हम अक्सर देखते हैं कि कई लोगों का जीवन अचानक बदल जाता है। इन लोगों के जीवन में धन-दौलत और वैभव आ जाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जिन लोगों की लाइफ अचानक सकारात्मक रूप से बदलती है, यानी उन लोगों के जीवन में सुख, संपत्ति और धन-दौलत आती है, तो ऐसी स्थिति को ज्योतिष शास्त्र में राज योग माना गया है। जिन लोगों की जन्म कुंडली में ग्रहों का विशेष संयोग बनता है, उसे ही राज योग माना जाता है। कुंडली में राज योग के अलावा कई ऐसे योग होते हैं, जो व्यक्ति के जीवन में राज योग जैसे प्रभाव करते हैं।

 

जिन लोगों की कुंडली में राज योग होता है, उनके जीवन में न सिर्फ धन-दौलत आती है, बल्कि व्यक्ति को सत्ता, सम्मान और लीडरशिप क्वालिटी भी मिलती है। पराशर होरा शास्त्र के मुताबिक, जब व्यक्ति की कुंडली के 1, 4, 7 और 10 घरों के स्वामी ग्रह प्रवेश करते हैं, तो इसे राज योग माना जाता है। उदाहरण के तौर पर धनु राशि वाले के स्वामी ग्रह बृहस्पति देव हैं। धनु लग्न की कुंडली के 5वें और 9वें घर में सूर्य और बुध की नजर पड़े, तो इसे राज योग कहा जाता है। अब सवाल उठता है कि कुंडली में राज योग जैसे और कौन-कौन से योग हैं, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

 

यह भी पढ़ें: 15 जुलाई का राशिफल: गुप्त नवरात्रि के दिन किन लोगों पर होगी मां दुर्गा की कृपा?

कुंडली में राज योग जैसे योग

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, कुंडली में राज योग जैसे कुछ और योग होते हैं, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक प्रभाव लाते हैं। कुंडली के सकारात्मक योग के नाम शश पंच महापुरुष योग, गजकेसरी योग, बुध आदित्य योग, धर्म कर्माधिपति योग और विपरीत राज योग हैं, जिनके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक असर पड़ता है।

 

1. शश पंच महापुरुष योग

 

व्यक्ति की कुंडली में यह योग तब बनता है, जब व्यक्ति के लग्न भाव यानी वह घर, जिसमें चंद्रमा विराजमान है, उस भाव से चौथे, सातवें और दसवें घर में तुला, मकर या कुंभ राशि हो, तो उसे शश पंच महापुरुष योग कहते हैं। कुंडली के इस योग के प्रभाव से व्यक्ति को व्यापार में जल्द ही सफलता मिलती है। साथ ही इस योग के प्रभाव से व्यक्ति पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव नहीं पड़ता है।

 

यह भी पढ़ें: कुरान और बाइबल में घमंड को क्यों माना गया है दोष? जानिए इससे बचने का तरीका

 

2. धर्म कर्माधिपति योग

 

जब व्यक्ति की कुंडली के 9वें और 10वें घरों के स्वामी एक-दूसरे के घर में बैठे हों, तो उसे धर्म कर्माधिपति योग कहा जाता है। जैसे मेष राशि के 9वें भाव में बृहस्पति है और 10वें घर में शनि है, तो ग्रहों की चाल के अनुसार यदि बृहस्पति और शनि 9वें या 10वें घर में बैठे हों, तो इसे धर्म कर्माधिपति योग कहा जाएगा। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति को करियर में जल्द ही सफलता मिलती है।

 

3.गजकेसरी योग

 

कुंडली में चंद्रमा और बृहस्पति एक-दूसरे के स्थान पर, जैसे 1, 4, 7 और 10वें घर में बैठे हों, तो इसे गजकेसरी योग कहा जाएगा। गजकेसरी योग के प्रभाव से व्यक्ति को लाइफ में पद, प्रतिष्ठा, ज्ञान, सम्मान और भोग-विलास मिलता है।

 

यह भी पढ़ें:  राशि के हिसाब से कैसा होता है व्यक्ति का स्वभाव? ज्योतिष शास्त्र से समझिए

 

4. बुध आदित्य योग

 

बुध आदित्य योग तब बनता है, जब किसी एक ही राशि में सूर्य और बुध ग्रह बैठे हों। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति को ज्ञान और सम्मान मिलता है। साथ ही लेखन, प्रशासन और शिक्षा से जुड़े लोगों के बिगड़े काम बन जाते हैं।

 

नोट: यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।