उत्तर प्रदेश में समय से पहले विधानसभा चुनाव की चर्चाओं के बीच समाजवादी पार्टी (SP) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की आधे से ज्यादा विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नाम आंतरिक रूप से तय कर लिए हैं। इन उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र में सक्रिय होने के संकेत भी दे दिए गए हैं।
प्रदेश की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में समय से पहले चुनाव कराने की बातें चल रही हैं। हालांकि सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसके बावजूद प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने संभावित स्थिति को देखते हुए चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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विधानसभा उम्मीदवारों के नाम लगभग तय
पार्टी सूत्रों का कहना है कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने कई सीटों पर उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर दिए हैं। इन संभावित प्रत्याशियों को क्षेत्र में जनसंपर्क बढ़ाने, संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।
संभावित उम्मीदवारों को जनता से मिलने के निर्देश
अखिलेश यादव ने भी संभावित उम्मीदवारों से जनता के बीच लगातार बने रहने को कहा है। समाजवादी पार्टी ने अभी तक उम्मीदवारों की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। पार्टी का कहना है कि औपचारिक घोषणा चुनाव आयोग के कार्यक्रम जारी होने के बाद ही की जाएगी।
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किन सीटों पर समाजवादी पार्टी का जोर है?
समाजवादी पार्टी उन सीटों पर खास ध्यान दे रही है जहां पिछले चुनाव में हार-जीत का अंतर कम था या जहां समाजवादी पार्टी की स्थिति पहले से मजबूत मानी जाती है। पार्टी का मानना है कि समय रहते तैयारी करने से उम्मीदवारों को क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने और जातीय-सामाजिक समीकरण साधने का मौका मिलेगा।
37 लोकसभा जहां SP जीती, अब उन्हें साधने की तैयारी
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 37 पर जीत हासिल की थी। अब पार्टी उन लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस कर रही है। संबंधित सांसदों और संगठन पदाधिकारियों को गांव-गांव जाकर चौपाल और जनसंवाद कार्यक्रम करने के निर्देश दिए गए हैं।
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समावादी पार्टी उम्मीद में क्यों है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर समय से पहले चुनाव होते हैं तो समाजवादी पार्टी की यह रणनीति उसे संगठनात्मक रूप से मजबूती दे सकती है। हालांकि चुनाव की तारीखों का फैसला निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के बाद ही साफ होगा।
