उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की गोपामऊ विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक श्याम प्रकाश के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक कार्यक्रम के दौरान विधायक श्याम प्रकाश ने कहा कि चुनाव केवल विकास कार्यों से नहीं जीते जाते बल्कि चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक तिकड़म भी जरूरी होती है। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्ष ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
जानकारी के अनुसार, विधायक श्याम प्रकाश अपने क्षेत्र में प्रशासक बनाए गए पूर्व प्रधानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने कई गांवों और कस्बों में सड़क, नाली, खड़ंजा समेत अनेक विकास कार्य कराए लेकिन इसके बावजूद कई बूथों पर उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि राजनीति में केवल विकास कार्य ही पर्याप्त नहीं होते, चुनाव जीतने के लिए रणनीति, संगठन और राजनीतिक प्रबंधन भी जरूरी होता है। विधायक के 'तिकड़म' शब्द के प्रयोग को लेकर विपक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया।
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अखिलेश यादव का हमला
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधायक के बयान को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजेपी विधायक ने स्वयं स्वीकार कर लिया है कि चुनाव विकास के नहीं बल्कि तिकड़म और बेईमानी के सहारे जीते जाते हैं।
अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा, 'अब देखना यह है कि बीजेपी इस विधायक को पार्टी से बाहर करेगी या फिर उसे अपना अगला मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करेगी।' उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता बीजेपी की सभी राजनीतिक तिकड़मों का जवाब देगी।
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विवाद बढ़ने पर दी सफाई
बयान पर विवाद बढ़ने के बाद विधायक श्याम प्रकाश ने सफाई देते हुए कहा कि उनके कथन का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने कहा कि उनका आशय किसी गैरकानूनी या गलत तरीके से चुनाव जीतने से नहीं था। विधायक श्याम प्रकाश ने कहा, 'चुनाव केवल सड़क, नाली और भवन बनवा देने से नहीं जीते जाते। जनता के बीच लगातार रहना पड़ता है। बूथ स्तर पर संगठन मजबूत होना चाहिए और कार्यकर्ताओं की मेहनत भी चुनाव जिताने में बड़ी भूमिका निभाती है।'
उन्होंने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया गया है जबकि वह संगठन और जनसंपर्क की महत्ता बता रहे थे। विधायक के बयान और उस पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे बीजेपी की चुनावी कार्यशैली का खुला स्वीकार बता रहा है जबकि बीजेपी नेता इसे सामान्य राजनीतिक टिप्पणी और संगठन की भूमिका से जोड़कर देख रहे हैं।
