ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की स्टार वेटलिफ्टर बिंदियारानी देवी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 58 किलो कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। इस जीत के साथ भारत की झोली में टूर्नामेंट का छठा पदक भी आ गया। बिंदियारानी ने कुल 199 किलो वजन उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया और एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया।

 

फाइनल मुकाबले में बिंदियारानी देवी ने स्नैच में 87 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 112 किलोग्राम वजन उठाया। हालांकि नाइजीरिया की रफियातु फोलाशादे ने कुल 229 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जबकि कनाडा की एन सोफी ताशेरो ने 215 किलोग्राम के साथ सिल्वर मेडल जीता। इसके बावजूद बिंदियारानी ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के शानदार प्रदर्शन को आगे बढ़ाया।

 

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दूसरा कॉमनवेल्थ मेडल जीता

यह बिंदियारानी देवी के करियर का दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में महिलाओं के 55 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता था। इसके अलावा कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप 2019 में गोल्ड और 2021, 2025 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के साथ 2023 एशियन चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें भारत की भरोसेमंद वेटलिफ्टरों की लिस्ट में शामिल कर दिया है।

मीराबाई चानू से मिली प्रेरणा

मणिपुर की रहने वाली बिंदियारानी देवी बचपन से ही ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू को अपना आदर्श मानती रही हैं। शुरुआती दिनों में वह खान-पान को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं थीं लेकिन मीराबाई की सलाह के बाद उन्होंने अपनी डाइट और फिटनेस पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने जूनियर स्तर से लेकर सीनियर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक लगातार सफलता हासिल की और आज देश की प्रमुख वेटलिफ्टरों में गिनी जाती हैं।

 

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भारत की पदक तालिका हुई मजबूत

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टरों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार को ही ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं के 53 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीतकर देश को गौरवान्वित किया। इससे पहले ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रचा। वहीं ऋषिकांत सिंह और राजा मुथुपांडी ने भी सिल्वर मेडल जीतकर भारत की पदक संख्या बढ़ाई। बिंदियारानी का ब्रॉन्ज मेडल इस शानदार अभियान में एक और अहम उपलब्धि माना जा रहा है।