उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने में अब महज चंद महीनों का समय बचा है। मगर, अपनी निष्क्रियता के बीच बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमों मायावती चर्चा में हैं। वह अपनी राजनीति की वजह से नहीं बल्कि अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से एक बार फिर से (तीसरी बार) बाहर निकालने की वजह से चर्चा में हैं। मायावती इससे पहले दो बार और आकाश को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा चुकी हैं। इस बार तो बीएसपी चीफ ने आकाश का अपरिपक्व बताते हुए पार्टी से निकाला है। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी ने निकालते हुए कई कारण बताए हैं लेकिन चर्चा है कि आकाश को पार्टी में हाशिए पर धकेलने और पार्टी से निकालने के पीछे उन्हीं की पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

 

ऐसे में आइए जानते हैं कि आकाश आनंद को बहुजन समाज पार्टी से निकालने के पीछे वो बीएसपी नेता या पदाधिकारी कौन हैं, जिनको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकार मानते हैं कि आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के पीछे उनकी बीएसपी में सक्रियता के साथ में पार्टी के कामकाज में बदलाव लाने की कोशिशें हैं।

मुरादाबाद में आकाश का दिया गया वो भाषण

दरअसल, पिछले महीने आकाश आनंद ने मुरादाबाद में एक भाषण दिया था। उनका यह बयान मीडिया, सोशल मीडिया में चारों तरफ चर्चा का विषय बन गया। चर्चा इस बात की भी होने लगी कि युवाओं की भाषा बोलने वाला एक युवा नेता बीएसपी को मिल गया है। बीएसपी समर्थक बात करने लगे कि शायद इसी तेवर से बीएसपी सत्ता में वापसी की उम्मीद कर सकती है। 

 

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मगर इस बयान के बाद प्रोत्साहन मिलने के बजाय आकाश आनंद को ऐसा झटका लगा है कि उनके पॉलीटिकल करियर का सबसे बड़ा सेटबैक कहा जा सकता है।

 

आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक दलित रैपीडो ड्राइवर के समर्थन में ट्वीट किया था, जिसके बारे में कहा जाता है कि किसी दबाव में वह ट्वीट डिलीट करवा दिया गया। उसके बाद जेवर में हुई उनकी रैली के बाद अचानक से 3 सितंबर को फिर से अपरिपक्व को बताते हुए घर बिठा दिया जाता है। आखिरकार उनकी बुआ मायावती ने 10 सितंबर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। ध्यान देने वाली बात है कि आकाश आनंद के जेवर में हुई रैली में उन्होंने पार्टी में कई बदलावों की बात कही थी।

असली वजह क्या है?

लगभग दो साल पहले आकाश आनंद ने महाराष्ट्र में एक भाषण देते हुए इशारा किया था कि पार्टी में कुछ पदाधिकारी इतने ताकतवर हैं कि उनके खिलाफ कुछ नहीं किया जा सकता है, जबकि वो पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यही नेता पार्टी कार्यकर्ताओं और बहनजी के बीच दीवार बन रहे हैं। आकाश ने कहा, 'ये लोग वाद संवाद के आधुनिक माध्यमों का इस्तेमाल नहीं करने दे रहे हैं, मीडिया सोशल मीडिया की महत्ता को समझ ही नहीं रहे हैं।'

 

आकाश आनंद का वह दो साल पुराना भाषण तब कितना प्रासंगिक था नहीं पता, मगर उससे ज्यादा प्रासंगिक अब हो गया है। जब आकाश आनंद को उन्हीं पदाधिकारियों से पंगा लेना इतना भारी पड़ा है कि उनकी वजह से ही शायद पार्टी से बाहर कर दिया गया है।

वह ताकतवर पदाधिकारी कौन हैं?

बीएसपी समर्थकों के द्वारा लिखी हुई सोशल मीडिया पोस्ट्स का अवलोकन करने पर पता चलता है कि बीएसपी के जिन ताकतवर पदाधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं उनमें मेवालाल गौतम, सतीश चंद्र मिश्रा, राम जी गौतम जैसे तमाम पदाधिकारी शामिल हैं। 

 

जैसे सूरज बौद्ध नाम के एक यूजर एक्स पर बहुत सक्रिय हैं। वह लगातार सतीश चंद्र मिश्रा को जिम्मेदार बताते हुए लेख लिख रहे हैं। ऐसे ही सैकड़ों बीएसपी समर्थक आकाश आनंद का पार्टी से बाहर करवाने में कभी मेवालाल गौतम तो कभी रामजी गौतम को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 

 

इनका मानना है कि पुराने पदाधिकारी बसपा सुप्रीमो के इर्द-गिर्द ऐसा जाल बन चुके हैं, जिसमें किसी और के घुसने पर शिकार कर दे रहे हैं, चाहे वो आकाश आनंद ही क्यों ना हों। माना जा रहा है कि जिस तरह से बीएसपी चुनावों में निष्क्रिय पड़ी हुई है, उस माहौल में आकाश इन नेताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन रहे थे। क्योंकि वह नए सिरे से बीएसपी और जनता के बीच संवाद के रास्ते खोलने का दावा कर रहे हैं। 

 

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क्या आकाश आनंद लॉबीइंग कर रहे हैं?

इसलिए पिछले महीने आकाश आनंद के भाषण की चर्चा देशभर की मीडिया में होने पर ऐसा पेश करने की कोशिश हुई कि आकाश अलग से अपनी लॉबीइंग कर रहे हैं। इसी कड़ी में  3 सितंबर को उनको अपरिपक्व बताते हुए घर बिठा दिया गया। बीएसपी के पदाधिकारी कैसे काम करते हैं इसकी हकीकत दैनिक भास्कर के एक इनसाइड रिपोर्ट से पता चलती है जिसमें लिखा गया है कि एक पत्रकार समर राज के एक ट्वीट को आधार बनाकर अपनी ही पार्टी में सगे संबंधियों पर बहनजी ने कितनी सख्त कार्रवाई की है।

पत्रकार का ट्वीट और सतीश मिश्रा

जिस ट्वीट का जिक्र किया गया है उसमें पत्रकार समर राज लिखते हैं, 'आकाश के साथ हर बार यही होता है जब युवाओं की भाषा बोलकर बीएसपी कार्यकर्ताओं में जोश भरते हैं तब उन्हें अपरिपक्व बताकर घर बिठा दिया जाता है। इतना सब होने के बाद भी अपमान सहते हैं, नीलकंठ की तरह सारा विष पी जाते हैं, एक शब्द नहीं बोलते हैं। मैच्योरिटी यही है, इसलिए आकाश मैच्योर हैं।'

 

इसी ट्वीट को आकाश आनंद के ससुर, अशोक सिद्धार्थ ने रिपोस्ट किया, जिसके बाद बीएसपी में विवाद और बढ़ गया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के हिसाब से इसी ट्वीट के स्क्रीनशॉट की फोटो कॉपी ले जाकर सतीश मिश्रा बहनजी को दिखाया, जिससे निष्कर्ष निकाला जाता है कि अशोक सिद्धार्थ आकाश आनंद का सिर्फ सपोर्ट नहीं कर रहे हैं बल्कि साथ मिलकर साजिश रच रहे हैं।

बीएसपी से आजाद हुए आकाश आनंद

इसके बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पहले आकाश आनंद को एक मौका दिया कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लेते हैं तो वापस से सब कुछ ठीक कर देंगी, मगर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास की घोषणा के बाद मायावती ने ट्वीट करके लिखा कि संन्यास लेने में 17 घंटे का समय लिया गया इसका मतलब आकाश के साथ मिलकर साजिश रची जा रही थी। इन्हीं बातों के साथ 10 सितंबर को आकाश को बीएसपी से आजाद कर दिया गया।

मायावती का हाल जानना बना परेशानी का सबब

इसके बाद मायावती से फिर 12 सितंबर को एक और ट्वीट करते आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को भी पार्टा में जिम्मेदारियां से मुक्त कर दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अपने भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को आगे नहीं बढ़ाऊंगी अगर बेटी दीपिका आनंद आगे तैयार हो सकेंगी तो सहयोग के लिए साथ रखूंगी। पार्टी में इतना सब होने के बाद मायावती ने  13 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इस बात का जिक्र किया कि आकाश आनंद ने ऑफिस इंचार्ज अनूप कुमार को फोन करके हाल-चाल लिया और बहन जी की तबीयत जानी, मगर उन्हें बताने से मना किया।

10 दिन में पार्टी में उथल-पुथल

इसका निष्कर्ष निकालते हुए बीएसपी सुप्रीमो ने कह कि इसमें भी साजिश हो सकती है। 3 सितंबर से लेकर 13 सितंबर के बीच जो कुछ हुआ उसकी टाइमलाइन देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतने स्तर पर शिकायत और घेरेबंदी एक पदाधिकारी के वश की बात नहीं है, बल्कि इसमें अनेक पदाधिकारी शामिल होंगे। इन ताकतवर पदाधिकारियों का मानना होगा कि वह पार्टी के पुराने स्ट्रक्चर की रक्षा कर रहे हैं और आकाश समर्थकों का मानना है कि वह आधुनिक जमाने में पार्टी को पुरातन कालीन व्यवस्था से चलने की कोशिश कर रहे हैं।

 

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बसपा सुप्रीमो के घर में आपसी गलतफहमी

इससे समझ में आता है कि बसपा सुप्रीमो के घर में आपसी गलतफहमी और अविश्वास हावी हो चुका है जिससे पार्टी की तैयारी और रणनीतियां सेकेंडरी होती जा रही हैं। दो साल पहले आकाश आनंद जिस पदाधिकारी तंत्र की बात कर रहे थे वो यथास्थिति बरकरार है बल्कि अब और शक्ति के साथ बीएसपी में मौजूद है। 

 

इस पूरे प्रकरण में किसी का भी पक्ष सही और गलत हो सकता है मगर राजनीति का मामूली जानकारी भी समझता है कि बहनजी तक बात पहुंचाने का कोई खुला माध्यम नहीं है। साथ ही यह पूरी खींचतान पार्टी के स्ट्रक्चर में बदलाव को लेकर हो रही है। बीएसपी समर्थक हों या पत्रकारों की टिप्पणी, जितने नाम का जिक्र कर रहे हैं सिर्फ उतने नाम नहीं है। वहा पुराने पदाधिकारी और युवा आकांक्षा में एक टकराव की स्थिति बनी हुई है।

 

हालांकि बसपा सुप्रीमो ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी पुराने पैटर्न पर ही चुनावी तैयारी कर रही है। साथ ही मायावती दावा करती हैं की वह पांचवीं बार यूपी में सरकार बनाने जा रही हैं।