हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। इन नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा होती हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। उन्हें साहस, शक्ति, शांति और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विधि विधान से मां की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्रों और प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जानते हैं।
मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप का नाम उनके माथे पर विराजमन अर्धचंद्र के कारण पड़ा है। उनका वाहन सिंह है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से सभी भय दूर हो जाते हैं। उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र शस्त्र सुशोभित हैं जिनमें त्रिशूल, तलवार, गदा, धनुष-बाण, कमल और कमंडल शामिल हैं।
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मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना कैसे करें?
नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना करें। पूजा की शुरुआत दीप जलाकर करें। इसके बाद लाल और पीले फूल अर्पित करें। उन्हें कुमकुम लगाएं और फिर फल और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद मां चंद्रघंटा के मंत्रों का जाप करें और आखिर में परिवार की मंगल कामना की प्रार्थना करें।
मां चंद्रघंटा के मंत्रों का जाप करें
मां चंद्रघंटा मंत्र
ऐं श्रीं शक्तयै नम:
चंद्रघंटा स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
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कौन से हैं प्रसिद्ध मंदिर?
प्रयागराज- मां चंद्रघंटा का प्रसिद्ध मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में है। इस मंदिर की खास मान्यता है। इसे क्षेमा माई का मंदिर कहा जाता है। यहां पर मां दुर्गा देवी चंद्रघंटा के रूप में विराजमन हैं। इस मंदिर का वर्णन पुराणों में भी मिलता है। मान्यता है कि इस मंदिर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है। खासतौर से नवरात्रि के तीसरे दिन इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती हैं।
वाराणसी- उत्तर प्रदेश की काशी में मां चंद्रघंटा को समर्पित चंद्रघंटा देवी मंदिर है। इस मंदिर की विशेष मान्यता है। यहां पर खासतौर से मां को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है। इस प्रसाद को हर रोज सुबह की मंदिर में बनाया जाता है।
दिल्ली- दिल्ली के करोल बाग में झंडेवालन मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर मां दुर्गा की चंद्रघंटा स्वरूप में पूजा होती है। नवरात्रि में इस मंदिर में बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इस मंदिर को फूलों से सजाया जाता है।
