एशियन गेम्स 2026 का 10वां दिन भारत के लिए बेहद खास रहा। एक तरफ तेज धावक वित्या भारत के लिए ब्रॉन्ज जीतकर आईं तो दूसरी तरफ भारत के गुलवीर सिंह ने दूसरा सिल्वर मेडल जीत लिया। इस बार उन्होंने यह कमाल 15000 मीटर की रेस में किया है। गुलवीर 10 हजार मीटर की रेस में पहले ही भारत को सिल्वर मेडल दिला चुके हैं। वह एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। 

भारत के गुलवीर सिंह ने सोमवार को नागोया में चल रहे एशियन गेम्स की पुरुष 1500 मीटर फाइनल में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने यह दूरी 3 मिनट 36.72 सेकेंड में पूरी की, जो उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यह इन खेलों में उनका दूसरा पदक है।

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कैसे गुलवीर को मिला दूसरा सिल्वर?

जापान के काजुतो इइजावा ने 3 मिनट 36.35 सेकेंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। यह एशियन गेम्स का नया रिकॉर्ड भी है। गुलवीर उनसे 0.37 सेकेंड पीछे रहे। दौड़ के आखिरी दौर में बाजी पलट गई। गुलवीर दौड़ के ज्यादातर हिस्से में आगे ही हे लेकिन सिरफ 0.37 सेकेंड में चूक गए।

अंतिम दौर में इइजावा ने रफ्तार बढ़ाई और उन्हें पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया। ब्रॉन्ज मेडल एक और जापानी धावक नागिया मोरी को मिला। उन्होंने 3 मिनट 37.92 सेकेंड में यह उपलब्धि हासिल की।

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10 हजार मीटर की रेस में जीता पहला सिल्वर

गुलवीर इससे पहले एशियन गेम्स में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में भी सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। उस दौड़ में उन्होंने 28 मिनट 29.38 सेकेंड में जीत हासिल की है। गोल्ड बहरीन के बिरहानु बालेव को मिला था, जिन्होंने 28 मिनट 27.51 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी।

कौन हैं गुलवीर सिंह?

गुलवीर का जन्म 1 जून 1998 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा में हुआ है। वह एक किसान परिवार से आते हैं। उनके गांव में सेना में जाने की परंपरा रही है। उन्होंने बताया है कि दौड़ उनके लिए पहले सिर्फ सेना में भर्ती होने का जरिया थी। उन्हें एशियन गेम्स या कॉमनवेल्थ गेम्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।

साल 2018 में वे स्पोर्ट्स कोटे से भारतीय सेना में शामिल हुए और ग्रेनेडियर्स में तैनात रहे। प्रतियोगी दौड़ की बारीकियां उन्होंने सेना में आने के बाद ही सीखीं। पहला सीनियर पदक जीतने में उन्हें चार साल लगे। साल 2022 में कालीकट के फेडरेशन कप में उन्होंने 10,000 मीटर में ब्रॉन्ज जीता।

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कैसे मिली गुलवीर सिंह को कामयाबी?

साल 2024 में उन्होंने अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में कोच स्कॉट सिमंस के साथ ट्रेनिंग शुरू की। इसके बाद उन्होंने 3000, 5000 और 10,000 मीटर में कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े। साल 2025 में उन्होंने 10,000 मीटर में 27 मिनट 0.22 सेकेंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उसी साल एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 5000 और 10,000 मीटर, दोनों में गोल्ड जीता।

 

इस साल ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 10,000 मीटर में सिल्वर और 5000 मीटर में ब्रॉन्ज जीता। एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में दो व्यक्तिगत पदक जीतने वाले वह पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट हैं। इसी साल न्यूयॉर्क सिटी हाफ मैराथन में उन्होंने 59 मिनट 42 सेकेंड का समय निकाला। हाफ मैराथन एक घंटे से कम समय में पूरी करने वाले वह पहले भारतीय हैं।