समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अभी से अपनी सियासत और रणनीति की लाइन खींचने लगे हैं। वह एक तरफ लगातार बीजेपी, योगी सरकार और उनकी सरकार की कमियों को जनता के सामने मजबूती से रख रहे हैं। तो दूसरी तरफ अखिलेश पार्टी लाइन को मजबूती से लोगों को बता रहे हैं कि सरकार में आने पर वह उनके लिए क्या करेंगे। इसमें एक तीसरी चीज भी है, जिसे अखिलेश पूरी तरह से तो नहीं लेकिन आंशिक तौर से ही सही अपनी पार्टी की रणनीति बता दे रहे हैं।
दरअसल, 15 अगस्त को उन्होंने कानपुर देहात के रसूलाबाद में मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव में शहरी से ज्यादा ग्रामीण सीटों पर फोकस करेगी। इन्हीं सीटों को जीतने के लिए सपा अपनी पूरी ताकत लगाएगी।
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सपा की प्राथमिकता कौन होंगे?
इसी दौरान उन्होंने एक बयान दिया, 'समाजवादी सरकार बनने पर सबसे ज्यादा प्राथमिकता पर किसान होगा, गरीब होंगे और गांव में रहने वाले लोग होंगे।' इस बयान से सपा प्रमुख ने बता दिया कि वह शहरी सीटों पर कम ध्यान लगाकर ग्रामीण सीटों पर को जीतने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे क्योंकि ग्रामीण सीटों में ही किसान और गांव के लोग रहते हैं।
शहरी और ग्रामीण सीटें
अगर 2022 के विधानसभा की बात करें तो समाजवादी पार्टी ने 403 में से 111 सीटें जीती थी। इसमें से 77 सीटें ग्रामीण क्षेत्रों वाली जीती थीं। इसके अलावा अर्ध शहरी/कस्बाई और कुछ शहरी जीती। सपा चुनाव में यूपी की 86 पूरी तरह से कुछ ही शहरी सीटें जीत पाई थी जबकि बीजेपी ने अधिकतर शहरी सीटों पर कब्जा जमाकर यह साबित किया था कि आज भी शहरी सीटों पर उसका दबदबा कायम है।
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सपा के मुद्दे और गांव के लोग
दस साल से यूपी की सत्ता से बाहर समाजवादी पार्टी इस बार राम मंदिर, नौकरी, शिक्षा, बिजली और DAP खाद जैसे मुद्दों को लेकर बीजेपी को घेरने की तैयारी कर रही है। हैट्रिक सरकार बनाने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ भी लगातार जिलों के दौरे करके समीक्षा कर रहे हैं। यह सभी वे मुद्दे हैं, जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। गावों में आज भी बिजली, नौकरी, शिक्षा और खाद जैसे विषय बड़े मुद्दे हैं।
जिस तरह से सोशल मीडिया पर लोग बिजली विभाग को टैग करके गांवों में बिजली ना आने की समस्या दिखाते हैं। उससे साफ है कि इस सरकार में भी बिजली जरूरत के हिसाब से नहीं आ रही है। खाद के लिए जिला मुख्यालय और स्थानीय दुकानों पर किसान लाइन लगा रहे हैं। पिछले दिनों अखिलेश यादव ने सपा नेताओं को इन्हीं मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने की हिदायत दी थी।
यही वजह है कि सपा का शहरी से ज्यादा फोकस ग्रामीण सीटों पर अधिक फोकस है।
