बिहार की राजनीति में झटका खाने के बाद विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूरी ताकत झोंकने का फैसला कर लिया है। निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा दिलाने की मांग को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए सहनी ने यूपी में 'आरक्षण नहीं तो वोट नहीं' का नारा दिया है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद को छह महीने का समय देते हुए चेतावनी दी है कि अगर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिला तो समाज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का समर्थन नहीं करेगा। इसके लिए पूरे प्रदेश में 'निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा' निकालने का भी एलान किया गया है।
मुकेश सहनी की पार्टी VIP ने बिहार में कभी नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (एनडीए) तो कभी महागठबंधन के साथ मिलकर राजनीति की लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद सहनी ने अपना राजनीतिक फोकस उत्तर प्रदेश की ओर मोड़ दिया है। उनका मानना है कि यूपी में निषाद, मल्लाह, बिंद, केवट, कश्यप, धीवर जैसी जातियों की बड़ी आबादी है, जिसे आरक्षण के मुद्दे पर एकजुट कर राजनीतिक ताकत बनाई जा सकती है।
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आरक्षण को बनाया सबसे बड़ा चुनावी हथियार
मुकेश सहनी का कहना है कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में निषाद समाज को अनुसूचित जाति का लाभ मिलता है जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में यह सुविधा नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर वह पूरे प्रदेश में जनसंपर्क अभियान और संकल्प यात्रा निकालेंगे। बस्ती में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने साफ कहा कि यदि आरक्षण नहीं मिला तो समाज बीजेपी को वोट नहीं देगा।
सहनी ने मंत्री डॉ. संजय निषाद पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों से निषाद समाज को आरक्षण दिलाने का वादा किया लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। उन्होंने छह महीने के भीतर आरक्षण पर स्पष्ट निर्णय कराने की चुनौती दी और कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो निषाद समाज स्वयं राजनीतिक फैसला करेगा।
पूर्वांचल से लेकर मध्य यूपी तक साध रहे समीकरण
VIP की रणनीति उन विधानसभा क्षेत्रों पर फोकस करने की है, जहां निषाद, मल्लाह, बिंद, केवट और कश्यप समाज निर्णायक भूमिका में माना जाता है। पार्टी की नजर खासतौर पर गोरखपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, संतकबीरनगर, बस्ती, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, कानपुर देहात, उन्नाव और लखनऊ जैसे जिलों पर है। इन इलाकों में नदी किनारे बसे निषाद समाज का प्रभाव कई विधानसभा सीटों पर चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाला माना जाता है।
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किन सीटों पर लड़ सकती है VIP?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, VIP उन सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है, जहां निषाद समाज का प्रभाव अधिक है। हालांकि, अभी अंतिम सूची घोषित नहीं हुई है लेकिन पूर्वांचल और मध्य यूपी की कई दर्जन सीटों पर संगठन विस्तार और बूथ स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है। संकल्प यात्रा के जरिए पार्टी पहले सामाजिक आधार मजबूत करने और फिर चुनावी रणनीति तय करने की योजना पर काम कर रही है।
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही छोटे दल अपने-अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने में जुट गए हैं। ऐसे में मुकेश सहनी का आरक्षण अभियान निषाद समाज के वोटों को कितना प्रभावित करेगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि बिहार के बाद अब VIP ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए आरक्षण के मुद्दे पर बड़ा दांव चल दिया है।
