गुजरात के पालिताना में स्थित शत्रुंजय पहाड़ी को 'सिद्धक्षेत्र' माना जाता है। यहां पत्थरों को तराश कर बनाए गए 863 से लेकर 900 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं। सफेद संगमरमर से बने ये मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना पेश करते हैं। जैन धर्मावलंबियों के लिए यह सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने तपस्या की थी।

 

इस पहाड़ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे 'देवताओं का शहर' कहा जाता है। यहां की सीढ़ियां चढ़ना और इन मंदिरों के दर्शन करना मोक्ष का द्वार माना जाता है लेकिन जैसे ही सूरज ढलने लगता है, इस पूरे इलाके का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाला यह पहाड़ शाम होते ही एकदम सुनसान हो जाता है।

 

यह भी पढ़ें: कन्याकुमारी का अनोखा शक्तिपीठ, जहां एक ही शिवलिंग में बसते हैं तीनों देव

सूरज ढलते ही सन्नाटा क्यों?

शत्रुंजय पहाड़ी पर सूर्यास्त के बाद सन्नाटा छाने के पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक कारण है। जैन धर्म में 'अहिंसा' को सर्वोपरि माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, रात के समय सूक्ष्म जीव और कीड़े अधिक सक्रिय हो जाते हैं। अंधेरे में अनजाने में भी किसी जीव की हत्या न हो, इसलिए यहां रात में ठहरना सख्त मना है।

नियम और परंपराएं

  • शाम की आरती के बाद सभी पुजारियों और भक्तों को पहाड़ से नीचे उतरना पड़ता है। रात के समय यहां केवल 'देवताओं का वास' माना जाता है।
  • इस पवित्र पर्वत पर कुछ भी खाना या साथ ले जाना वर्जित है। भक्त नीचे से ही उपवास रखकर ऊपर जाते हैं।
  • पालिताना को दुनिया का पहला आधिकारिक शाकाहारी शहर घोषित किया गया है, जहां मांस और अंडे की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

यह भी पढ़ें: बृहस्पति के दिन रुके हुए सारे काम होंगे पूरे, जानें किन राशियों की बदलेगी किस्मत

प्रमुख मंदिर और वास्तुकला

यहां का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर भगवान आदिनाथ का है। मंदिरों का निर्माण 11वीं शताब्दी से शुरू हुआ था और पीढ़ी दर पीढ़ी इसे भव्य बनाया गया। नक्काशी इतनी बारीक है कि इसे देखकर प्राचीन भारतीय शिल्प कौशल की श्रेष्ठता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।