कांग्रेस और INDIA गठबंधन के उसके कई सहयोगी दल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 10 अक्तूबर को बुलाए गए जंतर मंतर प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए। दलों ने इस आंदोलन से दूरी बनाकर रखी। समाजवादी पार्टी की भी रणनीति कुछ ऐसी ही है। वैचारिक तौर पर समर्थन लेकिन व्यवहारिक तौर पर राजनीतिक दल, CJP के आंदोलन से दूरी बना रहे हैं। CJP ने रविवार को भी प्रदर्शन बुलाया है। प्रदर्शनकारियों की मांग एक है कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दे दें। 

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर 2026 से 'लोकतंत्र बचाओ सप्ताह' शुरू किया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 6 अक्तूबर को आकाशवाणी भवन में ही धरने पर बैठ गए थे। कांग्रेस ने यह आंदोलन, कॉकरोच जनता पार्टी से पहले ही शुरू क्या था और अब तक फ्रंट फुट पर कांग्रेस के नेता खेल रहे थे लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के 10 अक्तूबर वाले प्लान के साथ दूर-दूर तक कांग्रेस नजर नहीं आई।

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क्यों CJP को अलग-थलग छोड़ रही है कांग्रेस?

कांग्रेस नेतृत्व CJP को अपने प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देख रही है। कॉकरोच जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व आम आदमी पार्टी (AAP) का मुखर समर्थक रहा है। कांग्रेस पंजाब से लेकर दिल्ली तक, AAP से भिड़ रही है। कांग्रेस कॉकरोच जनता पार्टी को भी अपने लिए उभरते दावेदार के तौर पर देख रही है। पिछले प्रदर्शन में CJP की अगुवाई में केंद्र सरकार पर इतना दबाव बना कि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा। यह आंदोलन करीब 36 दिनों तक चला था। 25 जुलाई यह धरना खत्म हुआ था। अब कांग्रेस, अपने नेतृत्व को लेकर साफ है और कोई टकराव नहीं चाहती है। कांग्रेस का आईटी सेल, सीजेपी प्रोटेस्ट को ट्रोल भी करता कई बार नजर आया है।

कांग्रेस CJP आंदोलन का क्या काट ढूंढ लाई है

कांग्रेस नेताओं ने साफ इशारा किया कि CJP के आंदोलन में शामिल नहीं हो रही। कांग्रेस पहले से ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन चला रही है। कांग्रेस की योजना उसे और मजबूत करने और बूथ स्तर पर ले जाने की है। कांग्रेस ने 12 अक्टूबर को दिल्ली में 'जन आंदोलन' का फैसला किया है। उसने सहयोगी दलों से इसमें शामिल होने की अपील की है। कांग्रेस राहुल गांधी को युवाओं के नेता के तौर पर पेश रहे हैं। 

 

राहुल गांधी छात्रों के साथ संवाद कर रहे हैं। अलग-अलग शहरों में वह 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। हर कार्यक्रम का एक तय ड्रेस कोड होता है, राहुल गांधी आधी पकी धाड़ी और रंग-बिरंगी शर्ट में नजर आकर युवा दिखने की कोशिश भी कर रहे हैं। एक तरफ जब कॉकरोच जनता पार्टी, AAP और लेफ्ट के समर्थक लोग सड़कों पर थे, वह चेन्नई में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। 

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कांग्रेस के सहयोगी दलों का रुख कैसा है?

एक तरफ कांग्रेस दूरी बना रही है, दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस, सपा, वाम दल, शिवसेना (UBT) और NCP-SP समेत INDIA गठबंधन के कई दलों ने CJP के आंदोलन को समर्थन दिया। ममता बनर्जी , अरविंद केजरीवाल और पिनराई विजयन जैसे पूर्व मुख्यमंत्री तो पुलिस हिरासत तक में रहे। उन्हें बाद में रिहा किया गया। ममता बनर्जी से लेकर अरविंद केजरीवाल तक CJP के साथ खड़े नजर आए। उनका कहना है कि बीजेपी लोकतंत्र की हत्या कर रही है। सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से छात्रों को आंदोलन स्थल तक पहुंचने से रोका जा रहा है। 

 

CPI(M) नेता वृंदा करात ने तो यहां तक कह दिया कि अब यह सिर्फ CJP का आंदोलन नहीं रहा। उन्होंने बताया कि वाम दल और उनके युवा और छात्र संगठन CJP के साथ जुड़ रहे हैं। उनके मुताबिक कई अन्य संगठन और हजारों नागरिक भी इसमें शामिल होंगे। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी कहा है कि 10 अक्तूबर को पुलिस ने रोका, हमें जहां रोका जाएगा, उसे ही जंतर मंतर बनवा देंगे। 

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अब कांग्रेस का अगला प्लान क्या है?

केसी वेणुगोपाल, महासचिव, कांग्रेस:-
इंडिया के सांसद, नेता, कार्यकर्ता और सभी चिंतित नागरिक ज्ञानेन्द्र एंड कंपनी के खिलाफ विशाल विरोध मार्च निकालेंगे और हमारे वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल माननीय मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की अपील करेगा। ज्ञानेश को जाना ही होगा। हम पीछे नहीं हटेंगे।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने शनिवार को दिल्ली में 12 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार खिलाफ आंदोलन बुलाया है। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि वे सभी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। उन्होंने बताया है कि मार्च की तैयारी के लिए उन्होंने कई नेताओं के साथ विस्तृत बैठक की है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य न्यायाधीश के पास ज्ञापन सौंपेगा और इस संकट में हस्तक्षेप की मांग करेगा।