कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 8 अगस्त को हल्द्वानी में हुई रैली के बाद कार्यक्रम स्थल के शुद्धीकरण का मामला सामने आया। आरोप है कि एक दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े लोगों ने रैली वाली जगह पर शुद्धीकरण किया। राज्यसभा में खड़गे ने इस घटना का जिक्र करते हुए इसे छुआछूत के दर्द से जोड़ा और सवाल भी उठाए थे। हालांकि, भारतीय राजनीति में शुद्धीकरण को लेकर विवाद का यह पहला मामला नहीं है। देश की संसदीय राजनीति में उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम भी इससे अछूते नहीं रहे।

 

राजनीति में नेताओं या उनके आने-जाने से जुड़े स्थानों को शुद्ध करने के दावे पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं। इनमें दलित नेताओं से जुड़े कुछ मामले काफी चर्चा में रहे, जबकि एक मामला पूर्व मुख्यमंत्री के सरकारी आवास से भी जुड़ा था।

 

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शुद्धीकरण के विवाद कब-कब उठे?

  • जगजीवन राम की मौजूदगी के बाद मूर्ति धोने का दावा
    1978 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम ने वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद की मूर्ति का अनावरण किया था। उनके जाने के बाद कुछ छात्रों और पुजारियों ने मूर्ति को गंगाजल और दूध से धोया। इसे मूर्ति के शुद्धीकरण की कार्रवाई बताया गया। घटना को लेकर देशभर में विरोध हुआ और मामला संसद तक पहुंचा।
  • दलित मंत्री के मंदिर जाने पर हुआ विवाद
    2009 में ओडिशा की तत्कालीन मंत्री प्रमिला मल्लिक अखंडलमणि मंदिर के गर्भगृह में पूजा करने पहुंची थीं। प्रमिला मल्लिक दलित समुदाय से आती हैं। उनके गर्भगृह में जाने के बाद मंदिर के पुजारियों ने मंदिर बंद कर दिया और शुद्धीकरण की रस्म की। उस समय मंदिर के मुख्य पुजारी ने कहा था कि दलितों को गर्भगृह में जाने की इजाजत नहीं है। इस घटना को लेकर भी काफी विवाद हुआ था।

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  • जीतन राम मांझी के मंदिर जाने के बाद शुद्धीकरण का दावा
    2014 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी स्थित प्रसिद्ध परमेश्वरी देवी मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे। मांझी महादलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनके मंदिर से बाहर निकलने के बाद पुजारियों ने मूर्तियों और पूरे मंदिर परिसर को शुद्ध करने के लिए धोया था। इस घटना को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई थी। मामले की सच्चाई पता लगाने के लिए बिहार सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए थे।
  • अखिलेश के आवास का शुद्धीकरण
    2017 में योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वह 5, कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास में रहने पहुंचे। इससे पहले इस सरकारी बंगले में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री के तौर पर रहते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी के वहां पहुंचने से पहले धार्मिक अनुष्ठान और शुद्धीकरण कराया गया था।

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  • अलवर में टीकाराम जूली के मंदिर जाने पर विवाद
    2025 में राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और दलित नेता टीकाराम जूली ने अलवर के एक मंदिर में पूजा की थी। उनके मंदिर से बाहर निकलने के बाद BJP के पूर्व नेता ज्ञानदेव आहूजा ने गंगाजल छिड़ककर मंदिर परिसर का शुद्धीकरण किया था। विवाद बढ़ने के बाद BJP ने ज्ञानदेव आहूजा को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी। इस मामले में SC/ST एक्ट के तहत शिकायत भी दर्ज की गई थी।