22 सितंबर का यह दिन सनातन धर्म के लिए बेहद खास है। आज के दिन परिवर्तिनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा, जिसमें लोग न सिर्फ विष्णु भगवान और लक्ष्मी मां की आराधना करेंगे, बल्कि व्रत भी रखेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को उन पापों से भी मुक्ति मिल जाती है, जो व्यक्ति ने अनजाने में किए थे। इसी वजह से व्यक्ति को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। इसके साथ ही माना जाता है कि परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत कथा पढ़नी या सुननी चाहिए, वरना व्रत अधूरा रह जाता है।

 

परिवर्तिनी एकादशी के दिन विष्णु भगवान के वामन स्वरूप की आराधना की जाती है। इसके साथ ही यह पर्व गणेश उत्सव के दौरान मनाया जाएगा। इस वजह से आज के दिन विष्णु भगवान के साथ-साथ गणेश जी की भी पूजा-आराधना की जाएगी। जिसके बाद 23 सितंबर को सभी भक्त व्रत का पारण करेंगे।

 

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परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा

कथा के अनुसार, एक बार राजा युधिष्ठिर श्री कृष्ण से बात कर रहे थे, जिस दौरान उन्होंने कृष्ण जी से भादो महीने की परिवर्तिनी एकादशी के बारे में पूछा कि इस व्रत का महत्व क्या है? तब कृष्ण ने जवाब दिया कि काफी समय पहले एक राजा थे, जिनका नाम मांधाता था। जो धर्म को मानते थे, साथ ही अपने राज्य में लोगों के साथ न्याय करते थे। उनको अपनी प्रजा से बेहद प्रेम था, जिन्हें वह अपनी संतान समझते थे। इसी वजह से वह हमेशा अपनी प्रजा के सुख-दुख का खास ख्याल रखते थे। इसी तरह राज्य के लोगों को अपने राजा के प्रति स्नेह और सम्मान था। राज्य में खुशहाली का माहौल था, हालांकि यही खुशी का माहौल दुख और चिंता में बदल गया।

 

राज्य के ज्यादातर लोग खेती के जरिए जीविका चलाते थे। हर साल सही मात्रा में बारिश भी होती थी लेकिन एक बार प्रकृति नाराज हो गई, जिस वजह से राज्य में तीन साल तक बारिश नहीं हुई। इससे खेत सूख गए और लोगों के जीवन में अन्न की कमी हो गई। तभी राज्य के लोगों ने इस परिस्थिति को राजा मांधाता के सामने जाहिर किया। लोगों ने उनसे कहा कि इस संकट का कोई रास्ता निकाला जाए। तब राजा मांधाता ने इस संकट के बारे में कई बार सोचा, जिसके बारे में सोचते-सोचते वह जंगल की तरफ निकल गए। जंगल में घूमते-घूमते राजा मांधाता एक ऋषि के आश्रम में गए। ऋषि ने राजा मांधाता का स्वागत किया। तब मांधाता ने ऋषि को बताया कि उनके राज्य में लंबे समय से बारिश नहीं हो रही है। तो ऋषि ने एक अहम बात बताई।

 

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ऋषि ने बताया कि यह सत्ययुग चल रहा है, जिस दौरान राज्य के किसी व्यक्ति ने अनजाने में कोई गलती की है। जिस वजह से राज्य में बारिश नहीं हो रही है। साथ ही ऋषि ने इस संकट से निपटने का उपाय बताया था। ऋषि ने राजा समेत पूरे साम्राज्य को भादो महीने में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी थी। जिसके बाद राजा और उनके साम्राज्य ने व्रत रखा। इस व्रत के प्रभाव से राज्य में बारिश हुई।

क्या है व्रत के नियम?

1. इस व्रत के दौरान व्यक्ति को विष्णु भगवान की पूजा-पाठ करनी चाहिए। इसके साथ ही गणेश भगवान की पूजा-पाठ करनी चाहिए। पूजा के बाद 'ॐ उमापुत्राय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। जिससे व्यक्ति को संतान प्राप्ति होगी।

 

2. परिवर्तिनी व्रत का पारण 23 सितंबर को सुबह किया जाएगा। इस दौरान व्यक्ति को ध्यान रखना चाहिए कि वे स्नान करने के बाद ही पारण करें।

 

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3. 23 सितंबर को सुबह 6:10 से लेकर 8:35 के बीच व्रत का पारण करने का शुभ समय है, तो इसी दौरान व्यक्ति को व्रत का पारण करना चाहिए।

 

4. व्यक्ति को परिवर्तिनी एकादशी के दिन कपड़ों और अन्न का दान करना चाहिए। साथ ही आज के दिन दूसरों को कड़वी बातें बोलने से बचना चाहिए।

 

नोट- यह कथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।