उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां जमकर होने लगी हैं। सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जमीन से लेकर मीडिया-सोशल मीडिया में सक्रिय हैं। सूबे के हर जोन में बैठकें करके उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। इसके अलावा ये सभी पार्टियां हर वह सियासी चाल चल रही हैं, जिससे वह सत्ता के शीर्ष पर पहुंच सकें। मगर, इन तीनों दलों के बीच एक ऐसी भी मजबूत पार्टी है, जो लगभग निष्क्रिय पड़ी हुई है। वह पार्टी और कोई नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश में 2012 तक चार बार सरकार चलाने वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) है।

 

सूबे के दलित वोटरों पर काफी मजबूत पकड़ रखने वाली बहुजन समाज पार्टी चुनाव के नजदीक आने के बावजूद भी इतनी निष्क्रिय पड़ी हुई है कि इसके कोर वोटरों पर बीजेपी, सपा और कांग्रेस की कड़ी नजर है। ये सभी दल दलित वोटरों को अपने पाले में कर लेना चाहते हैं। इसके लिए सभी हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बीएसपी अपने वोटरों को रोकने के लिए कोई प्रयास करती हुई नहीं नजर आती है।

 

यह भी पढ़ें: अतीक और मुख्तार की तस्वीरें, अखिलेश पर निशाना, UP में शुरू पोस्टर की जंग

बसपा के कोर वोटरों को लुभाने की जंग

बसपा के कोर वोटरों को लुभाने में सबसे आगे बीजेपी और समाजवादी पार्टी हैं। इसमें भी बीजेपी सरकार में रहते हुए दलित वोटरों को चुनाव में 'कमल का बटन' दबाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है कि उसे यूपी की सत्ता तीसरी बार मिल जाए।

'डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना'

दरअसल, यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार अब प्रदेश में 403 करोड़ रुपए की लागत से मूर्तियां लगाने जा रही है। यह खर्चा पूरी तरह से यूपी के सरकारी खजाने से किया जाएगा। इस योजना का नाम 'डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना' है। इसके लिए सरकार पहले ही बजट पास कर चुकी है। 

 

इसमें प्रवधान किया गया है कि यूपी की 403 विधानसभाओं में से हर विधानसभा में 10 जगहों पर मूर्तियां स्थापित होंगी। जहां पहले से मूर्तियां स्थापित हैं वहां उन्हीं का उत्थान किया जाएगा। साथ ही हर मूर्ति पर 10-10 लाख रुपए खर्च किया जाएगा। इस तरह से एक विधानसभा में एक करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 

योजना में किया करेगी सरकार?

इन मूर्ति स्थापना में सबसे ज्यादा मूर्ति डॉ. आंबेडकर की लगाई जाएगी। इसके बाद संत कबीर दास, संत रविदास, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति स्थापित की जाएगी। इसके तहत मुर्तियों के पास बाउंड्री वॉल, छतरी, सुंदरीकरण, लाइटनिंग, हरियाली का विकास किया जाएगा।

 

इस योजना का मकसद उन महापुरुषों की प्रतिमाओं का संरक्षण और सम्मान करना है, जिन्होंने सामाजिक न्याय के लिए अपना जीवन समर्पित किया। इस योजना का मुख्य लक्ष्य बाबा साहब भीमराव आंबेडकर सहित उन सभी महापुरुषों और विभूतियों की प्रतिमाओं का सम्मान और रख रखाव करना है, जिन्होंने सामाजिक न्याय और समाज सुधार के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

 

यह भी पढ़ें: मुसलमानों पर अखिलेश यादव के लिए BJP जैसी भाषा क्यों बोल रहे असदुद्दीन ओवैसी?

बीजेपी ये कदम क्यों उठा रही है?

दरअसल, बाबा साहब भीमराव आंबेडकर, संत कबीर दास, संत रविदास, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसे महापुरुष दलितों के सबसे बड़े प्ररणास्रोत हैं। इस समाज में इन महापुरुषों के लिए आदार भाव इतना है कि इनका नाम आते ही भावुक हो जाते हैं। इन महापुरुषों ने समाज के सबसे निचले पायदान से उठकर शीर्ष को छुआ। लंबे समय से बसपा सत्ता से बाहर है और पार्टी प्रमुख 2017 विधानसभा और 2019 लोकसभा चुनाव के बाद से निष्क्रिय हो चुकी हैं।

सपा की काट करेगी बीजेपी

यही वजह है कि दलित वोट उनके हाथ से लगातार खिसकता जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में साफ देखने को मिला कि बसपा के हाथ से दलितों का वोट खिसकता जा रहा है। जबकि एक समय में यही समाज बसपा के अलावा किसी अन्य दल को वोटिंग नहीं करता था। सियासी जानकार और आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले कई चुनावों में बीजेपी इस वर्ग को अपने पाले में करने में थोड़ी बहुत कामयाब रही है।  

 

समाजवादी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा देकर बीजेपी को यूपी में पटखनी दे चुकी है। ऐसे में बीजेपी सपा की काट के लिए बसपा के वोट वोटरों को लुभाने के लिए दलितों के मसीहा डॉ. आंबेडकर और महापुरुषों की मुर्तियां लगवाने और उन्हें सवारने के लिए योजना लेकर आई है।