भारत में चुनावों से पहले यात्राओं का दौर खूब चर्चा में रहता है। सरकार में काबिज नेता अक्सर चुनाव से पहले जिला या विधानसभा वार यात्राएं करते हैं। कई विपक्षी नेताओं ने भी ऐसी यात्राओं के जरिए अपने पक्ष में जबरदस्त माहौल बनाया और सत्ता में आए। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में ऐसी यात्रा निकाली थी। पूर्व में जगन मोहन रेड्डी की पदयात्रा, प्रशांत किशोर की बिहार यात्रा, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और नीतीश कुमार की यात्रा भी खूब चर्चा में रही है। आने वाले समय में सबसे ज्यादा रोचक चुनाव उत्तर प्रदेश में होना है और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना औपचारिक एलान के ही एक ऐसी यात्रा शुरू कर दी है। वह पिछले एक महीने में दो दर्जन से ज्यादा जिलों का दौरा कर चुके हैं। इसके उलट प्रदेश के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के मुखिया अपने पार्टी कार्यालय तक ही सीमित हैं। शायद यही वजह है कि ओम प्रकाश राजभर हर दिन सुबह उठते ही अखिलेश पर तंज कसते नजर आते हैं।
ओम प्रकाश राजभर अक्सर अखिलेश यादव को देर तक सोने वाला, AC से ना निकलने वाला और आराम पसंद नेता बताते हैं। कई बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कह चुके हैं कि जो नेता 11 बजे तक सोता हो, वह क्या काम करेगा? ऐसे में हमने यह देखने की कोशिश की है कि पिछले एक महीने में उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख नेताओं यानी योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव ने राजनीतिक रूप से क्या गतिविधि की। हमने इसमें दोनों नेताओं के निजी और उनकी पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स को खंगाला। आइए विस्तार से समझते हैं।
महीने भर में 26 जिले नाप गए CM योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी उत्तर प्रदेश में काफी मजबूत नजर आ रही है। तमाम आरोपों के बावजूद योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता खूब है। ऐसे में चुनाव से पहले खुद सीएम योगी एक-एक जिले में जा रहे हैं। पूर्व के कई मुख्यमंत्री नोएडा जाने से बचते रहे हैं लेकिन योगी आदित्यनाथ पिछले एक महीने में तीन बार नोएडा जा चुके हैं। पिछले 35-40 दिन वह प्रदेश के 26 जिलों का दौरा कर चुके हैं। वह इन जिलों में जाकर सरकारी योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं।
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साथ ही साथ, वह अलग-अलग जिलों की पुरानी समस्याएं गिनाते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साध रहे हैं। पिछले एक महीने में योगी आदित्यनाथ ने बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, झांसी, ललितपुर महोबा, पूर्वांचल के वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया, गोंडा, संत कबीर नगर, पश्चिम यूपी में नोएडा, सहारनपुर, हाथरस के अलावा, मुरादाबाद, पीलीभीत, रामपुर, उन्नाव, कानपुर, अयोध्या, अलीगढ़, फिरोजाबाद, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और प्रयागराज भी जा चुके हैं।
अखिलेश यादव ने क्या-क्या किया?
12 जून को अखिलेश यादव कासगंज और एटा के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पूर्व सांसद कुंवर देवेंद्र सिंह यादव को फिर से सपा में शामिल करवाया। एटा के सांसद रहे देवेंद्र सिंह यादव 2019 में लोकसभा का चुनाव हारे थे तो सपा ने 2024 में उन्हें टिकट नहीं दिया था। इसी के बाद वह बीजेपी में चले गए थे लेकिन अब सपा में लौट आए हैं। अखिलेश यादव जिस कार्यक्रम में पहुंचे थे वह देवेंद्र सिंह यादव ने ही आयोजित किया था। अखिलेश देवेंद्र सिंह यादव के उर्मिला गार्डन का उद्घाटन करने पहुंचे थे।
पिछले एक महीने में अखिलेश यादव सुप्रिया सुले की बेटी की शादी के लिए मुंबई गए, आजमगढ़ में एक शादी में शामिल हुए और कन्नौज के एक परिवार में किसी के निधन के बाद शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे थे। इसके अलावा, उन्होंने ज्यादातर वक्त लखनऊ में सपा मुख्यालय में होने वाली बैठकों और प्रेस वार्ताओं में खर्च किया।
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इसके उलट, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रदेश भर में अलग-अलग कार्यक्रम कर रहे हैं। बलिया के सांसद सनातन पांडे इन दिनों ब्राह्मणों को एकजुट करने के लिए अलग-अलग जिलों में जा रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी, प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल, सांसद राजीव राय, धर्मेंद्र यादव और शिवपाल यादव लगातार अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं।
सिर्फ विजन इंडिया के कार्यक्रमों में जा रहे अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी ने 'विजन इंडिया: प्लान, डेवलप एंड असेंट (PDA)' नाम से कार्यक्रमों की शुरुआत की है। अब तक मेरठ, आगरा और प्रयागराज में तीन कार्यक्रम हुए हैं। अखिलेश यादव ने इन तीनों में ही हिस्सा लिया है और रोचक बात है कि राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए वह इन्हीं तीन जगहों पर गए हैं। पिछले लगभग एक महीने के वक्त में अखिलेश यादव ने इन तीन जिलों का दौरा किया है।
ये कार्यक्रम पारंपरिक राजनीतिक रैलियों की तरह नहीं हो रहे हैं। इन्हें कॉन्फ्रेंस हॉल या होटल में आयोजित किया जा रहा है और इसके जरिए प्रोफेशनल्स, कारोबारियों और बिजनेस से जुड़े युवाओं को साधने की कोशिश की जा रही है। बताया जाता है कि इसके पीछे अखिलेश यादव की ही योजना है। इसमें एक्सपर्ट्स के साथ चर्चा, क्विज और सवाल-जवाब भी होते हैं। हालांकि, एक से दूसरे कार्यक्रम में गैप और कम प्रचार-प्रसार के चलते यह कार्यक्रम कोई खास लोकप्रियता नहीं बटोर पाया है।
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इसके जरिए समाजवादी पार्टी अपनी छवि बदलने की कोशिश जरूर करती दिख रही है। सपा के नेता बताते हैं कि वह खुद को प्रोफेशनल और पढ़े-लिखे लोगों की पार्टी दिखाना चाहती है और बीजेपी के उस अभियान को खत्म करना चाहती है जिसमें वह सपा को 'गुंडों की पार्टी' बताती है। इसके लिए इसकी जिम्मेदारी पूर्व IAS अधिकारी आलोक रंजन, प्रोफेसर अभिषेक मिश्रा और लोकसभा सांसद राजीव राय को दी गई है।
