पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक नया सियासी समीकरण उभरता दिखाई दे रहा है। जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) लगातार अपना विस्तार करती जा रही है। खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह लंबे समय से जेल में बंद हैं और उन्होंने जेल से ही लोकसभा चुनाव लड़ा था और एक बड़ी जीत दर्ज की थी। पार्टी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह अमृतपाल सिंह को पंजाब का सीएम बनाएगी लेकिन पार्टी इस वास्तविकता को भी जानती है कि सिर्फ पंथिक वोट हासिल करने से पार्टी सीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाएगी।
अमृतपाल की पार्टी ने अब एक नया और बड़ा दांव चल दिया है। पार्टी ने सरकार बनने पर एक हिंदू और एक दलित नेता को डिप्टी सीएम बनाने का वादा किया है। यह फॉर्मूला पंजाब में पंथक राजनीति के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व और हिंदू-सिख एकता को साधने की कोशिश है। गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल राज्य में हिंदू वोटर्स को साथ लाने के लिए बीजेपी का साथ लेता था लेकिन अब अमृतपाल की पार्टी ने हिंदू डिप्टी सीएम का दांव चल दिया है।
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अमृतपाल सीएम और दो डिप्टी सीएम
अप्रैल 2026 में लुधियाना के मुंडियां कलां में आयोजित पंथक सभा में पार्टी के संरक्षक तरसेम सिंह ने अमृतपाल सिंह को 2027 के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद अब उन्होंने सरकार बनने पर हिंदू और दलित समुदाय से एक-एक डिप्टी सीएम नियुक्त करने की बात कही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि पंजाब में केवल पंथक मुद्दों के सहारे सत्ता हासिल करना मुश्किल है, इसलिए दूसरे समुदायों को भी राजनीतिक हिस्सेदारी का भरोसा देना जरूरी है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता और दाखा विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने भी जुलाई में कहा कि अमृतपाल सिंह ही मुख्यमंत्री पद के चेहरे होंगे और 2027 के चुनाव में पंथक मुद्दों के साथ हिंदू-सिख एकता को पार्टी अपने एजेंडे में प्रमुखता देगी। अयाली के मुताबिक पार्टी का लक्ष्य पंजाब को हिंदू, सिख, मुस्लिम और दूसरे सभी समुदायों के लिए सुरक्षित बनाना है।
कितना अहम है हिंदू-दलित कार्ड?
पंजाब की राजनीति में यह रणनीति महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में सिख आबादी बहुसंख्यक है, लेकिन चुनावी जीत के लिए किसी भी पार्टी को अलग-अलग सामाजिक समूहों का समर्थन हासिल करना पड़ता है। ऐतिहासिक रूप से शिरोमणि अकाली दल ने बीजेपी के साथ गठबंधन करके हिंदू वोटरों तक पहुंच बनाई थी। कई बार पार्टी को इस गठबंधन से सीएम की कुर्सी मिली। दूसरी तरफ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी व्यापक सामाजिक गठजोड़ के सहारे चुनावी सफलता हासिल की है।
ऐसे में अमृतपाल के नेतृत्व वाली पार्टी का हिंदू और दलित डिप्टी सीएम का फॉर्मूला एक तरह से यह संदेश देने की कोशिश है कि पार्टी सिर्फ सिख राजनीति तक सीमित नहीं रहेगी। खास तौर पर दलितों को साधना पंजाब की राजनीति में बेहद अहम है, क्योंकि राज्य में अनुसूचित जाति की आबादी करीब एक-तिहाई है और दलित वोट कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। दलित पंजाब में पूरे देश में सबसे ज्यादा आबादी में हैं और कई इलाकों में खासकर दोआबा के इलाके में दलति मजबूत राजनीतिक वजूद रखते हैं।
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जेल से जीते थे चुनाव
अमृतपाल सिंह खुले तौर पर खालिस्तान का समर्थन करते हैं और पुलिस थाने पर हमला करने के बाद से वह जेल में बंद हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जेल में रहते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अमृतपाल सिंह ने खडूर साहिब सीट से 4,04,430 वोट हासिल किए और कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को 1,97,120 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उन्हें कुल मतों का 38.62 प्रतिशत मिला था।
इस जीत ने पंजाब की पंथक राजनीति में उनकी ताकत को स्थापित किया। अब उनके समर्थक इसी जनसमर्थन को विधानसभा चुनाव में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। 2024 के बाद अमृतपाल के समर्थकों ने सरबजीत सिंह खालसा और अन्य पंथक नेताओं के साथ मिलकर अपनी अलग पार्टी शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) बनाई। इसके बाद से लगातार पार्टी अपने संगठन का विस्तार कर रही है। पार्टी ने कई उम्मीदवारों को मैदान में भी उतार दिया है। राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि अमृतपाल की पार्टी पंजाब में एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है।
