उत्तर प्रदेश की सहारनपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं इमरान मसूद। फिलहाल कांग्रेस में हैं लेकिन पूर्व में बहुजन समाज पार्टी (BSP) और समाजवादी पार्टी (SP) में भी रह चुके हैं। उनका पूरा परिवार राजनीतिक है और कई अन्य सदस्य भी सक्रिय हैं। इस बार चर्चा का कारण इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद बने हैं। एक तरफ इमरान मसूद कांग्रेस की गठबंधन सहयोगी सपा से ज्यादा सीटें मांगने के चक्कर में बयानबाजी कर रहे हैं, दूसरी तरफ उनके दामाद शायान उसी सपा में शामिल हो गए हैं। उनके सपा में शामिल होते ही आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी यानी इमरान मसूद की बेटी को घर से निकाल दिया है। कहा जा रहा है कि मामला घरेलू है लेकिन अब यह राजनीतिक भी होता दिख रहा है। इसका कारण है कि चुनाव नजदीक हैं और दोनों तरफ की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी हैं।

 

कभी अपने ही चाचा से बगावत करने वाले इमरान मसूद के साथ अब वैसा ही कुछ उनका दामाद कर रहा है। कभी अपनी चाचा के खिलाफ जाकर पार्टी बदलकर चुनाव लड़ा था। अब उनके ही दामाद शायान मसूद भी इसी रास्ते चल पड़े हैं। 12 साल पहले इमरान मसूद ने टिकट कटने पर सपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। अब शायान मसूद अपने ससुर यानी इमरान मसूद के कांग्रेस में होते हुए खुद सपा में शामिल हो गए हैं। ये सब तब हो रहा है जब इमरान मसूद और सपा के बीच 36 का आंकड़ा दिख रहा है।

क्या है नया विवाद?

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ओर से इमरान मसूद खूब बयानबाजी कर रहे हैं। ज्यादातर बयानों में वह सपा को ही निशाने पर लेते हैं और ज्यादा सीटों की मांग करते हैं। कुछ दिन पहले ही वह सपा के विधायक आशू मलिक से एक मीटिंग में ही बहस करने लगे थे। उन्होंने यह भी कह दिया कि उनके परिवार का कोई सदस्य विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेगा। कहा जा रहा है कि चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे शायान मसूद को इससे झटका लगा और तुरंत वह सपा में शामिल हो गए। 

 

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उनके सपा में शामिल होने के बाद इमरान मसूद के भतीजे हमजा नोमान मसूद ने आरोप लगाए कि उनकी बहन यानी शायान की पत्नी को शायान ने मारा-पीटा और घर से निकाल दिया। उन्होंने शायान के पिता शादान पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 5 साल से ये सब चल रहा है लेकिन अब चुप नहीं रहा जा सकता है। इस पर शायान मसूद का कहना है कि वह परिवार की बातें सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं। 

क्या है इमरान मसूद की कहानी?

सहारनपुर से लोकसभा के सांसद इमरान मसूद अक्तूबर 2023 में तीसरी बार कांग्रेस में शामिल हुए थे। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। जब सपा ने उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया तब भी उन्हें उम्मीद थी कि अगर सरकार बनी तो उन्हें कोई और पद मिल जाएगा। जब सपा को जीत नहीं मिली तो इमरान मसूद सपा का साथ छोड़कर बीएसपी में शामिल हो गए। बाद में बीएसपी में रहते हुए राहुल गांधी की तारीफ करने के चलते मायावती ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

 

साल 2006 में सहारनपुर नगर पालिका के चेयरमैन बने इमरान मसूद ने अगले ही साल सपा से विधानसभा का टिकट मांगा। सपा ने टिकट नहीं दिया तो इमरान मसूद निर्दलीय लड़े और विधायक बन गए। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले इमरान मसूद का पूरा परिवार कांग्रेस में शामिल हो गया।

 

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2012 में इमरान मसूद नकुड़ विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़े लेकर हार गए। 2012 में वह फिर से सपा में शामिल हुए। सपा ने 2014 में उन्हें लोकसभा का टिकट दिया लेकिन उनके ही चाचा यानी काजी मसूद ने इमरान का टिकट कटवाकर अपने बेटे शाजान को दिलवा दिया। तब इमरान तुरंत कांग्रेस में शामिल हुए और उसके टिकट पर चुनाव लड़ गए। दोनों को हार मिली और और बीजेपी जीत गई।

 

हालांकि, इमरान मसूद की छवि एक नेता की बनती गई। 2017 में वह फिर से कांग्रेस के टिकट पर नकुड़ सीट पर लड़े लेकिन हार गए। 2019 में कांग्रेस के ही टिकट पर सहारनपुर से लोकसभा का चुनाव लड़े लेकिन हार गए। उसके बाद की कहानी हमने शुरू में ही बता दी है। 

भाई नोमान मसूद भी खूब लड़े चुनाव

इमरान मसूद की तरह उनके जुड़वा भाई नोमान मसूद भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जब इमरान मसूद सपा में थे तब उनके भाई नोमान मसूद गंगोह विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और तीसरे नंबर पर रहे। 2019 के उपचुनाव में में वह इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और 62,881 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। 2017 में भी वह कांग्रेस के ही टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे।

मसूद परिवार की कहानी

सहारनपुर में काजी राशिद मसूद ने इस परिवार को राजनीतिक नक्शे पर उभारा। वह कुल 5 बार सहारनपुर के सांसद बने। एक बार जनता पार्टी, फिर जनता पार्टी (सेक्युलर) और फरि दो बार जनता दल के टिकट पर लोकसभा पहुंचे राशिद मसूद बाद में मुलायम सिंह यादव के साथ आ गए। 2004 में वह सहारनपुर से सपा के लोकसभा सांसद बने। वह कुछ समय कांग्रेस में भी रहे लेकिन कांग्रेस के टिकट पर साल 1998 में कांशीराम के खिलाफ लड़कर चुनाव गए थे। इस चुनाव में कांशीराम भी हारे और तब बीजेपी के नकली सिंह चुनाव जीते थे। केंद्र सरकार में स्वास्थ्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे राशिद मसूद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़े थे। वह दो बार राज्यसभा भी गए। साल 2011 में उन्होंने राज्यसभा और समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। साल 2020 में उनका निधन हो गया।

 

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काजी रशीद मसूद के कुल चार भाई थे। अरशद, इरशाद, राशिद और रशीद। अरशद और इरशाद प्रोफेसर बने जबकि रशीद और राशिद राजनीति में आए। रशीद मसूद ने खुद को अपने पिता काजी मसूद की राजनीति का वारिस बनाया और बड़े नेता बने। उनके बाई राशिद तो उसने सक्रिय नहीं हुए लेकिन बेटे इमरान और नोमान राजनीति में खूब सक्रिय हुए। रशीद मसूद के इकलौते बेटे हैं शाजान मसूद।

2014 का चुनाव और विवाद

साल 2011 में रशीद मसूद और उनके भतीजे इमरान मसूद समेत पूरा परिवार कांग्रेस में आ चुका था। इसी के चलते 2012 में इमरान मसूद नकुड़ से विधानसभा का चुनाव लड़े। वह हार गए लेकिन शांत नहीं बैठे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी वह चुनाव लड़ना चाहते थे। कहा जाता है कि वह सपा से अपने लिए टिकट ले भी चुके थे लेकिन उनके ही चाचा यानी रशीद मसूद ने उनका टिकट कटवाकर अपने बेटे यानी शाजान मसूद को टिकट दिलवा दिया। ध्यान रहे कि यह शाजान मसूद वही हैं जो अब फिर से अपने बेटे शायान सहित सपा में शामिल हो गए हैं।

 

तब इमरान मसूद चुनाव लड़ने को बेताब थे और वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ गए। उन्हें 4.07 लाख वोट मिले जबकि उनके चचेरे भाई शाजान को सिर्फ 52,765 वोट मिले। यहां से इतना तो साबित हो गया कि परिवार में बड़े नेता इमरान मसूद हैं।

 

अब विवाद अगली पीढ़ी का है। एक तरफ इमरान मसूद के भतीजे हमजा मसूद हैं। वह इमरान के जुड़वा भाई नोमान मसूद के बेटे हैं। वह खुद को इमरान मसूद का वारिस मानते हैं। दूसरी तरफ शाजान के बेटे शायान भी राजनीति में काफी सक्रिय हैं। चर्चा है कि शायान बेहट विधानसभा से 2027 का चुनाव लड़ना चाहते थे। हालांकि, जब इमरान मसूद ने कहा कि परिवार से कोई टिकट नहीं लड़ेगा तो वह कांग्रेस से अलग हो गए। हालांकि, इस सीट से अभी सपा के ही उमर अली खान विधायक हैं जो जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी के दामाद हैं।