साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कैसरगंज सीट से टिकट कटने के बाद भी बृजभूषण शरण सिंह की राजनीतिक सक्रियता और प्रभाव में कोई खास कमी दिखाई नहीं दी। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उनकी जगह उन्हीं के बेटे करण भूषण सिंह को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज करके संसद का रास्ता तय किया। वहीं दूसरे बेटे प्रतीक भूषण सिंह पहले से गोंडा सदर सीट से विधायक हैं।
अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले परिवार की बेटी को भी सक्रिय राजनीति में उतारा जा सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टिकट कटने के बाद भी बृजभूषण शरण सिंह अवध और पूर्वांचल की राजनीति में अपनी पुरानी ताकत बरकरार रख पाएंगे?
छात्र राजनीति से संसद तक का सफर
बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ और धीरे-धीरे वह पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा चेहरा बन गए। छह बार लोकसभा सांसद रहे बृजभूषण ने गोंडा, कैसरगंज और आसपास के जिलों में मजबूत जनाधार तैयार किया। ठाकुर राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती है और वर्षों से वह क्षेत्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बृजभूषण का प्रभाव गोंडा, कैसरगंज, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और अयोध्या के कई इलाकों में देखा जाता है।
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सहकारी संस्थाओं, शिक्षा संस्थानों और स्थानीय सामाजिक संगठनों के जरिए उन्होंने एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया है, जिसका असर चुनावी राजनीति में भी दिखाई देता है। पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक उनके समर्थकों की सक्रिय भूमिका रहती है।
करते रहे हैं मुलायम, अखिलेश की तारीफ
बृजभूषण शरण सिंह की राजनीति का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि बीजेपी में रहते हुए भी उन्होंने कई बार समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की खुलकर तारीफ की है। सार्वजनिक मंचों से वह मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक कौशल, संघर्ष और जनाधार का उल्लेख करते रहे हैं। कई मौकों पर उन्होंने अखिलेश यादव को भी एक परिपक्व और जनाधार वाले नेता के रूप में सराहा है। यही वजह है कि वह बीजेपी और सपा दोनों खेमों में चर्चा का विषय बने रहते हैं।
2024 में करण भूषण सिंह के सांसद बनने के बाद परिवार की राजनीतिक विरासत को नई मजबूती मिली है। विधायक प्रतीक भूषण सिंह पहले से संगठन और क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। अब चर्चा इस बात की है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में परिवार की बेटी को भी चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे परिवार के सियासी विस्तार की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
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BJP के लिए क्यों अहम हैं बृजभूषण?
लोकसभा टिकट कटने के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह की संगठनात्मक पकड़ और समर्थकों की ताकत बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। अवध क्षेत्र की कई सीटों पर उनका प्रभाव उम्मीदवारों के प्रदर्शन को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका को नजरअंदाज करना आसान नहीं माना जाता।
2027 के विधानसभा चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह स्वयं चुनावी मैदान में हों या न हों लेकिन उनके राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा जरूर होगी। एक बेटा सांसद है, दूसरा बेटा विधायक है और परिवार के विस्तार की चर्चाएं भी तेज हैं। ऐसे में वह कई सीटों पर उम्मीदवारों के चयन, जातीय समीकरणों और चुनावी रणनीति को प्रभावित करने की स्थिति में दिखाई देते हैं।
क्या फिर साबित होगी राजनीतिक ताकत?
लोकसभा टिकट कटने के बाद माना जा रहा था कि बृजभूषण का राजनीतिक प्रभाव कमजोर पड़ सकता है लेकिन बेटे की जीत और क्षेत्र में उनकी लगातार सक्रियता ने अलग तस्वीर पेश की। अब 2027 का चुनाव यह तय करेगा कि बृजभूषण शरण सिंह सिर्फ एक क्षेत्रीय प्रभाव वाले नेता रहेंगे या फिर अवध की राजनीति में एक बार फिर निर्णायक शक्ति केंद्र के रूप में अपनी भूमिका दर्ज कराएंगे। फिलहाल इतना तय है कि टिकट कटने के बावजूद उनकी सियासी प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है और आने वाले चुनावों में उनकी भूमिका पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
