पंजाब विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ 4 महीने का समय रह गया है लेकिन कांग्रेस पार्टी अपनी गुटबाजी से निकल नहीं पा रही है। कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी को खत्म करने के लिए पहले तो राज्य के प्रभारी भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को कमान दी गई। इसके बाद सचिन पायलट ने आते ही अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाकर प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी परगट सिंह को दी। 11 अक्टूबर को उनकी ताजपोशी में तमाम कांग्रेसी नेता शामिल हुए लेकिन मंच पर कई नेताओं ने अपना दर्द भी जाहिर कर दिया। इसके साथ ही एक दूसरे पर हमले भी किए।
11 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर 15 में स्थित पंजाब कांग्रेस के ऑफिस में पदभार ग्रहण कार्यक्रम रखा गया था। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा, भारत भूषण आशू सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी इस कार्यक्रम में रही। पार्टी से कई बार शिकायतें कर चुके चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी को भी आखिरकार एक बार फिर पंजाब कांग्रेस के मंच पर जगह मिली। प्रभारी सचिन पायलट ने तमाम नेताओं को साथ लेकर एकजुटता दिखाने की कोशिश की।
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बिना सीएम फेस लड़ेगी कांग्रेस
कांग्रेस प्रधान और प्रभारी दोनों ने एक बार फिर इस बात को सपष्ट कर दिया है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव राहुल गांधी के चेहरे पर लडे़गी। परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस में इतने चेहरे हैं कि हर कोई मुख्यमंत्री बनने की क्षमता रखता है। हालांकि, उन्होंने किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया और कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
राजा वडिंग ने क्या कहा?
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की लिए पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी के गुट ने काफी कोशिश की थी। प्रधान पद से हटने के बाद राजा वडिंग ने कहा था कि चन्नी जीत गए और वह हार गए। रविवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अपने संबोधन में उन्होंने एक बार फिर इन्हीं बातों को दोहराया। उन्होंने कहा कि भले ही पार्टी हाईकमान या पंजाब प्रभारी सचिन पायलट उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट न दें, लेकिन वह राहुल गांधी के एक वफादार सिपाही के रूप में कांग्रेस का झंडा हमेशा बुलंद रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि उनके नेता सिर्फ राहुल गांधी हैं।
उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब वह कांग्रेस के प्रधान थे, तब पार्टी के कई लोगों ने उनका विरोध किया था और हो सकता है कि आगे भी करें, लेकिन वे किसी का विरोध नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध उसी का किया जाता है जो ताकतवर होता है।
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राजा वडिंग नाराज?
राजा वडिंग प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने को लेकर नाराज हैं लेकिन वह चन्नी की तरह बागी रुख नहीं दिखा रहे हैं। हालांकि, रविवार को पंजाब कांग्रेस के प्रधान के पदभार ग्रहण कार्यक्रम से पहले उन्होंने पार्टी मुख्यालय के पास एक किराए के मकान में अपने समर्थकों और कई वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में ब्रह्म मोहिंद्रा, राणा केपी सिंह, सुरिंदर डावर, अनिल जोशी, सिमरजीत सिंह बैंस, हरदयाल कंबोज और मालविका सूद जैसे बड़े नेता शामिल हुए थे। राजनीतिक जानकार इसे राजा वडिंग के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं।
राजा वडिंग ने अपने भाषण में यह भी कहा कि उन्होंने राहुल गांधी से युवाओं को टिकट देने का वादा लिया है। पूर्व सीएम चरनजीत सिंह चन्नी से उन्होंने कार्यक्रम में मुलाकात नहीं की। इसके साथ ही चन्नी ने भी अपने भाषण में उनके काम की सराहना नहीं की। पंजाब कांग्रेस के दोनों नेता एक दूसरे पर मंच से तंज कसते हुए दिखाई दिए। हालांकि, तमाम नेताओं ने एकजुट होकर चुनावी मैदान में जाने की बात कही। अब नए अध्यक्ष के सामने चुनौती है कि वह इन तमाम नेताओं को कैसे एक साथ लेकर चुनावी मैदान में जाएंगे।
