भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पंजाब में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब यूनिट में बड़ा बदलाव करने के मूड में है। पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कार्यकाल जुलाई में खत्म होने वाला था। इसके बाद पार्टी को अब नए अध्यक्ष पर फैसला करना था और पार्टी अब किसी सिख चेहरे पर दांव लगाना चाहती थी। कुछ समय से चर्चा में चल रहे केवल सिंह ढिल्लों के नाम पर आखिरकार पार्टी ने मुहर लगा दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पंजाब बीजेपी का नया प्रधान फिर से एक पुराना कांग्रेसी को चुना है। पार्टी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी केवल सिंग ढिल्लों के नाम की घोषणा कर दी है।
केवल सिंह ढिल्लों पार्टी की रणनीति में फिट बैठते हैं। बीजेपी पश्चिम बंगाल के बाद पंजाब में भी सरकार बनाना चाहती है लेकिन पार्टी के सामने कई मुश्किलें हैं। पार्टी अब शहरी मतदाताओं के अपने पुराने वोटबैंक से बाहर निकलकर गांवों में संगठन खड़ा कर रही है। इसके साथ ही हिंदू पार्टी के टैग को हटाने के लिए भी कोशिश की जा रही है। अभी पार्टी के प्रधान और वर्किंग प्रधान दोनों हिंदू थे। ऐसे में सिख वोटर्स को लुभाने के लिए सिख चेहरे का प्रधान बनना लगभग तय था।
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कौन हैं केवल सिंह ढिल्लों?
प्रधान की रेस में केवल सिंह ढिल्लों के साथ अन्य नाम भी चर्चा में थे लेकिन पार्टी ने केवल सिंह ढिल्लों के नाम पर ही मुहर लगाई। केवल सिंह ढिल्लों बरनाला जिले से आने वाले एक सीनियर नेता हैं। वह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बरनाला सीट से विधायक भी चुने गए थे। 2007 और 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस टिकट पर जीत हासिल की थी। वह पंजाब कांग्रेस के बड़े जाट सिख चेहरों में गिने जाते थे। 2017 में उन्हें आम आदमी पार्टी के नेता गुरमीत मीत हेयर ने हरा दिया था। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्हें भगवंत मान से हार मिली थी।
इसके बाद साल 2022 में उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया था। 2022 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कांग्रेस ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। उनकी जगह पर पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल के बेटे को टिकट दिया गया था। इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था।
बीजेपी ने दिया था टिकट
केवल सिंह ढिल्लों को कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता है। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें 2022 में भगवंत मान के सीएम बनने के बाद खाली हुई संगरुर लोकसभा सीट से टिकट दिया गया। हालांकि, वह इस सीट पर चुनाव नहीं जीत पाए। इसके बाद से वह पंजाब बीजेपी की कोर कमेटी के सीनियर नेताओं में शामिल हैं।
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सिख चेहरे के पक्ष में नेता
पंजाब बीजेपी के नेता अब सिख चेहरे के पक्ष में थे। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग पंजाब में एक्टिव हैं और वह सिख चेहरे की पैरवी कर रहे थे। हरियाणा के सीएम भी पंजाब में पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं। वह खुद पगड़ी बांधकर पूरे पंजाब के दौरे कर रहे हैं। उनका भी मानना था कि पार्टी को सिख चेहरे को मौका देना चाहिए। पार्टी अब तक पंजाब के सिर्फ हिंदू बहुल इलाकों में ही मजबूत रही है और सिख वोटों के लिए अकाली दल पर निर्भर रही थी लेकिन अब पार्टी विस्तार का मन बना चुकी है।
पार्टी की रणनीति
सिख चेहरे के रूप में केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू समेत कई नाम चर्चा में थी लेकिन केवल सिंह ढिल्लों के नाम पर मुहर लग गई है। केवल सिंह ढिल्लों जट्ट सिख समुदाय से आते हैं, जिसे पंजाब की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। राज्य की बड़ी ग्रामीण आबादी और कई विधानसभा सीटों पर जट्ट सिख वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि बीजेपी ने भी जट्ट सिख समुदाय के नेता को आगे किया है।
