरूरत पड़ने पर उसे सुरक्षित तरीके से निकालने और उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए। भरोसेमंद बैंक सिर्फ भविष्य में इलाज की उम्मीद नहीं बताता, बल्कि पैरेंट्स को कॉर्ड ब्लड की उपयोगिता, सीमाओं और मौजूदा मेडिकल जानकारी के बारे में स्पष्ट जानकारी देता है। इससे पैरेंट्स किसी भ्रम या अवास्तविक उम्मीद के बजाय सही जानकारी के आधार पर फैसला ले सकते हैं।
