हर महीने की तरह भादो के महीने में भी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक जानकारों के अनुसार, अजा एकादशी पर व्रत रखने से व्यक्ति को न सिर्फ सुख-शांति मिलती है, बल्कि जीवन में किए गए पाप कर्मों से भी मुक्ति मिलती है। इसी वजह से लोगों को कोशिश करनी चाहिए कि वे अजा एकादशी का व्रत रखें। कई लोग अजा एकादशी को लेकर असमंजस में रहते हैं और उन्हें इसकी सही तारीख नहीं पता होती है। ऐसे में उन्हें अजा एकादशी की सही तारीख जरूर जाननी चाहिए।
हिंदू धर्म में अजा एकादशी पर्व पर लाखों भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। व्रत रखने से लोगों को मानसिक शांति मिलती है, साथ ही व्यक्ति के अनजाने में किए गए पाप भी धुल जाते हैं। धार्मिक जानकारों के अनुसार, अजा एकादशी के दिन भक्तों को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। आइए जानते हैं अजा एकादशी की सही तारीख क्या है।
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कब मनाई जाएगी अजा एकादशी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, भादो महीने की एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम 7 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी। यह 7 सितंबर की शाम 5 बजकर 3 मिनट पर समाप्त होगी। अजा एकादशी की उदय तिथि 7 सितंबर है। इस वजह से लोगों को 7 सितंबर को अजा एकादशी का व्रत रखना चाहिए।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, इस साल अजा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। जिस वजह से व्रत का महत्व दोगुना बढ़ जाता है। इसी वजह से सभी भक्तों को कोशिश करनी चाहिए कि वे भगवान विष्णु की पूजा करें।
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व्रत पारण समय?
हिंदू पंचांग के अनुसार, विष्णु भक्तों को 8 सितंबर को व्रत का पारण करना चाहिए। धार्मिक जानकारों के अनुसार, पारण का शुभ समय सुबह 6 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर सुबह 8 बजकर 33 मिनट तक है। इसी दौरान भक्तों को व्रत का पारण करना चाहिए। जानकारी के लिए बता दें, 8 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट के बाद द्वादशी तिथि खत्म हो जाएगी।
अजा एकादशी के नियम
1.पीली वस्तुओं का दान- अजा एकादशी के दिन भक्तों को कुछ पीली वस्तुओं का दान करना चाहिए। खासतौर पर पीली मिठाइयां, चने की दाल, केले और पीले रंग के कपड़ों का दान करें।
2.खीर का भोग- भक्तों को माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाना चाहिए। आप भी मखाना, चावल और दूध मिलाकर खीर बनाएं। इसमें तुलसी का पत्ता डालकर भोग लगाएं। इससे व्यक्ति के घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है।
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3.कथा पढ़ें- इस दिन सभी भक्तों को व्रत की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए, वरना व्रत अधूरा माना जाता है।
4.तुलसी पूजन करें- भक्तों को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने के साथ ही तुलसी के पौधे की भी पूजा करनी चाहिए, जिससे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होंगी।
5.मंत्र जाप- सभी भक्तों को मंत्रों का 108 बार जाप करना चाहिए। आप भी 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
