महाराष्ट्र की सियासत में कांग्रेस पार्टी और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के विलय को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक बड़ा धड़ा दावा कर रहा है कि सुप्रिया सुले और शरद पवार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकर्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता विपक्ष के संपर्क में हैं। दोनों पार्टियों का विलय हो सकता है। एनसीपी (शरद गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा है कि उनकी पार्टी, कांग्रेस में शामिल नहीं होगी।
 

सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को उनकी पार्टी के कांग्रेस में विलय की अटकलों को खारिज किया है। दोनों पक्षों के बीच ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है और दोनों दल सहयोगी के रूप में साथ मिलकर काम करते रहेंगे। NCP (SP) और कांग्रेस महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) तथा राष्ट्रीय स्तर पर 'इंडिया' गठबंधन के घटक दल हैं।

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सुप्रिया सुले, नेशनलिस्ट काग्रेस पार्टी (शरद पवार):-
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) किसी भी विलय की बातचीत में शामिल नहीं है। न तो हमें कांग्रेस की ओर से कोई प्रस्ताव मिला है और न ही हमने विलय को लेकर उन्हें कोई प्रस्ताव दिया है।

कांग्रेस के साथ रिश्तों पर सुप्रिया सुले ने क्या कहा?

सुप्रिया सुले ने कहा, 'NCP (SP) और कांग्रेस के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध हैं तथा दोनों दल राजनीतिक मुद्दों पर नियमित रूप से आपसी समन्वय करते हैं। जब भी मैं दिल्ली आती हूं, प्रियंका गांधी से मिलने का समय लेती हूं और हम महाराष्ट्र के राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक घटनाक्रमों पर चर्चा करते हैं।'

सुप्रिया सुले ने दावा किया है कि वह महाराष्ट्र के मुद्दों पर राहुल गांधी से भी मिलती हैं, कई संसदीय समितियों में साथ हैं लेकिन विलय नहीं हो रहा है। उन्होने कहा है कि दोनों दलों के बीच अच्छे रिश्ते हैं, विलय की अटकलें गलत हैं। 

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कांग्रेस से अलग होकर बनी थी NCP

अविभाजित एनसीपी, कांग्रेस से अलग होकर बनी थी। शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी काग्रेस पार्टी की स्थापना की थी। जुलाई 2023 में पार्टी दो धड़े में बंट गई थी। एनसीपी, शिवसेना और बीजेपी गठबंधन के साथ सरकार में चली गई थी। शरद पवार ने अपना नियंत्रण पार्टी से खो दिया। 

अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न मिला, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाला गुट NCP (SP) के नाम से जाना जाने लगा।

क्यों लगी ऐसी अटकलें?

कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कांग्रेस से अलग होकर बने क्षेत्रीय दलों के प्रमुखों से मूल पार्टी में वापस लौटने की अपील की थी।