सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व को बेहद खास माना जाता है। इस दौरान सभी भक्त देवी मां के नौ रूपों की आराधना करते हैं। भक्त देवी मां की पूजा-पाठ करने के साथ ही व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि इससे लोगों के दुख-दर्द और कष्ट दूर होते हैं। हिंदू धर्म में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिसमें शारदीय नवरात्रि को सबसे खास माना जाता है। इस त्योहार की सबसे खास बात यह है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं। जहां एक तरफ गुजरात में गरबा खेलने की परंपरा निभाई जाती है, वहीं दूसरी तरफ तेलंगाना में बथुकम्मा उत्सव मनाया जाता है।

 

इस साल 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी और 19 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि समाप्त होगी। इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। अब सवाल उठता है कि अलग-अलग राज्यों में शारदीय नवरात्रि के दौरान किस प्रकार के उत्सव और खास परंपराएं निभाई जाती हैं।

 

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राज्य में मनाई जाती है अलग परंपरा

शारदीय नवरात्रि में देवी मां की आराधना की जाती है। हालांकि, उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक त्योहार मनाने की परंपरा अलग और खास है। जहां एक तरफ उत्तर भारत में कन्या पूजन और कन्या खिलाने की परंपरा है, तो वहीं तमिलनाडु में गुड़िया सजाने की परंपरा निभाई जाती है।

 

 जागरण

 

शारदीय नवरात्रि के दौरान जम्मू-कश्मीर और पंजाब में जागरण की परंपरा निभाई जाती है। जागरण में मुख्य तौर पर रात के समय देवी मां का जागरण किया जाता है। लोग नवरात्रि में किसी एक दिन जागरण करते हैं। इस दौरान सभी लोग भजन-कीर्तन करते हैं और देवी मां की आराधना करते हैं।

 

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 गरबा

 

इस त्योहार के दौरान कई जगहों पर लोग पंडाल में दुर्गा मां की प्रतिमा स्थापित करते हैं और नौ दिनों तक विधिवत पूजा-पाठ करते हैं। इसके बाद शाम के समय सभी लोग एक साथ मिलकर गरबा खेलते हैं। गुजरात में गरबा और डांडिया नवरात्रि उत्सव का खास हिस्सा हैं।

 

 दुर्गा पूजा

 

भारत के पूर्वी राज्यों में दुर्गा पूजा की जाती है। पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा में दुर्गा पूजा की परंपरा निभाई जाती है। यहां दुर्गा मां की मिट्टी की विशाल मूर्तियां पंडालों में स्थापित की जाती हैं। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के समापन के बाद देवी मां की प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।

 

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मैसूर दशहरा

 

कर्नाटक में नवरात्रि के दौरान विजयदशमी के अवसर पर मैसूर दशहरा उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति को सजे हुए हाथी पर रखकर जंबू सवारी का जुलूस पूरे शहर में निकाला जाता है।

 

 बथुकम्मा

 

तेलंगाना में महिलाएं फूलों को गोल आकार में सजाती हैं। इसके बाद वे फूलों के चारों ओर घूमकर गीत गाती हैं और नृत्य करती हैं। अंतिम दिन इन फूलों को साफ पानी में प्रवाहित किया जाता है। इसी परंपरा को बथुकम्मा उत्सव कहा जाता है।

 

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विद्यारंभम

 

केरल में नवरात्रि के आखिरी तीन दिनों में सरस्वती माता की पूजा की जाती है। इस दौरान किताब और पेन को देवी मां के सामने रखा जाता है। इसके बाद विजयादशमी के दिन बच्चों के विद्यारंभ की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन बच्चों को शिक्षा की शुरुआत कराई जाती है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।