उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सत्ता की लड़ाई के साथ राजनीतिक विरासत की जंग भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में कई बड़े नेताओं के बेटे-बेटियां अपनी सियासी जमीन तैयार करते नजर आ रहे हैं। कहीं पिता की सीट पर वारिस की दावेदारी है तो कहीं संगठन में जिम्मेदारी मिलने के बाद चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा तेज है। ज्यादातर नाम अभी संभावित दावेदारों के तौर पर ही सामने आए हैं, अंतिम टिकट का फैसला पार्टियों को करना है।

 

भारतीय जनता पार्टी में कई वरिष्ठ नेताओं के बेटे-बेटियों की राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह का नाम लखनऊ पूर्व से संभावित दावेदार के रूप में चर्चा में है। नीरज को जून 2026 में प्रदेश भारतीय जनता पार्टी का उपाध्यक्ष भी बनाया गया है, जिससे उनकी संगठनात्मक भूमिका और मजबूत हुई है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बेटे करण महाना कानपुर की महाराजपुर सीट में सक्रिय हैं। क्षेत्र में उनकी बढ़ती मौजूदगी को 2027 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी में बड़े चेहरों की अगली पीढ़ी तैयार

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मनोज सिन्हा के बेटे अभिनव सिन्हा का नाम गाजीपुर सदर से संभावित दावेदारों में सामने आया है। इसी तरह वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी नेता संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार के लिए बहेड़ी, बरेली सीट की चर्चा है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह भी नोएडा में सक्रिय हैं। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के कारण उनकी राह आसान नहीं मानी जा रही। पूर्व सांसद संजय सिंह की बेटी आकांक्षा सिंह का नाम अमेठी में सक्रियता के साथ जुड़ा है।

 

पूर्व सांसद जगदंबिका पाल की बेटी आरती पाल का नाम भी राजनीतिक सक्रियता के कारण चर्चा में है। हालांकि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में अभी उनकी किसी खास विधानसभा सीट से 2027 का टिकट या दावेदारी आधिकारिक तौर पर तय होने की पुष्टि नहीं है। इसलिए उन्हें फिलहाल संभावित राजनीतिक चेहरे के तौर पर ही देखा जा रहा है।

 

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समाजवादी पार्टी में वारिसों की लंबी कतार

समाजवादी पार्टी में राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम एक दर्जन वरिष्ठ नेता अपने बेटे-बेटियों के लिए 2027 के टिकट की पैरवी कर रहे हैं। कई दावेदार अपने-अपने क्षेत्रों में पहले से सक्रिय होकर जमीन तैयार कर रहे हैं।बाराबंकी की कुर्सी सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के परिवार की श्रेय वर्मा का नाम चर्चा में है। उनके पिता राकेश वर्मा उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

 

अंबेडकरनगर की कटेहरी सीट से सांसद लालजी वर्मा की बेटी छाया वर्मा दावेदारों में हैं। वह क्षेत्र में मतदाताओं के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा रही हैं।अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद की दावेदारी फिर चर्चा में है। 2025 के उपचुनाव में हार के बावजूद अजीत की क्षेत्र में सक्रियता बनी हुई है।बलिया की बांसडीह सीट से पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के बेटे रणजीत चौधरी का नाम सामने है। वहीं केराकत से विधायक और पूर्व सांसद तूफानी सरोज के बेटे धनंजय सरोज भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। खास बात यह है कि तूफानी सरोज की बेटी प्रिय सरोज पहले ही लोकसभा पहुंच चुकी हैं।

 

बाराबंकी में पूर्व मंत्री फरीद महफूज किदवई के बेटे फैजान किदवई भी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। लखनऊ की बख्शी का तालाब सीट से राजेंद्र यादव के बेटे शिवेंद्र यादव की दावेदारी की चर्चा है। बलिया में वरिष्ठ नेता अंबिका चौधरी के बेटे आनंद चौधरी, आजमगढ़ में वरिष्ठ नेता दुर्गा प्रसाद यादव के बेटे विजय यादव, संभल में विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल महमूद, अमरोहा में पूर्व मंत्री महबूब अली के बेटे परवेज अली और आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से आलम बदी के बेटे मुजतबा आलम भी इसी राजनीतिक विरासत की दौड़ में बताए जा रहे हैं। संतकबीरनगर में सुबोध यादव की पार्टी में वापसी की कोशिश को भी उनके दिवंगत पिता भालचंद्र यादव की राजनीतिक विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है। यहां बेटे के लिए किसी खास सीट का अंतिम दावा स्पष्ट नहीं है।

 

बहुजन समाज पार्टी में उमाशंकर सिंह के बेटे पर दांव

बहुजन समाज पार्टी में दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस उर्फ यूकेश सिंह सबसे प्रमुख नया चेहरा बनकर उभरे हैं। बलिया की रसड़ा सीट से उमाशंकर सिंह लगातार तीन बार विधायक रहे थे और उनके निधन के बाद मायावती ने यूकेश को राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने का संकेत दिया था।31 अगस्त को लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की अहम बैठक में यूकेश को पहली पंक्ति में जगह मिलने के बाद उनकी 2027 में रसड़ा से दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है। हालिया रिपोर्टों में उन्हें बहुजन समाज पार्टी के संभावित प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि औपचारिक टिकट घोषणा अलग विषय है।

 

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तीनों दलों के सामने एक ही सवाल

2027 में राजनीतिक परिवारों की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाना तीनों दलों के लिए फायदे और चुनौती दोनों लेकर आएगा। भारतीय जनता पार्टी के सामने संगठन में सक्रिय नए चेहरों और परिवारवाद के आरोपों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। समाजवादी पार्टी में टिकट के लिए पहले से ही कई परिवारों के बीच प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है। 

 

बहुजन समाज पार्टी यूकेश सिंह के जरिए रसड़ा में उमाशंकर सिंह की राजनीतिक पकड़ को आगे बढ़ाने की कोशिश करती दिख रही है। 2027 का चुनाव सिर्फ भारतीय जनता पार्टी बनाम समाजवादी पार्टी या सत्ता बनाम विपक्ष की लड़ाई नहीं रहने वाला। कई सीटों पर पिता की बनाई राजनीतिक जमीन पर बेटों-बेटियों की नई पारी भी बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है। अंतिम तस्वीर टिकट वितरण के बाद ही साफ होगी, लेकिन अभी से यूपी की राजनीति में 'सियासी वारिसों' की दस्तक सुनाई देने लगी है।