कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में हाल ही में दावा किया गया कि कर्नाटक के मौजूदा सीएम सिद्धारमैया 28 मई को अपने पद से इस्तीफा देंगे। उनकी जगह डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को प्रमोशन दिया जाएगा। हालांकि अभी तक इन खबरों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मगर यह सबको पता है कि कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता की खींचतान चल रही है। डीके शिकुमार ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले को लागू करने की मांग हाईकमान के सामने उठा चुके हैं।

 

अब कर्नाटक के सियासी खींचतान पर पूर्व सीएम और बीजेपी सांसद बसवराज एस बोम्मई ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर अब सिद्धारमैया को हटाया जाता है तो 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ेगा। सिद्धारमैया ओबीसी समाज से आते हैं। कांग्रेस के इस फैसले से यह समाज नाराज होगा।

 

 

 

 

 

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'कर्नाटक कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं'

उन्होंने कहा, 'समस्या उस दिन पैदा हुई जब सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री चुना गया था। यह सर्वसम्मत चयन नहीं था। पिछले तीन सालों से वे सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक के लोगों की उपेक्षा की। मैराथन बैठकों से पता चलता है कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है।'

 

 

 

 

बोम्मई ने आगे कहा कि अगर राहुल गांधी ओबीसी नेता (सिद्धारमैया) को हटाते हैं तो यह साबित हो जाएगा कि वह ओबीसी के लिए नहीं हैं। उनके फैसले का असर इंडी गठबंधन पर पड़ेगा। गठबंधन में ओबीसी नेता इस फैसले को सहजता से नहीं लेंगे।

 

 

 

 

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'तो कांग्रेस से नाराज होंगे ओबीसी'

उन्होंने दावा किया कि जब भी किसी मुख्यमंत्री को हटाया जाता है तो इसका प्रभाव पड़ता है। अगर किसी ओबीसी नेता को हटाया जाता है तो ओबीसी लोग नाखुश होंगे। इससे 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए बहुत सी समस्याएं पैदा होंगी। 

 

 

 

कांग्रेस सच नहीं बताती है: बोम्मई

सीएम बदलने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोगों को कभी सच नहीं बताया। वे जो कहते हैं, उसे कौन मानेगा? मुझे नहीं लगता कि अगर ऐसा होता है तो सत्ता का सुचारू हस्तांतरण होगा। सिद्धारमैया के साथ समझौता किया गया है। उन्होंने अपने तरीके से हेरफेर किया था। वह दो बार सीएम बने। मुझे तत्काल विद्रोह नहीं दिख रहा है।